Tirupati Laddu मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश से बाहर ट्रायल भेजने की याचिका खारिज की

उच्चतम न्यायालय ने तिरुपति के लड्डुओं में कथित मिलावटी घी मामले की सुनवाई आंध्र प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने से मना कर दिया है। अदालत ने आरोपी कारोबारी मच्छिंद्र शांताराम लंके की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि कई गवाह राज्य के हैं और एसआईटी जांच कर चुकी है।
नयी दिल्ली, पांच नवंबर उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तिरुपति के लड्डुओं में मिलावटी घी के इस्तेमाल के मामले की सुनवाई आंध्र प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने के अनुरोध वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले के आरोपी महाराष्ट्र के डेयरी उद्योग के कारोबारी और मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मच्छिंद्र शांताराम लंके की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी। लंके की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि नेता मामले को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं, जिससे निष्पक्ष सुनवाई के लिए प्रतिकूल माहौल बन गया है।
दवे ने कहा, ‘‘यह एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। राज्य में प्रतिकूल माहौल है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री लगातार इस मामले को लेकर बयान दे रहे हैं।’’ दवे ने कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में घी में पशु चर्बी की मौजूदगी से इनकार किए जाने के बावजूद नेता इस तरह के बयान दे रहे हैं।
उन्होंने दलील दी, ‘‘निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई के लिए इस मामले को पड़ोसी राज्य में स्थानांतरित कर दिया जाए। अधिकांश आरोपी उत्तर भारत के हैं। भाषा की बाधा भी है।’’ उन्होंने कहा कि भले ही सुनवाई करने वाला न्यायाधीश इन टिप्पणियों से प्रभावित न हो, लेकिन ऐसे माहौल में निष्पक्ष अभियोजन की उम्मीद नहीं की जा सकती।
इस पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने दवे से कहा, ‘‘हमने अपने आदेश से उन सभी को चुप करा दिया है। अगर कुछ होता है तो आप हमारे पास आ सकते हैं।’’ दवे ने कहा, ‘‘कृपया देखिए कि किस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। इससे मेरे मुकदमे पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
कोई भी इससे अछूता नहीं है। मुकदमे की सुनवाई बेहद राजनीतिक रूप से प्रतिकूल माहौल में होगी। इसका खमियाजा केवल मुझे भुगतना पड़ेगा।
नेताओं के बीच चल रही लड़ाई में मेरा इस्तेमाल किया जा रहा है। मैं यह भी नहीं कह रहा हूं कि मामले को यहां स्थानांतरित किया जाए। इसे किसी भी पड़ोसी राज्य में भेज दिया जाए।
आखिरकार, इस मामले में सीबीआई अभियोजन कर रही है। अधिकांश आरोपी उत्तर भारत के हैं और भाषा की बड़ी बाधा है।’’ हालांकि, पीठ ने मामले को स्थानांतरित करने की अनिच्छा जताते हुए कहा कि कई गवाह राज्य के ही हैं और इससे सुनवाई प्रभावित होगी। पीठ ने यह भी कहा कि जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने की थी।
पीठ ने आदेश दिया, ‘‘हम सुनवाई को स्थानांतरित करने के इच्छुक नहीं हैं। याचिका खारिज की जाती है।’’ चार अक्टूबर 2024 को शीर्ष अदालत ने तिरुपति के लड्डू बनाने में पशु चर्बी के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय स्वतंत्र एसआईटी गठित की थी। न्यायालय ने कहा था कि ऐसा ‘‘करोड़ों लोगों की भावनाओं को शांत करने’’ के लिए किया जा रहा है।
साथ ही उसने स्पष्ट किया था कि अदालत का इस्तेमाल ‘‘राजनीतिक अखाड़े’’ के रूप में नहीं किया जा सकता। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने इससे पहले आरोप लगाया था कि राज्य में वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के कार्यकाल में तिरुपति के लड्डू बनाने में पशु चर्बी का इस्तेमाल किया गया था। उनके इस दावे के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने नायडू पर राजनीतिक लाभ के लिए ‘‘घिनौने आरोप’’ लगाने का आरोप लगाया था, जबकि राज्य में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी ने अपने दावे के समर्थन में प्रयोगशाला की एक रिपोर्ट प्रसारित की थी। उच्चतम न्यायालय ने लड्डू बनाने में कथित तौर पर पशु चर्बी के इस्तेमाल की अदालत की निगरानी में जांच कराने के अनुरोध वाली याचिकाओं सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया था।
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