UP में Ganga River के 700 किमी बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन पूरा, NGT को सौंपी रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सूचित किया है कि राज्य में उन्नाव से बलिया तक 13 जिलों में गंगा नदी के 700 किलोमीटर लंबे बाढ़ क्षेत्र का भौतिक सीमांकन पूरा कर लिया गया है। इस कार्य के लिए चिह्नित दायरे में कुल 7,350 खंभे स्थापित किए गए हैं। प्रशासन के अनुसार इस व्यवस्था से नदी किनारे होने वाले अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी।
उत्तर प्रदेश शासन ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को बताया कि राज्य में गंगा नदी के बाढ़ के मैदान क्षेत्र की सीमा तय करने का काम पूरे 700 किलोमीटर के हिस्से में पूरा हो गया है। एनजीटी ने पहले इस काम की प्रगति पर रिपोर्ट मांगी थी। पच्चीस अगस्त को सुनवाई के दौरान एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की खंडपीठ ने कहा कि राज्य के सिंचाई और जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता ने सीमांकन के काम की स्थिति के बारे में 22 अगस्त को एक हलफनामा दाखिल किया था।
खंडपीठ ने कहा कि राज्य के वकील के अनुसार उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के 700 किलोमीटर के हिस्से में बाढ़-मैदान वाले क्षेत्र की पहचान करने और उसकी सीमा तय करने का काम पूरा हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘राज्य ने गंगा नदी के बाढ़-मैदान वाले क्षेत्र की सुरक्षा एवं संरक्षण की दिशा में काफी ठोस प्रगति की है। उसने कुल 7,350 खंभे लगाकर उन्नाव से बलिया तक सभी 13 संबंधित जिलों में नदी के चिह्नित हिस्से के लगभग 700 किलोमीटर की भौतिक सीमा के निर्धारण का काम पूरा कर लिया है।’’ इसमें कहा गया है कि सीमांकन का काम पूरा करना, गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के लक्ष्यों को हासिल करने और एनजीटी के पिछले निर्देशों के पालन की दिशा में एक अहम कदम है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘बाढ़ के मैदान क्षेत्र की जमीनी स्तर पर पहचान करने से संबंधित अधिकारियों को प्रभावी ढंग से निगरानी करने और चिह्नित इलाके में अनधिकृत गतिविधियों, अतिक्रमण और निर्माण को रोकने में मदद मिलेगी।’’ अधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि रिपोर्ट में गंगा नदी की सहायक नदियों के लिए बाढ़ के मैदानों की सीमा तय करने की स्थिति के बारे में भी जानकारी दी गई है।
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