Supreme Court ने SASTRA University भूमि विवाद में तमिलनाडु सरकार से मांगा वैकल्पिक जमीन पर विचार

Prabhasakshi Image
Prabhasakshi

उच्चतम न्यायालय ने तंजावुर स्थित शास्त्र मानद विश्वविद्यालय द्वारा कथित तौर पर कब्ज़ा की गई 31.37 एकड़ सरकारी भूमि के बदले उपयुक्त वैकल्पिक जमीन स्वीकार करने की संभावना तलाशने को कहा है। पीठ ने सवाल उठाया कि जब जमीन का उपयोग शैक्षणिक उद्देश्य के लिए हो रहा है, तो राज्य सरकार इसे खाली कराने और ध्वस्त करने पर जोर क्यों दे रही है।

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार से इस बारे में विचार करने को कहा कि क्या तंजावुर में शास्त्र विश्वविद्यालय द्वारा कथित तौर पर कब्ज़ा की गई 31.37 एकड़ सरकारी जमीन के बदले कोई उपयुक्त वैकल्पिक जमीन स्वीकार की जा सकती है। प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि इस भूमि का इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य से जुड़े शैक्षणिक संस्थान के लिए किया जा रहा है। पीठ ने यह भी सवाल किया कि राज्य सरकार संस्थान को खाली कराने और उसे ध्वस्त करने पर क्यों जोर दे रही है।

पीठ ने संकेत दिया कि राज्य सरकार अपनी प्रस्तावित खुली जेल के लिए कोई वैकल्पिक जगह चिह्नित कर सकती है और विश्वविद्यालय को उसी स्तर की जमीन खरीदने की लागत वहन करनी पड़ सकती है। शीर्ष अदालत की ये टिप्पणियां शास्त्र विश्वविद्यालय की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आईं, जिसमें उसने मद्रास उच्च न्यायालय के नौ जनवरी के आदेश को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सरकारी ज़मीन के आवंटन या अदला-बदली के लिए विश्वविद्यालय के अनुरोध को राज्य सरकार द्वारा खारिज किए जाने और उसे ज़मीन से बेदखल करने के आदेश को सही ठहराया था।

शास्त्र तंजावुर के तिरुमलाईसमुद्रम में स्थित एक प्रमुख निजी मानद विश्वविद्यालय है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़