Trump के अच्छे या बुरे दिन आने वाले हैं? भारत से कितना अलग है अमेरिका का मिडटर्म चुनाव, नतीजों के बाद क्या-क्या बदलने वाला है

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अभिनय आकाश । Nov 3 2026 12:57PM

अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी सियासी परीक्षा हैं। यदि रिपब्लिकन पार्टी संसद में बहुमत खोती है, तब भी ट्रंप राष्ट्रपति बने रहेंगे लेकिन उनके विधायी एजेंडे और बजट पर रोक लग सकती है। इसके अलावा, वोटों की गिनती पर नियंत्रण के लिए संभावित राष्ट्रीय आपातकाल की चर्चाएं भी हैं।

जनवरी 2025 में सत्ता संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप के सामने आ चुका है उनका सबसे बड़ा सियासी इम्तिहान—अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शंस! सवाल सिर्फ संसद में बहुमत का नहीं, बल्कि यह तय होने का है कि अगले दो साल ट्रंप वाइट हाउस से हुक्म चलाएंगे या फिर वॉशिंगटन में उनके हर फैसले पर ब्रेक लग जाएगा। राष्ट्रपति चार साल के लिए चुना जाता है, लेकिन अमेरिकी संसद हर दो साल में जनता की अदालत में खड़ी होती है। ट्रंप के चार साल के कार्यकाल के ठीक आधे रास्ते पर होने वाले इस चुनाव का असली गणित क्या है, और यह नतीजे कैसे तय करेंगे दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति की दिशा? ऐसे में नवंबर 2026 में होने वाले ये जो उनके चुनाव हो रहे हैं कार्यकाल के बीच में हो रहे हैं और इसलिए उसे हम मिड टर्म चुनाव कहा जा रहा है।


इन चुनाव में क्या-क्या दांव पर है?


अमेरिकी संसद के दो सदन होते हैं। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव को प्रतिनिधि सभा और सीनेट को उच्च सदन कहा जाता है। मिड टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मतदान होते हैं। वहीं सीनेट की कुल 100 सीटों में से इस बार 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर के भी चुनाव किए जा रहे हैं। प्रतिनिधि सभा के सदस्यों का कार्यकाल 2 साल का ही होता है। इसलिए इनकी सभी सीटों पर हर 2 साल में चुनाव होता है। जबकि दूसरी तरफ जिन हम 100 सेनेटर्स की बात कर रहे थे वो सेनेटर्स का कार्यकाल छ साल का होता है। सीनेट की सभी सीटों पर एक साथ चुनाव भी नहीं होता बल्कि हर 2 साल में करीब 1/3 सीटों पर मतदान होता रहता है।

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क्या ट्रंप विदेश नीति सेना से जुड़े फैसले इस चुनाव के बाद ले पाएंगे 


सवाल का जवाब है हां। अमेरिकी राष्ट्रपति सेना के सर्वोच्च कमांडर होते हैं। कमांडर इन चीफ मिड टर्म चुनाव में हार के बाद भी ट्रंप के पास सेना का नेतृत्व करने, विदेश विदेशी देशों के साथ बातचीत करने, कई विदेश नीति संबंधी फैसले लेने का उनके पास अधिकार होगा। हालांकि पेच भी है। युद्ध की घोषणा, सैन्य खर्च, रक्षा बजट जैसे महत्वपूर्ण मामलों में कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए बड़े सैन्य अभियान और लंबे समय तक चलने वाली नीतियों में जो संसद है वो वहां से उनका विरोध हो सकता है जिससे वो उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

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2 साल में चुनाव क्यों हो जाता है? 


अमेरिका की जो चुनाव व्यवस्था है वह इस तरह बनाई गई है कि जनता को हर 2 साल में अपने प्रतिनिधियों के कामकाज पर राय देने का मौका मिल जाए। प्रतिनिधि सभा के सदस्य केवल 2 साल के लिए चुने जाते हैं ताकि वह लगातार अपने मतदाताओं के प्रति जवाबदेह बने रहे। सीनेट में स्थिरता बनाए रखने के लिए सदस्यों का कार्यकाल छ साल रखा गया और चुनाव अलग-अलग चरणों में होते हैं। इससे संसद में एक साथ बड़े बदलाव की संभावना जो है वो कम रहती है। 

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ट्रंप के लिए अब क्यों खास है? 


अगर रिपब्लिकन पार्टी बहुमत बरकरार रखती है तो ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान होगा। यानी कि जिस हौकने के अंदाज में ट्रंप अमेरिका में बातचीत करते हैं वो तेवर उनके जारी रह सकते हैं। लेकिन अगर यहां झटका लग गया तो ट्रंप के तेवर में नरमी आएगी। काम कराने के लिए कांग्रेस में डेमोक्रेट्स के आगे हाथपांव जोड़ने पड़ सकते हैं। लेकिन अगर डेमोक्रेटिक पार्टी जो है वो प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेती है तो ट्रंप के कई फैसले जैसे कि विधाई प्रस्ताव को रोकने उसमें बदलाव करने की उसकी ताकत बढ़ जाती है। संसद की समितियां सरकारी कामकाज की जांच कर सकती हैं और प्रशासन से जवाब मांग सकती हैं। हालांकि मिड टर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार का मतलब यह नहीं होगा कि ट्रंप को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़े। अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव अलग से होता है और राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। संसद में बहुमत गवाने से राष्ट्रपति अपने पद से नहीं हटते हैं।

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क्या चुनाव पर लागू हो सकता है राष्ट्रीय आपातकाल?

अमेरिका में 2026 के मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के बीच एक और बेहद संवेदनशील परिदृश्य की चर्चा हो रही है—देश में नेशनल इमरजेंसी (राष्ट्रीय आपातकाल) की घोषणा। डोनाल्ड ट्रंप के कुछ सहयोगियों ने कथित चुनावी धांधली या विदेशी दखल का हवाला देकर राष्ट्रीय आपातकाल लगाने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि इसके जरिए मतों की गिनती में संघीय सरकार की सीधी भागीदारी, जिसमें अनिवार्य रूप से हाथों से गिनती (Hand counts) कराना शामिल है, को सही ठहराया जा सकता है। खुद ट्रंप ने भी एक साक्षात्कार में इस विकल्प पर कहा था कि वे "किसी भी चीज़ से न तो इनकार कर रहे हैं और न ही उसे स्वीकार कर रहे हैं।" आशंका है कि चुनावों के दौरान या नतीजों के तुरंत बाद बड़े पैमाने पर कथित गड़बड़ी का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा कर दी जाए, ताकि संघीय प्रशासन सीधे तौर पर वोटों की गिनती और प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में ले सके। 


भारत और अमेरिका के चुनाव की व्यवस्था में क्या अंतर है? 


भारत और अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था में एक बड़ा अंतर है। भारत में लोकसभा चुनाव आमतौर पर 5 साल में होते हैं। प्रधानमंत्री और उनकी सरकार लोकसभा में बहुमत पर निर्भर करती है। अगर सरकार लोकसभा में बहुमत खो देती है तो उसे सत्ता छोड़नी पड़ती है। वहीं अमेरिका में जो राष्ट्रपति और संसद है उसके चुनाव अलग-अलग होते हैं। राष्ट्रपति का चुनाव 4 साल में होता है। जबकि कांग्रेस के चुनाव हर 2 साल में होते हैं। इसलिए अगर राष्ट्रपति की पार्टी संसद में बहुमत खो देती है, तब भी राष्ट्रपति अपना कार्यकाल पूरा कर सकता है। भारत की राज्यसभा की तरह अमेरिकी सीनेट भी एक स्थाई सदन है। इस इन जो सभी सदस्य का कार्यकाल जो है वो यहां एक साथ खत्म नहीं हो जाता। भारत में भी राज्यसभा के जो सदस्य हैं उनका कार्यकाल छ साल का होता है। अमेरिका में भी सेनेटरों का कार्यकाल भी जो है वो छ साल का होता है। दोनों जगह हर दो-दो साल में करीब 1/3 सदस्यों का कार्यकाल पूरा होता रहता है और रीइलेक्शंस वहां पे होते रहते हैं। 

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