आईफोन बांटने के ऐलान के बाद हरकत में आया प्रशासन, चंडीगढ़-मोहाली में iPhone 17 Langar पर लगाई रोक

अमृतसर के कारोबारी राकेश त्रेहान द्वारा चंडीगढ़ और मोहाली में 22 सितंबर को प्रस्तावित आईफोन लंगर पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी और भारी भीड़ से भगदड़ की आशंका थी। बिना अनुमति ऐसा आयोजन करने पर प्रशासन ने कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अमृतसर के कारोबारी राकेश त्रेहान, जो सोशल मीडिया पर ‘राजा डी किंग’ के नाम से जाने जाते हैं, ने चंडीगढ़ और मोहाली में 22 सितंबर को ‘आईफोन लंगर’ लगाने का ऐलान किया था। उन्होंने दावा किया था कि इस दौरान आईफोन 17 और उससे ऊपर के मॉडल लोगों को ‘प्रसाद’ के रूप में बांटे जाएंगे।
राकेश त्रेहान पहले भी इस तरह के ऐलान कर चुके हैं। वह खुद को क्रिप्टो कारोबारी बताते हैं और दावा करते हैं कि वह विरासत में मिली संपत्ति का इस्तेमाल ऐसे आयोजनों के लिए करते हैं।
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चंडीगढ़ में आईफोन लंगर पर रोक
चंडीगढ़ के उपायुक्त निशांत यादव ने शनिवार को पुलिस को निर्देश दिया कि प्रस्तावित ‘आईफोन लंगर’ को अनुमति न दी जाए। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन में भारी भीड़ जुट सकती है, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा है।
यादव ने बताया कि इससे पहले भी त्रेहान ने मुफ्त पेट्रोल लंगर का ऐलान किया था। उस दौरान भी हजारों लोगों के पहुंचने की आशंका थी, जिसे देखते हुए आयोजन को जोखिम भरा माना गया था। अब चंडीगढ़ में प्रस्तावित ‘आईफोन लंगर’ पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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आयोजक ने नहीं मांगी थी अनुमति
चंडीगढ़ की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कंवरदीप कौर ने बताया कि आयोजक की ओर से कार्यक्रम के लिए किसी तरह की अनुमति का आवेदन नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति ऐसी सभा आयोजित करना बीएनएसएस की धारा 163 के तहत जारी आदेश का उल्लंघन माना जाएगा।
वहीं, मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वरुण शर्मा ने कहा कि उनके पास किसी मंजूर ‘आईफोन लंगर’ की जानकारी नहीं है। उन्होंने साफ किया कि उपायुक्त कार्यालय की अनुमति के बिना जिले में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं होने दिया जाएगा। बिना अनुमति कार्यक्रम आयोजित करने की कोशिश करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उल्लंघन पर क्या हो सकती है सजा?
बीएनएसएस की धारा 163 के तहत जारी आदेश का उल्लंघन बीएनएस की धारा 223 के तहत दंडनीय है। सामान्य उल्लंघन के मामले में छह महीने तक का साधारण कारावास या 2,500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
अगर आदेश के उल्लंघन से जान-माल को खतरा पैदा होता है या दंगा होने की आशंका रहती है, तो एक साल तक की जेल और 5,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
सार्वजनिक सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। इसी वजह से बिना अनुमति बड़े स्तर पर भीड़ जुटाने वाले ऐसे आयोजनों पर सख्ती की जा रही है।
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