Bhupender Yadav का विपक्ष पर हमला, Bihar SIR पर 60 हजार BLA ने दीं महज 2 आपत्तियां

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केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने पटना में कहा कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान विपक्ष के 60 हजार से ज्यादा बीएलए ने केवल दो आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं। इस अभियान के तहत राज्य में 21.53 लाख नए मतदाता जोड़े गए हैं।

पटना, पांच नवंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष एसआईआर की आड़ में हंगामा कर सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहा है। यादव दरभंगा में भाजपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ मार्च’ में शामिल होने के बाद पटना पहुंचे।

उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में विपक्षी गठबंधन की राजनीतिक रणनीति और उसके थिंक टैंक पर सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की रणनीति तैयार करने वाले समूहों का आम जनता से सीधा जुड़ाव नहीं है। उन्होंने राजद के थिंक टैंक में आइसा के पूर्व नेतृत्व, कांग्रेस के युवा नेतृत्व में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रभाव और समाजवादी पार्टी के रणनीतिक समूह में जामिया के पूर्व नेतृत्व का उल्लेख किया।

यादव ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बिहार में एसआईआर का उल्लेख करते हुए कहा, “ राज्य में 12 राजनीतिक दलों के कुल एक लाख 60 हजार बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त थे। इनमें विपक्षी दलों के 60 हजार से अधिक बीएलए शामिल थे, लेकिन पुनरीक्षण के दौरान उनकी ओर से महज दो आपत्तियां दर्ज कराई गईं।

” उन्होंने सवाल किया कि जब विपक्ष मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगा रहा था, तो उसके प्रतिनिधियों ने आपत्तियां दर्ज कराने में सक्रियता क्यों नहीं दिखाई? केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एसआईआर कोई नई या असंवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए अपनाई जाने वाली संवैधानिक प्रक्रिया है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 और 326 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है और देश में इससे पहले भी 10 बार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।

यादव ने बताया कि बिहार में घर-घर सत्यापन के दौरान 21 लाख 53 हजार नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए। उन्होंने कहा, “वहीं, 25 लाख मृत मतदाता, 36 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाता और सात लाख दोहरे नाम वाले मतदाता चिह्नित किए गए। ’’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीएलओ को मतदाताओं के घर तीन बार जाकर सत्यापन करने का निर्देश दिया गया था और इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका भी सुनिश्चित की गई थी।

यादव ने ईवीएम और चुनावी नतीजों पर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार के बाद विपक्ष चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने लगता है, जबकि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार लोकतांत्रिक चेतना और जन आंदोलनों की ऐतिहासिक भूमि रहा है।

जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में लोकतंत्र की रक्षा के लिए हुए आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ के संकल्प को दोहराया। यादव ने विधान परिषद के दो निर्दलीय सदस्यों को भाजपा में शामिल कराने से संबंधित सवाल पर कहा कि इस मामले में विधान परिषद के सभापति निर्णय लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों विधान पार्षदों ने केवल भाजपा को समर्थन दिया है, पार्टी की सदस्यता ग्रहण नहीं की है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जन सुराज ने निर्दलीय सदस्यों बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। दोनों पर भाजपा में शामिल होने का आरोप लगाते हुए राजद और ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने विधान परिषद के सभापति को ज्ञापन सौंपा था।

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