World Alzheimer's Day: 21 September को क्यों मनाते हैं यह दिवस, क्या है इसका इतिहास और उद्देश्य

अल्जाइमर एक गंभीर दिमागी विकार है, जिसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। जर्मन मनोचिकित्सक द्वारा 1901 में खोजी गई इस बीमारी को लेकर 1994 से यह दिवस शुरू हुआ। इसका उद्देश्य लोगों को अल्जाइमर के लक्षणों, कारणों, जांच और प्रबंधन के प्रति जागरूक करना है।
अधिकतर लोग अल्जाइमर को याददाश्त से जुड़े रोग की तरह देखते हैं। लेकिन यह एक गंभीर मनोभ्रंश या दिमागी विकार है, जिसके निदान के लिए अगर सही प्रयास नहीं किए जाते हैं, तो व्यक्ति के पूरे मानसिक सेहत की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 21 सितंबर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है। इस दिन अल्जाइमर के कारणों,जांच व निदान तथा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों के बारे में लोगों को जागरुक किया जाता है। तो आइए जानते हैं इस दिन का इतिहास, उद्देश्य और थीम आदि के बारे में...
इतिहास
साल 1901 में एक जर्मन मनोचिकित्सक अल्जाइमर ने एक जर्मन महिला का इलाज करते हुए बीमारी की खोज की थी। जिसके बाद उन्हीं मनोचिकित्सक के नाम पर इस रोग का अल्जाइमर नाम दिया गया। इस रोग की गंभीरता को समझते हुए इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य 'विश्व अल्जाइमर दिवस' मनाए जाने की शुरूआत हुई।
21 सितंबर 1994 को संगठन की 10वीं वर्षगांठ के मौके पर संगठन द्वारा अल्जाइमर को लेकर जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 21 सितंबर को यह दिन मनाए जाने की घोषणा की गई थी। तब से हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। इस दौरान विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संगठनों द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
महत्व
आमतौर पर सामान्य परिस्थितियों में याददाश्त की कमजोरी को अधिकतर लोग अधिक गंभीरता से नहीं लेते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ ही यह समस्या भी बढ़ने लगती है। लोग इसको बुढ़ापे का लक्षण मानकर इग्नोर कर देते हैं। ऐसे में लक्षणों की जानकारी न होने पर लोग डॉक्टर की सलाह लेने में देर करते हैं। वहीं पिछले कुछ सालों में हर तरह के रोगों की तरह अल्जाइमर के मामलों में भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
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