Karnataka में गन्ने के लिए ₹5,500 प्रति टन की मांग, केंद्र से दखल की अपील

कर्नाटक में गन्ने के लिए 5,500 रुपये प्रति टन की मांग को लेकर किसानों के प्रदर्शन के बीच डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार से इसका निश्चित मूल्य तय करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दखल देने की अपील की। शिवकुमार ने किसानों से शालीनता बरतने और टकराव टालने का अनुरोध भी किया।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार से गन्ने का एक निश्चित मूल्य तय करने की मांग की है। राज्य के कई जिलों में किसान अपनी उपज के लिए 5,500 रुपये प्रति टन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये प्रदर्शन 6 नवंबर को किसान संगठनों द्वारा आयोजित राज्यव्यापी बंद के दौरान हुए। शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठाया है और उन्हें इस प्रस्ताव के बारे में पत्र भी लिखा है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी इस मामले को सुलझाने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र सरकार का मामला है - उन्हें ही गन्ने का दाम और कीमत तय करनी है। मैंने प्रधानमंत्री से अपने प्रस्ताव के बारे में बात की है और उन्हें पत्र भी लिखा है। जोशी जी ने भी कहा है कि वे कोशिश कर रहे हैं।
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इससे एक दिन पहले, शिवकुमार ने राज्य के बुनियादी ढांचे, सिंचाई और गन्ना किसानों से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की थी। यह घटनाक्रम कन्नड़ राज्योत्सव के मौके पर दोनों नेताओं के बीच हुए पत्रों के आदान-प्रदान के बाद सामने आया है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि किसानों के आंदोलन को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कर्नाटक सरकार समाधान निकालने के लिए फैक्ट्री मालिकों और मंत्रियों के साथ बातचीत कर रही है। उन्होंने कहा कि हमने गन्ना किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर एक अनुरोध किया है। हमें किसानों के मामले को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि हाल ही में फैक्ट्री मालिकों और राज्य के मंत्रियों के बीच बातचीत हुई है। उन्होंने आगे कहा कि आज फैक्ट्री मालिकों और हमारे मंत्रियों ने बैठकर चर्चा की। मैंने उनसे अनुरोध किया है। वे पेराई (क्रशिंग) के लिए सुरक्षा मांगने अदालत भी गए हैं। हम आज अदालत में इस मामले को लेकर भी पक्ष रख रहे हैं। शिवकुमार ने प्रदर्शन कर रहे किसानों से अपील की कि वे अपनी मांगें रखते समय शालीनता बनाए रखें और सरकार के प्रति टकराव वाला रवैया न अपनाएं। उन्होंने कहा, "लेकिन अगर आप सरकार से भिड़ जाएं और कहें कि 'हम नहीं देंगे, हम विधानसभा से नहीं हटेंगे' - तो ऐसा नहीं होना चाहिए। थोड़ी शालीनता होनी चाहिए। किसी मीटिंग में जाकर 'अरे, इधर आओ' कहना - हमारे किसानों की तरफ से ऐसा असम्मानजनक व्यवहार नहीं होना चाहिए। मैं बस यही कह रहा हूं।"
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13 नवंबर को बेंगलुरु मेट्रो के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री मोदी के कर्नाटक दौरे के बारे में शिवकुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने ही उन्हें आमंत्रित किया है। उन्होंने इस परियोजना का श्रेय लेने की कोशिश करने के लिए भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि अभी कई त्योहार हैं, इसलिए प्रधानमंत्री 13 तारीख को हमारी मेट्रो के लिए आ रहे हैं। हमने खुद ही उनसे आने का अनुरोध किया था। इसमें भाजपा का क्या लेना-देना है? वे बस पब्लिसिटी बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। हमने उन्हें बुलाया है। यह हमारा पैसा है, जनता का पैसा है। हमने कर्ज लेकर इसे बनाया है। 13 तारीख को हम उनके सामने कुछ मुद्दे रखेंगे।
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