Delhi Air Pollution: 288 दिनों में सबसे खराब स्तर पर पहुंचा AQI, 22 केंद्रों पर हवा गंभीर

Delhi Air Pollution: 288 दिनों में सबसे खराब स्तर पर पहुंचा AQI, 22 केंद्रों पर हवा गंभीर
प्रतिरूप फोटो
AI-Generated

राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक बुधवार को 377 दर्ज किया गया, जो 20 जनवरी के बाद का सबसे खराब स्तर है। दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 22 पर प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में रहा। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

नयी दिल्ली, चार नवंबर दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में बुधवार को तेज गिरावट दर्ज की गई और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 377 के साथ ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गया। यह ‘गंभीर’ श्रेणी के स्तर के करीब है। वहीं, 22 निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया।

आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता और बिगड़ने की आशंका के बीच दिवाली नजदीक आने के साथ राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण बढ़ने की स्थिति से निपटने की तैयारी की जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को एक्यूआई 377 रहा जो 20 जनवरी के बाद सबसे अधिक है, जब यह 378 दर्ज किया गया था। इस तरह बुधवार को एक्यूआई 288 दिनों में सबसे खराब स्तर पर रहा।

दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में सबसे अधिक 458 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके बाद जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में 448-448, जबकि मुंडका में 439 एक्यूआई दर्ज किया गया। कुल 59 निगरानी केंद्रों में से 22 पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’, 32 पर ‘बहुत खराब’ और पांच पर ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच के एक्यूआई को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है। वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता बृहस्पतिवार को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहने की आशंका है। छह से सात नवंबर तक इसके और बिगड़कर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचने का अनुमान है।

बुधवार को दिल्ली में पीएम10 प्रमुख प्रदूषक के रूप में उभरा। इससे पहले लगातार तीन दिनों तक पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक रहा था। पीएम10 आमतौर पर मोटे कणों वाले प्रदूषण से जुड़ा होता है, जिसमें सड़क की धूल और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल शामिल है।

दिल्ली के प्रमुख मौसम केंद्र सफदरजंग में अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मौसम के सामान्य तापमान से 0.7 डिग्री कम है। पालम में अधिकतम तापमान 27.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.6 डिग्री कम है, जबकि लोधी रोड में यह 29.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.4 डिग्री कम है। रिज और आया नगर मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान क्रमशः 28.6 डिग्री और 29.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से क्रमशः 1.3 डिग्री और 1.1 डिग्री कम है।

सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 16.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.8 डिग्री अधिक है। पालम में न्यूनतम तापमान 16.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.7 डिग्री अधिक है, जबकि लोधी रोड में यह 16.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक है। रिज में न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.7 डिग्री कम है, जबकि आया नगर में यह 16.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.4 डिग्री अधिक है।

निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) के अनुसार, बुधवार को दिल्ली के प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान 15.5 प्रतिशत रहा, जबकि पराली जलाने से 20.2 प्रतिशत प्रदूषण हुआ। दिल्ली के प्रदूषण में अन्य क्षेत्रों का योगदान इस प्रकार रहा- उद्योगों का 2.9 प्रतिशत, कचरा जलाने का 1.3 प्रतिशत, निर्माण गतिविधियों का 2.2 प्रतिशत, सड़क की धूल का 1.1 प्रतिशत, आवासीय स्रोतों का 3.8 प्रतिशत और अन्य क्षेत्रों का एक प्रतिशत। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के जिलों में गाजियाबाद का योगदान सात प्रतिशत, रोहतक का 3.8 प्रतिशत, गुरुग्राम का 2.7 प्रतिशत, सोनीपत का 2.2 प्रतिशत, जींद का 1.8 प्रतिशत और भिवानी का 1.3 प्रतिशत रहा।

प्रदूषण में अन्य स्रोतों का योगदान 28.5 प्रतिशत रहा। इस बीच, उपग्रहों ने चार नवंबर को अध्ययन के दायरे में शामिल छह राज्यों में पराली जलाने की 467 घटनाओं का पता लगाया। इनमें पंजाब में 151, हरियाणा में 10, उत्तर प्रदेश में 33, राजस्थान में 111, उत्तराखंड में पांच और मध्य प्रदेश में 157 घटनाएं शामिल हैं।

दिल्ली में पराली जलाने की कोई घटना दर्ज नहीं की गई। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) की अंतरिक्ष से कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी और मॉडलिंग के लिए अनुसंधान संघ (क्रीम्स) प्रयोगशाला के अनुसार, 15 सितंबर से चार नवंबर के बीच दिल्ली सहित सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पराली जलाने की कुल 4,800 घटनाओं का पता चला है। इनमें पंजाब में 2,347, हरियाणा में 62, उत्तर प्रदेश में 392, दिल्ली में दो, राजस्थान में 949, उत्तराखंड में 183 और मध्य प्रदेश में 865 घटनाएं शामिल हैं।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


All the updates here:

अन्य न्यूज़