India की Chip Power से घबरा गईं वैश्विक ताकतें! Ashwini Vaishnaw ने जो खुलासा किया है वो आपको हैरान कर देगा

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस खतरे को समझाने के लिए Apple के भारत में iPhone निर्माण शुरू होने के शुरुआती दौर का उदाहरण दिया। टीवी समाचार चैनल NDTV से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि उस समय उत्पादन को बाधित करने के लिए कई तरह के प्रयास किए गए।

भारत की सेमीकंडक्टर छलांग ने अब उन ताकतों की बेचैनी भी उजागर कर दी है, जिन्हें भारत का तेजी से उभरना रास नहीं आ रहा। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव की चेतावनी साफ संकेत देती है कि भारत की तरक्की को रोकने वाली चालें तेजी से चली जा रही हैं लेकिन देश को अब दुश्मनों के तौर-तरीके समझ में आ चुके हैं। माना जा रहा है कि जिस तरह भारत को मोबाइल फोन के क्षेत्र में वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने से रोकने की कोशिशें हुईं, उसी तरह अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी साइबर हमलों, फर्जी खबरों और भौतिक व्यवधानों के जरिए भारत की रफ्तार थामने की कोशिश हो सकती है। लेकिन संदेश सीधा है। भारत अब पीछे हटने वाला नहीं है और उसकी रणनीतिक बढ़त को चुनौती देने वालों को इस बार भारत पहले से कहीं अधिक सतर्क और तैयार मिलेगा।

हम आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस खतरे को समझाने के लिए Apple के भारत में iPhone निर्माण शुरू होने के शुरुआती दौर का उदाहरण दिया। टीवी समाचार चैनल NDTV से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि उस समय उत्पादन को बाधित करने के लिए कई तरह के प्रयास किए गए। उनके अनुसार, कुछ स्थानों पर फूड पॉइजनिंग की घटनाएं हुईं, बिजली के तार काटे गए और फर्जी खबरें चलाई गईं। उन्होंने विशेष रूप से Reuters की उस रिपोर्ट का उल्लेख किया जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि विवाहित महिलाओं को उत्पादन इकाइयों में काम करने की अनुमति नहीं थी। वैष्णव ने इन घटनाओं को भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने से रोकने की कोशिश के रूप में पेश किया।

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यही Apple प्रकरण अब सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए चेतावनी का आधार बनाया जा रहा है। वैष्णव का कहना है कि भारत के चिप क्षेत्र में प्रवेश को दुनिया ने नोटिस किया है और जैसे-जैसे भारत की क्षमता बढ़ेगी, समर्थन के साथ विरोध भी सामने आएगा। उन्होंने उद्योग को पहले से तैयार रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि साइबर हमले, दुष्प्रचार और भौतिक हमले संभावित जोखिमों में शामिल हैं और भारत को इनसे निपटने के लिए लगातार सतर्क रहना होगा।

देखा जाये तो इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री की इस चेतावनी की पृष्ठभूमि में सेमीकंडक्टर उद्योग की रणनीतिक अहमियत समझना जरूरी है। कंप्यूटर, मोबाइल फोन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लेकर रक्षा प्रणालियों तक, लगभग पूरी आधुनिक अर्थव्यवस्था चिप्स पर निर्भर है। अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया लंबे समय से इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्र हैं, जबकि चीन तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार ने चिप्स की मांग और रणनीतिक महत्ता दोनों को और बढ़ा दिया है। ऐसे में अमेरिका और चीन सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं सेमीकंडक्टर क्षमता को रणनीतिक आत्मनिर्भरता से जोड़ रही हैं।

भारत ने इसी बदलते वैश्विक समीकरण में अपनी जगह बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में बड़ा अभियान शुरू किया है। SEMICON India का आयोजन 2022 से किया जा रहा है। 17 से 19 सितंबर 2026 को आयोजित संस्करण में भी 52 देशों की लगभग 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने हिस्सा लिया और 56 MoU, घोषणाएं तथा रणनीतिक पहलें सामने आईं।

मोदी सरकार अब केवल चिप असेंबली और टेस्टिंग तक सीमित रहने की बजाय डिजाइन, उपकरण, सामग्री, फैब्रिकेशन, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान और प्रतिभा विकास तक पूरी वैल्यू चेन खड़ी करने की कोशिश कर रही है। Semicon 2.0 के लिए जुलाई में ₹1,27,500 करोड़ के परिव्यय को मंजूरी दी गई। पहले चरण की योजना में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश के साथ मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि Micron, Kaynes और CG Semi समेत पांच परियोजनाएं वाणिज्यिक उत्पादन में पहुंच चुकी हैं।

यही नहीं, निवेश घोषणाओं का पैमाना भी इस बदलाव को रेखांकित करता है। Applied Materials ने 2035 तक भारत में 5 अरब डॉलर की योजना रखी है, Lam Research ने ₹10,000 करोड़ के प्रस्तावित निवेश की घोषणा की है, Tata Electronics ने धोलेरा में 363 एकड़ के vendor park की योजना सामने रखी है और Fujifilm ने ₹800 करोड़ के सेमीकंडक्टर materials plant की घोषणा की है। साथ ही मोदी सरकार ने Semicon 2.0 के तहत करीब ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिलने की भी जानकारी दी है।

यानी भारत के सामने अवसर बड़ा है, लेकिन जोखिम भी उतना ही वास्तविक है। Apple के अनुभव का हवाला देते हुए अश्विनी वैष्णव जिस खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं, उसका व्यापक अर्थ यह है कि भारतीय कंपनियों और रणनीतिक तकनीकी परियोजनाओं को केवल उत्पादन क्षमता नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा, आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा, सूचना-युद्ध और भौतिक सुरक्षा के मोर्चे पर भी तैयार रहना होगा।

बहरहाल, भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रवेश का दरवाजा खोल दिया है। अब असली चुनौती यह है कि इस दरवाजे से आने वाली वैश्विक पूंजी, तकनीक और विनिर्माण क्षमता को कितनी मजबूती से सुरक्षित रखते हुए भारत एक टिकाऊ घरेलू चिप इकोसिस्टम में बदल पाता है।

-नीरज कुमार दुबे

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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