West Asia में तनाव के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ा रहा भारत, S Jaishankar ने दी जानकारी

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया के साथ भारत के संबंधों पर बनी संसदीय परामर्श समिति की बैठक में सांसदों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय संघर्ष के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में विविधता ला रहा है और व्यापार संपर्क मजबूत कर रहा है। बैठक में खाड़ी देशों में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और मक्का समझौते जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

नयी दिल्ली, सात सितंबर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को पश्चिम एशिया के साथ भारत के संबंधों को लेकर गठित परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता की और सांसदों को बताया कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के बावजूद देश अपने व्यापार और संपर्क को आगे बढ़ा रहा है। जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “खाड़ी और डब्ल्यूएएनए (पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका) क्षेत्र के साथ भारत के करीबी संबंधों को रेखांकित किया, जिसमें व्यापार, निवेश, ऊर्जा, समुद्री मामलों और लोगों के बीच रिश्तों जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से जारी साझेदारी एवं सहयोग शामिल है।” उन्होंने परामर्श समिति के साथ बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच एक करोड़ भारतीयों का कल्याण और ऊर्जा एवं उर्वरक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अपने व्यापार और संपर्क को आगे बढ़ाने की दिशा में की जा रही हमारी कोशिशों पर भी प्रकाश डाला।” सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कई सांसदों ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भारत की ऊर्जा जरूरतों का मुद्दा उठाया, जिस पर जयशंकर ने कहा कि संकट के बावजूद नयी दिल्ली अपनी ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में विविधता ला रही है। सूत्रों के अनुसार, जयशंकर ने बैठक में कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसके अमेरिका और ईरान, दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं।

उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बारे में भी बात की। जयशंकर ने संघर्ष के बाद ईरान से ऊर्जा और अन्य उत्पाद खरीदने पर अमेरिकी प्रतिबंधों के मुद्दे पर भी चर्चा की और कहा कि भारत ने इस क्षेत्र में अपने राजनीतिक संबंध मजबूत किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ सांसदों ने मक्का समझौते पर भी चिंता जताई और इस पर भारत के रुख के बारे में पूछा।

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने सात अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, अगर इनमें से किसी एक पर भी हमला होता है, तो उसे सभी पर हमला माना जाएगा। यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उठाया गया।

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