Tvisha Sharma death case: MP High Court ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी ठुकराई

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को अपनी बहू की कथित आत्महत्या के मामले में राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सीबीआई जांच जारी है और डिजिटल व फोरेंसिक रिपोर्ट आना अभी बाकी है। पीठ ने अपराध की गंभीरता और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए यह फैसला दिया।
जबलपुर, चार नवंबर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने अपनी पुत्रवधू त्विषा शर्मा की कथित आत्महत्या के मामले में गिरफ्तार पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा है कि मामले की जांच जारी है और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद 26 अक्टूबर को जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। त्विषा के परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि उच्च न्यायालय ने बुधवार देर शाम सिंह की जमानत याचिका पर 23 पृष्ठ का अपना आदेश अपलोड किया।
आदेश में न्यायमूर्ति निरंकारी ने कहा कि मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों, आरोपों की प्रकृति और गंभीरता, जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों, मृतका की मौत से ठीक पहले की परिस्थितियों, सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को देखते हुए अदालत इस स्तर पर आरोपी को जमानत देने के पक्ष में नहीं है। अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच जारी है और महत्वपूर्ण फोरेंसिक एवं डिजिटल साक्ष्यों की जांच रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामले की जांच कर रहे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के वकील सुयश मोहन गुरु ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि उच्च न्यायालय ने सभी तथ्यों का विस्तार से विश्लेषण करने के बाद गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज की है। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने जमानत याचिका में दिए गए सभी तर्कों का जवाब दिया। गुरु ने बताया कि सीबीआई ने अदालत को अवगत कराया कि त्विषा शर्मा के मुख्य मोबाइल फोन और घर में लगे डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) की जांच अभी जारी है।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने मामले के पूरे घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया। उन्होंने कहा, ‘‘मामले के पूरे घटनाक्रम से पता चलता है कि शुरुआत से ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने इस संभावना से इनकार नहीं किया है।
हमने भी यही दलील दी थी।’’ गिरिबाला सिंह की पुत्रवधू और पूर्व मॉडल त्विषा शर्मा ने 12 मई को अपने ससुराल में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने उनकी सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। गिरिबाला सिंह को भोपाल की जिला अदालत से 14 मई को जमानत मिली थी, जिसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे को गिरफ्तार किया था।
जिला अदालत से जमानत याचिका खारिज होने पर गिरिबाला सिंह ने उच्च न्यायालय का रुख किया था। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। उनकी उम्र और बीमारियों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया था कि वह पिछले पांच महीने से न्यायिक हिरासत में हैं।
अदालत ने कहा कि आरोपों की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच जारी होने के मद्देनजर इस स्तर पर जमानत नहीं दी जा सकती।
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