विधान परिषद- छोटा चुनाव बड़े सबक

MLC Election Results 2026
ANI

विधान परिषद चुनावों में भाजपा मात्र छह सीटों पर पर अपनी साख बचाने में सफल रही जबकि समाजवादी पार्टी अपने पीडीए के बल पर पांच सीटें जीतने में सफल रही और यही नहीं उसने वाराणसी, आगरा व लखनऊ में बीजेपी के गढ़ों में परचम फहराकर भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दीं।

उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। सर्वाधिक 11 सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश का चुनाव परिणाम आ चुका है जो भाजपा तथा सपा के बीच 6-5 के परिणाम से समाप्त हुआ। यह था तो छोटा चुनाव किंतु इस पर सभी राजनैतिक विश्लेषकों की दृष्टि थी कि 2027 विधानसभा चुनाव के पहले कौन क्लीन स्वीप करता है किंतु शिक्षकों व स्नातकों ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि आगामी चुनाव किसी भी दल या गठबंधन के लिए बहुत आसान नहीं होंगे। मुकाबला कांटे का होगा। जिस दल के प्रत्याशी व कार्यकर्ता धरातल पर उतर कर अपने मतदाताओं के साथ गहन संपर्क व संवाद में रहेंगे उन्हीं को लाभ होगा।

विधान परिषद चुनावों में भाजपा मात्र छह सीटों पर पर अपनी साख बचाने में सफल रही जबकि समाजवादी पार्टी अपने पीडीए के बल पर पांच सीटें जीतने में सफल रही और यही नहीं उसने वाराणसी, आगरा व लखनऊ में बीजेपी के गढ़ों में परचम फहराकर भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दीं। अब सपा में उत्साह का वातावरण है। उसके नेता व प्रवक्ता कह रहे हैं कि वर्ष 2024 में अयोध्या में भगवान राम का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ और अब 2026 में काशी की नगरी में महादेव और लखनऊ में प्रभु श्रीराम के अनुज लक्ष्मणजी का भी आशीर्वाद मिल चुका है। सफलता से उत्साहित समाजवादी पार्टी अब इसी नैरेटिव को आगे बढ़ाएगी।

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भारतीय जनता पार्टी के लिए अत्यंत सतर्क हो जाने का समय आ गया है। यदि वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेश के मतदाताओं ने जो रवैया दिखाया था और सपा -कांग्रेस गठबंधन ने प्रदेश में लोकसभा की सर्वाधिक सीटें जीत ली थीं अगर वही रुख अभी भी बरकार है तब यह परिस्थितियों को और भी कठिन बना सकता है।

भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़ा झटका रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र लखनऊ की स्नातक सीट पर लगा है। यहाँ पार्टी के प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश सिंह को सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने बहुत आसानी से पराजित कर दिया। यह स्पष्ट संकेत है कि अगर भाजपा ने अपना चुनावी प्रबंधन और कार्यकर्ताओं व मतदाताओं के मध्य अपना संवाद, संपर्क, व्यवहार नहीं सुधारा तो फिरऔर भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वाराणसी का परिणम भी स्थिति को गंभीर बना रहा है। प्रदेश के संगठन पर सवालिया निशान भी उठ रहे हैं। वाराणसी का जनमानस प्रश्न कर रहा है कि जो उम्मीदवार पिछले चुनावों में पराजित हो चुका था, जनता के मध्य कभी नहीं रहता, केवल चुनावो के छह महीने पूर्व गणेश परिक्रमा करके पार्टी का टिकट कैसे लेकर आ जाता है? ऐसी परिस्थितियों में उन कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है जो धरातल पर उतरकर पार्टी के लिए कड़ी मेहनत कर रहे होते हैं।

वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में जितना विकास हुआ है उतनी किसी ने कल्पना भी नहीं करी थी फिर भी वहां भाजपा के वोट प्रतिशत में लगातार गिरावट और विधान परिषद की दोनों सीटों पर हार भाजपा के लिए चिंता का विषय है। काशी विश्वनाथ मंदिर का भव्य कारिडोर बना, जिससे पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई, रोप-वे बन रहा है, वाराणसी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम मिलने जा रहा है, रुद्राक्ष  कन्वेंशन  सेंटर क्रियाशील है, काशी को सांस्कृतिक-आध्यात्मिक गतिविधियों पूरे भारत से से जोड़ा जा रहा है, निवेशक आ रहे हैं, काशी -तमिल संगमम का आयोजन किया जा रहा है। इस सबके बाद भी वाराणसी में एमएलसी चुनावों में दोनों सीटों पर पराजय स्थानीय नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रही है। वाराणसी की पराजय से यह बात भी उठ रही है कि वाराणसी नगर भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

भाजपा के लिए अच्छी बात ये है कि विधानसभा चुनावों के पूर्व एक लिटमस टेस्ट हो गया। अभी भी भाजपा के पास कार्यकर्ताओं में उत्साह जागरण तथा अपनी रणनीति नए सिरे से गढ़ने के लिए पर्याप्त समय है। प्रदेश भाजपा की नवगठित कर्यकारिणी की बैठक होने जा रही है जिसमें हर बिंदु पर चर्चा होगी। यहाँ अमित शाह जी  की अध्यक्षता में कडे़ कदम भी उठाए जा सकते हैं। दीपावली के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां तथा भाजपा का चुनाव अभियान प्रारंभ होगा। भाजपा के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि जनमानस तो योगी-योगी कर रहा है किंतु कार्यकर्ताओं में उत्साह नहीं है। भाजपा के लिए अपने कार्यकर्ताओं में उत्साह जगाने का समय है क्योंकि विभिन्न कारणों से उणमें धरातल पर उत्साह नहीं दिखाई दे रहा है। अगर बीजेपी का कार्यकर्ता उत्साहित हो गया और घरों से निकल पड़ा तो फिर भाजपा आसानी से तीन सौ पार जा सकती है।

भाजपा अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी जितनी जल्दी जितना कम कर लेगी, टिकट वितरण सही होगा, योगी आदित्यनाथ सरकार चुनावों से पूर्व एक लाख नौकरी देने का वादा सफलतापूर्वक पूरा कर लेगी और साथ ही अगर 69,000 शिक्षकों की भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट से सुलझ जाएगा तो विधानसभा चुनाव भाजपा के नियंत्रण में आ जाएगा।

- मृत्युंजय दीक्षित

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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