Telangana Assembly के पहले दिन भारी हंगामा, HC ने BRS विधायकों को रोकने पर पुलिस को लगाई फटकार

हैदराबाद में तेलंगाना विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन अध्यक्ष के खिलाफ कथित टिप्पणी और विपक्षी विधायकों के साथ पुलिस कार्रवाई पर जमकर विवाद हुआ। हंगामे के बाद मामला तेलंगाना उच्च न्यायालय पहुंचा, जिसने पुलिस को विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से न रोकने का स्पष्ट निर्देश दिया। अदालत ने डीजीपी को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
हैदराबाद, सात सितंबर तेलंगाना विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार के खिलाफ बीआरएस के एक एमएलसी की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और बीआरएस की महिला विधायकों के साथ पुलिस की कथित बदसलूकी को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया। सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के बीच आरोप-प्रत्यारोप के दौरान पंचायत राज मंत्री डी. अनसूया (सीतक्का) ने विधान परिषद सदस्य सदस्य पर अध्यक्ष की दिवंगत मां का अपमान करने का आरोप लगाया, जिसके बाद अध्यक्ष भावुक हो गए। कई दलित कांग्रेस विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों (एमएलसी) ने भी आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा विपक्षी विधायकों को विधानसभा परिसर के बाहर रोके जाने के दौरान बीआरएस एमएलसी टी. मधुसूदन ने अध्यक्ष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की।
मधुसूदन ने आरोप से इनकार करते हुए कहा कि यदि उनकी किसी टिप्पणी को अध्यक्ष के खिलाफ माना गया है तो वह उसे वापस लेने को तैयार हैं। सत्र की शुरुआत भी हंगामेदार रही। भाजपा सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए नागरिकों की निजी जमीनों को पंजीकरण अधिनियम की धारा 22-ए के तहत प्रतिबंधित सूची में शामिल किए जाने के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की।
इस सूची में शामिल संपत्तियों के पंजीकरण और अन्य लेन-देन पर रोक होती है। हंगामे के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। स्थगन के दौरान विधानसभा के बाहर बीआरएस नेताओं और पुलिस के बीच टकराव हुआ।
काली टी-शर्ट पहने बीआरएस नेताओं को पुलिस द्वारा रोका गया। बीआरएस विधायक सुनीता लक्ष्मा रेड्डी ने आरोप लगाया कि जब पुलिस विधायकों को अंदर जाने से रोक रही थी तब उन्हें मामूली चोट लगी। बीआरएस विधायक पी. सबिता इंद्रा रेड्डी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने महिला विधायकों की साड़ियां खींचीं।
टी. हरीश राव समेत अन्य नेताओं ने विरोध में टी-शर्ट उतार दी और पुलिस उन्हें वहां से ले गई। पार्टी ने कहा कि के. टी. रामा राव समेत कई नेता मामूली रूप से घायल हुए। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के आश्वासन के बाद भाजपा ने जमीन के मुद्दे पर बाद में चर्चा के लिए सहमति जताई।
अध्यक्ष के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर रेड्डी ने इसे तेलंगाना के चार करोड़ लोगों का अपमान और राज्य के लिए ‘‘काला दिन’’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने रविवार को पार्टी विधायकों और एमएलसी की बैठक में उन्हें इस तरह व्यवहार करने के लिए उकसाया। इस बीच, विधानसभा के बाहर हुआ विवाद तेलंगाना उच्च न्यायालय पहुंच गया।
बीआरएस विधायक टी. श्रीनिवास यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पुलिस को बीआरएस विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से नहीं रोकने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि विधानसभा के नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करना विधानसभा अध्यक्ष का अधिकार है, पुलिस का नहीं। उच्च न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को घटना की जांच कर कथित ज्यादती के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया तथा डीजीपी से रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
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