Chief Secretary ने DMs को दिए निर्देश, West Bengal में राजनीतिक हिंसा के पीड़ितों की बनेगी सूची

पश्चिम बंगाल सरकार पिछले 25 वर्षों में राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों में से एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की योजना बना रही है। इसके लिए मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को प्रभावित परिवारों का विवरण जुटाने के निर्देश दिए हैं। इस योजना की पात्रता और प्रक्रिया को लेकर जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।
राज्य प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार उन परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की योजना बना रही है, जिन्होंने पिछले 25 वर्षों में राजनीतिक हिंसा के कारण अपने परिजनों को खो दिया है। इस प्रस्तावित कदम का उद्देश्य राज्य में राजनीतिक प्रतिशोध से प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करना है। सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार उन लोगों के परिवारों की पहचान करेगी, जिनकी इस दौरान राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में जान गई थी। यदि आवश्यक हुआ, तो प्रशासन प्रभावित परिवारों से जानकारी जुटाने और पात्र लाभार्थियों की पहचान करने में मदद के लिए विज्ञापन भी जारी कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्तावित योजना के बारे में विस्तृत जानकारी देने वाली एक आधिकारिक अधिसूचना जल्द ही जारी की जा सकती है। हालाँकि, सरकार ने अभी तक सार्वजनिक रूप से पात्रता मानदंड या उन परिवारों के चयन की प्रक्रिया की घोषणा नहीं की है।
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पश्चिम बंगाल सरकार ने क्या प्रस्ताव रखा है?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सरकार उन परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देने की योजना बना रही है, जिन्होंने पिछले 25 वर्षों में राजनीतिक हिंसा के कारण किसी अपने को खो दिया है। इस प्रस्ताव में उन लोगों के परिवार शामिल हैं, जिनकी मौत इस दौरान राजनीतिक प्रतिशोध के कारण हुई थी। उम्मीद है कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले प्रशासन ऐसे परिवारों का विवरण जुटाएगा। इन परिवारों को खोजने और उनकी पहचान करने के लिए, ज़रूरत पड़ने पर सरकार विज्ञापन भी जारी कर सकती है। जल्द ही एक औपचारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी होने की उम्मीद है, जिसमें इस योजना और इसके क्रियान्वयन के बारे में और अधिक जानकारी दी जा सकती है।
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मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों के साथ बैठक की
सूत्रों के मुताबिक, यह कदम गुरुवार शाम को मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल और जिलाधिकारियों के बीच हुई एक वर्चुअल बैठक के बाद उठाया गया है। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान, मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को उन लोगों के परिवारों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का निर्देश दिया, जिनकी मौत राजनीतिक हिंसा में हुई थी। इस कवायद से राज्य प्रशासन को विभिन्न जिलों में प्रभावित परिवारों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है। पहचान की प्रक्रिया और आवेदकों से मांगे जाने वाले दस्तावेजों के बारे में विस्तृत जानकारी अभी आना बाकी है।
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TMC विधायक कुणाल घोष ने क्या कहा?
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले भी राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों को समर्थन दिया है। दिए गए बयान के अनुसार, घोष ने कहा यह कोई नई बात नहीं है। ममता बनर्जी पहले भी राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के साथ खड़ी रही हैं। राज्य सरकार के इस प्रस्तावित कदम से पिछले 25 वर्षों में राजनीतिक हिंसा से प्रभावित परिवारों पर फिर से ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है। इस प्रस्ताव का दायरा, पात्रता की शर्तें और रोजगार देने की प्रक्रिया क्या होगी, यह तय करने में औपचारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) महत्वपूर्ण होगी।
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