Delhi Court ने दंगा और जानलेवा हमले के आरोपी रुस्तम को दी राहत, मिली जमानत

राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने दंगे और चाकूबाजी के मामले में विचाराधीन आरोपी मोहम्मद रुस्तम को जमानत प्रदान की है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल ने पाया कि 25 गवाहों में से किसी से भी अभी तक जिरह नहीं हुई है, जिसके चलते मुकदमे में लंबा वक्त लग सकता है। अदालत ने आरोपी को दस हजार रुपये के मुचलके और निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
नयी दिल्ली, पांच नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी में दंगे की एक घटना के दौरान कथित रूप से चाकू एवं बीयर की टूटी बोतल से पांच लोगों पर हमला करने वाली अवैध भीड़ का हिस्सा रहे एक आरोपी को जमानत दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल 22 अक्टूबर, 2025 से हिरासत में बंद मोहम्मद रुस्तम की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। न्यायाधीश अग्रवाल ने कहा कि मुकदमे में काफी समय लगने की संभावना है, क्योंकि अभियोजन पक्ष के 25 गवाहों में से अभी तक किसी से भी जिरह नहीं हुई है।
अदालत ने तीन नवंबर को अपने आदेश में कहा, “आवेदक/आरोपी 22 अक्टूबर, 2025 से हिरासत में है। हालांकि इस मामले में आरोप तय किए जा चुके हैं, लेकिन अभियोजन पक्ष के 25 गवाहों में से किसी से भी अभी तक जिरह नहीं हुई है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि मुकदमे के पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।” अदालत ने कहा कि मामले में आरोप तय किए जा चुके हैं, लेकिन गवाहों से जिरह शुरू होनी बाकी है।
रुस्तम पर भारतीय न्याय संहिता की दंगा, गैर-इरादतन हत्या की कोशिश, जानबूझकर चोट पहुंचाने और किसी अवैध भीड़ सदस्यों द्वारा किए गए अपराधों से संबंधित धाराएं लगायी गयी हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, रुस्तम एवं चार अन्य सह-आरोपियों ने एक हिंसक समूह बनाया और उन लोगों के पास चाकू और बीयर की टूटी हुई बोतलें जैसे घातक हथियार थे। आरोप है कि उन्होंने इन हथियारों से शिकायतकर्ता--शाहरुख और दिलशाद उर्फ जानू पर हमला किया।
इसके अलावा, अज़रा, शाहीन और नेहा पर भी हमला किया गया। उन्हें मामूली चोटें आईं। जमानत याचिका का विरोध करते हुए, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि रुस्तम के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं।
उधर, बचाव पक्ष ने दावा किया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और तीन अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा गया कि आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, इसलिए रुस्तम को और अधिक समय तक हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने उसे 10,000 रुपये का निजी जमानत और इतनी ही राशि का मुचलका देने की शर्त पर जमानत दे दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियों का इस मामले के गुण-दोष पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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