बिश्केक में ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान से मिले पीएम मोदी, पश्चिम एशिया में शांति का किया समर्थन

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान भारत ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कूटनीति से सुलझाने और व्यापार के विस्तार पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा और नागरिक बुनियादी ढांचे के संरक्षण की आवश्यकता भी रेखांकित की।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से कहा कि भारत पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता और नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर पेजेश्कियान के साथ बैठक की।
फरवरी में ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली द्विपक्षीय वार्ता थी। बैठक में मोदी ने ईरानी नेता से यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में ईरान के साथ व्यापार के दायरे को बढ़ाना और उसमें विविधता लाना चाहता है। मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘बिश्केक में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात हुई।
ईरान के साथ भारत की पुरानी दोस्ती को विभिन्न क्षेत्रों में और मजबूत करने के हमारे संकल्प को दोहराया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम आने वाले समय में द्विपक्षीय व्यापार के दायरे को विस्तारित करना और उसमें विविधता लाना चाहते हैं। हमने क्षेत्र के मौजूदा हालात पर चर्चा की। भारत स्थायी शांति सुनिश्चित करने के मकसद से की जा रही सभी कोशिशों का समर्थन करता रहेगा।’’ पेजेश्कियान ने मोदी से आग्रह किया कि वह अलग-अलग पक्षों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करके उन्हें युद्ध और खून-खराबे के रास्ते से हटाकर बातचीत और समझौते के रास्ते पर लौटने में मदद करें।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के संघर्ष पर चर्चा की और उभरती स्थिति पर अपने विचार साझा किए। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और भारत के इस रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिये सुलझाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार कोशिशें जारी रखने की जरूरत पर भी ज़ोर दिया।
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘उन्होंने समुद्री आवाजाही और वाणिज्य की स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान करते हुए इस बात पर जोर दिया कि किसी भी हालत में आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे -जिसमें वाणिज्यिक पोत परिवहन और समुद्री कर्मी शामिल हैं- को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।’’ एक बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ जैसे बहुपक्षीय संगठनों में ईरान के साथ मिलकर काम करने के भारत के इरादे को दोहराते हुए कहा कि उन्हें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पेजेश्कियान का भारत में स्वागत करने का इंतजार है। मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात के बारे में ईरान की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि ईरान के राष्ट्रपति ने हालिया युद्ध के दौरान ईरान को भारत से मिले समर्थन और सहयोग के लिए ‘‘सराहना’’ की तथा क्षेत्र में शांति और सुरक्षा कायम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशों को तेज करने की जरूरत पर जोर दिया। पेजेश्कियान ने कहा, ‘‘हमारे प्रशासन की शुरुआत से ही, हमारी कोशिशें शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने और बातचीत एवं चर्चा के जरिये मुद्दों को सुलझाने पर केंद्रित रही हैं।’’ बयान के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से, कूटनीतिक तरीकों का इस्तेमाल करने के बजाय, अमेरिकियों ने युद्ध, असुरक्षा और जबरदस्ती अपनी मर्जी थोपने का रास्ता चुना है।’’ पेजेश्कियान ने कहा, ‘‘हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने लोगों को खतरे और असुरक्षा से बचाएं और उनके लिए शांति, सुकून और सुरक्षा पाने के लिए जरूरी हालात बनाएं।’’ विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस वार्ता में कहा कि भारत पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर चिंतित है, लेकिन उसे खास तौर पर उन घटनाओं की चिंता है जिनमें जहाजों पर हुए हमलों के कारण भारतीय नाविकों की जान गई।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने अपनी आवाज उठाई है और क्षेत्र के या बाहर के सभी संबंधित पक्षों के सामने अपनी चिंताएं ज़ाहिर की हैं।’’ चाबहार बंदरगाह के बारे में एक सवाल पर मिसरी ने कहा कि भारत लंबे समय से इस परियोजना से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के सहयोग पर भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर हम विभिन्न हितधारकों के साथ लगातार चर्चा कर रहे हैं और संपर्क में हैं, ताकि इस सहयोग को आगे जारी रखने का टिकाऊ रास्ता निकाला जा सके।
इस सहयोग की क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका है और इससे कई हितधारकों को लाभ होगा।’’ भारत और ईरान संपर्क और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहे थे। दोनों देश चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) का अभिन्न हिस्सा बनाने की भी पुरजोर कोशिश करते रहे हैं। हालांकि, चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इस परियोजना के साथ भारत का जुड़ाव जारी रहने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई।
ईरान के राष्ट्रपति ने क्षेत्र और दुनिया में भारत की अहम स्थिति और क्षमताओं के साथ-साथ दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी जिक्र किया। पेजेश्कियान ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र और दुनिया के ‘‘समझदार और जिम्मेदार’’ पक्षों की इच्छा और संकल्प शांति, सुरक्षा, स्थिरता बनाये रखने तथा युद्ध से बचने का है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि हमारे समक्ष मौजूद समस्याओं का समाधान बातचीत और सहयोग में है, और असुरक्षा एवं संघर्ष को फैलने से रोकने के लिए सभी उपलब्ध क्षमताओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।’’ मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान के साथ भी अलग से द्विपक्षीय बैठक की।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान के साथ एक शानदार बैठक हुई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, शिक्षा, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने वाला है। हमें पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में व्यापार और निवेश के संबंध और मजबूत होंगे।
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