Farrukhabad पुलिस अधिकारी पर FIR का Allahabad High Court ने दिया आदेश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आरोपी की गिरफ्तारी के कारणों वाले कॉलम में बाद में विवरण जोड़ने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने फर्रुखाबाद एसपी को संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। साथ ही बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध बताकर तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
प्रयागराज, छह नवंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आरोपी की गिरफ्तारी के कारणों वाले कॉलम में कुछ अतिरिक्त विवरण कथित तौर पर बाद में जोड़े जाने के मामले में फर्रुखाबाद के पुलिस अधीक्षक को एक जांच अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ का मानना है कि जांच अधिकारी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 14 के तहत अपराध किया है, जो झूठे साक्ष्य और सार्वजनिक न्याय के विरुद्ध अपराधों से संबंधित है। एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी को गैर कानूनी घोषित करते हुए उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया और माना कि गिरफ्तारी के कारणों और आधार की सूचना कानून के मुताबिक आरोपी को नहीं दी गई।
इस मामले में गिरफ्तारी मेमो के मुताबिक याचिकाकर्ता फर्रुखाबाद के मोहम्मद यासीन को 14 सितंबर, 2026 को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, अपनी याचिका में यासीन ने दावा किया कि उसे वास्तव में 13 सितंबर को उस समय हिरासत में लिया गया था जब वह शिकायतकर्ता की बेटी की मृत्यु की जांच के संबंध में अपने वकील के साथ थाने गया था। शिकायतकर्ता की बेटी ने याचिकाकर्ता द्वारा कथित उत्पीड़न के कारण कथित तौर पर खुदकुशी कर ली थी।
संबंधित अदालत ने यासीन की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने पाया गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी के कारणों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं दी गई थीं। हालांकि, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि गिरफ्तारी के कारण 14 सितंबर, 2026 को याचिकाकर्ता को अलग से बताए गए थे और कथित तौर पर उस पर उसके हस्ताक्षर भी थे।
अन्य न्यूज़














