Delhi Race Course Case: 1994 से पेंडिंग Lease Renew न होने पर बड़ी कार्रवाई, Government ने लिया कब्जा

Delhi Race Club
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Aug 27 2026 7:04PM

दिल्ली रेस क्लब से जुड़े बेदखली मामले में न्यायिक हस्तक्षेप के बाद इस विशाल भूखंड का हस्तांतरण सार्वजनिक परिसरों से अनधिकृत कब्जा हटाने की प्रशासनिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वर्तमान में यह पूरी जमीन केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है और मामले की अगली सुनवाई सितंबर में निर्धारित है।

दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के पास रेस कोर्स इलाके की 53.242 एकड़ जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को भूमि एवं विकास कार्यालय ने इस जमीन का औपचारिक रूप से कब्जा लेते हुए इसे केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को देखरेख और रखरखाव के लिए सौंप दिया। जमीन को जिस स्थिति में वह मौजूद थी, उसी स्थिति में सौंपे जाने का उल्लेख दस्तावेज में किया गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई संपदा सेवा संगठन के 11 अगस्त के आदेश और उसके बाद 26 अगस्त को जारी आदेश एवं पत्र के आधार पर की गई है। भूमि एवं विकास कार्यालय की ओर से जमीन का हस्तांतरण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पूर्वी मंडल के कार्यकारी अभियंता को किया गया। दोनों विभागों के अधिकारियों ने हस्तांतरण और कब्जा लेने संबंधी दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया।

गौरतलब है कि यह कार्रवाई दिल्ली रेस क्लब (1940) लिमिटेड से जुड़े बेदखली मामले में अदालत के आदेश के बाद हुई है। 25 अगस्त को नई दिल्ली जिला स्थित पटियाला हाउस अदालत के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने रेस क्लब की ओर से दाखिल उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें संपदा अधिकारी के 11 अगस्त के बेदखली आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी।

अदालत के सामने रेस क्लब ने दलील दी थी कि उसे अपना पक्ष रखने और साक्ष्य पेश करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि संपदा अधिकारी ने क्लब को जवाब और साक्ष्य दाखिल करने के लिए कई मौके दिए थे, लेकिन क्लब निर्धारित अवसरों के बावजूद अपना जवाब और साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इसके बाद उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर संपदा अधिकारी ने आगे की कार्रवाई की।

बता दें कि यह मामला सार्वजनिक परिसर से अनधिकृत कब्जा हटाने संबंधी कानून की धारा 5 के तहत चल रहा है। इससे पहले 12 मार्च 2026 को नोटिस जारी कर दिल्ली रेस क्लब को परिसर खाली करने और भूमि एवं विकास कार्यालय को शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था।

पट्टे को लेकर भी अदालत ने अहम टिप्पणी की है। अदालत के मुताबिक रेस क्लब को दिया गया पट्टा 1994 के बाद किसी नए दस्तावेज के जरिए नवीनीकृत नहीं हुआ। अदालत ने उच्चतम न्यायालय के दिल्ली विकास प्राधिकरण बनाम आनंद राज एजेंसीज प्राइवेट लिमिटेड मामले के फैसले का भी हवाला दिया और कहा कि पट्टे की अवधि खत्म होने के बाद केवल किराया देते रहना अपने आप पट्टे के नवीनीकरण के बराबर नहीं माना जा सकता।

इसी आधार पर अदालत ने माना कि रेस क्लब अंतरिम रोक के लिए प्रथम दृष्टया मजबूत मामला साबित नहीं कर पाया। अदालत ने अर्जी खारिज कर दी है। मामले की अगली सुनवाई 26 सितंबर 2026 को होगी।

केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में अधिवक्ता आशीष के. दीक्षित, केंद्रीय सरकार के स्थायी अधिवक्ता, पैरवी कर रहे हैं। फिलहाल 53.242 एकड़ जमीन की देखरेख की जिम्मेदारी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पास है और अदालत में मुख्य मामला अभी विचाराधीन है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़