Supreme Court ने Delhi NCR प्रदूषण पर जताई चिंता, वाहनों के धुएं को बताया बड़ा कारण

Supreme Court ने Delhi NCR प्रदूषण पर जताई चिंता, वाहनों के धुएं को बताया बड़ा कारण
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प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में गंभीर स्तर पर पहुंचे वायु प्रदूषण पर सुनवाई की। अदालत ने सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम और वाहनों के धुएं को मुख्य समस्या बताते हुए तत्काल और दीर्घकालिक कदम उठाने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद 16 नवंबर को होगी।

नयी दिल्ली, छह नवंबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए वाहनों से निकलने वाले धुएं को एक बड़ा कारण बताया और कहा कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में हो रही बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल, मध्यम अवधि के और दीर्घकालिक उपाय करने की जरूरत है। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए नियामक ढांचे की समीक्षा से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सड़कों पर वाहनों की भारी भीड़ और जगह-जगह लगने वाले जाम पर भी चिंता जताई। सीजेआई ने कहा, ‘‘हम लगातार बातें करते हैं, कभी बयान देते हैं और सुझाव भी देते हैं, लेकिन मुद्दा यह है कि एक्यूआई पहले ही 400 के स्तर को छू रहा है।’’ पीठ ने दिल्ली को आसपास के इलाकों से जोड़ने वाली सड़कों पर बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही की ओर ध्यान दिलाया।

इनमें गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद शामिल हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘दिल्ली की सड़कों और दिल्ली को एनसीआर से जोड़ने वाली सड़कों को देखिए। किसी भी सड़क पर चले जाइए और वहां चलने वाले वाहनों की संख्या पर गौर कीजिए।

यही सबसे बड़ी समस्या है।’’ पीठ ने कहा कि इस प्रदूषण का असली खमियाजा गरीब लोगों को भुगतना पड़ता है, क्योंकि वे सड़कों पर रहते हैं। इसके अलावा, त्योहारों का समय ही होता है, जब उन्हें रोजी-रोटी कमाने का मौका मिलता है। पराली जलाने के मुद्दे पर पीठ ने कहा कि किसानों को जागरूक करने की जरूरत है, ताकि वे खेतों में आग लगाने के बजाय मशीनों का इस्तेमाल करें।

एक्यूआई के निर्धारित स्तर से ऊपर पहुंचने पर सभी आयु वर्ग के छात्रों के लिए स्कूल बंद करने या ‘हाइब्रिड मोड’ में कक्षाएं संचालित करने के अनुरोध वाली याचिका पर पीठ ने कहा कि वह विशेषज्ञों की राय के अनुसार फैसला करेगी। केंद्र सरकार और अन्य संबंधित प्राधिकरणों की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने प्रदूषण के पांच प्रमुख स्रोतों से निपटने के लिए बनाए गए नियामक ढांचे की जानकारी दी। इनमें औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों से होने वाला प्रदूषण, निर्माण एवं तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल, सड़कों की धूल और पराली जलाना शामिल हैं।

उन्होंने पीठ को बताया कि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें कुछ श्रेणियों के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) की जियो-टैगिंग और मोबाइल ऐप व सोशल मीडिया के जरिए मिली शिकायतों के आधार पर स्पष्ट रूप से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है। भाटी ने पीठ को बताया कि बृहस्पतिवार को दिल्ली के कुल वायु प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत थी।

पीठ ने कहा कि वह इस मामले में कुछ आदेश पारित करेगी। साथ ही, दिवाली की छुट्टियों के बाद अदालत दोबारा खुलने पर 16 नवंबर को याचिका पर सुनवाई करेगी। राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को धुंध की घनी परत छाई रही।

हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आई और यह गंभीर श्रेणी के करीब पहुंच गई। शहर का औसत एक्यूआई 391 दर्ज किया गया। शहर के 59 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 30 ने सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता को गंभीर श्रेणी में दर्ज किया, जबकि बाकी केंद्रों पर यह बेहद खराब श्रेणी में रही।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रोहिणी में सबसे अधिक 475 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके बाद भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली में 472 एक्यूआई दर्ज किया गया।

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