पाकिस्तान के नारोवाल में गिराया गया सदी पुराना हिंदू मंदिर

पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में स्थित 100 से 125 साल पुराने हिंदू मंदिर की जमीन को मदरसे में मिलाने के लिए ढहाने का आरोप लगा है। स्थानीय अल्पसंख्यक संगठनों ने सरकार से आरोपियों पर कार्रवाई और मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग की है। वहीं सरकारी अधिकारियों का दावा है कि यह ढांचा भारी बारिश की वजह से गिरा है।
एम जुल्करनैन लाहौर, 31 अगस्त पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक सदी से अधिक पुराने एक हिंदू मंदिर को उसकी जमीन को कथित तौर पर एक मदरसे में शामिल करने के लिए ढहा दिया गया। अधिकारियों और अल्पसंख्यक संगठनों ने सोमवार को यह जानकारी दी। स्थानीय लोगों, अल्पसंख्यक संगठनों और एक राजनीतिक दल ने आरोप लगाया कि कुछ धार्मिक कट्टरपंथियों ने मंदिर को उसकी जमीन को पास के एक मदरसे में मिलाने के लिए ढहा दिया।
वहीं, सरकार ने दावा किया कि पुराना मंदिर भारी बारिश के कारण अपने आप ढह गया। करीब 1,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला यह 100 से 125 साल पुराना मंदिर लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित था। बताया जा रहा है कि 21 अगस्त को मंदिर गिराने वाले लोग प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) से जुड़े थे।
पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (पीएमएमपी) ने पंजाब सरकार से मंदिर गिराने में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और मंदिर का पुनर्निर्माण सुनिश्चित करने की मांग की है। पीएमएमपी के अध्यक्ष असलम परवेज सहोत्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्होंने 28 अगस्त को पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मुलाकात की और कथित आरोपियों तथा मंदिर की सुरक्षा में विफल रहे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक लिखित आवेदन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के शिखर की धातु, अन्य सामग्री और मलबे की ईंटों को भी बाद में वहां से हटा दिया गया।
हिंदू समुदाय के नेता रतन लाल ने प्राचीन मंदिर को गिराए जाने की निंदा करते हुए सरकार से इसके पुनर्निर्माण का आदेश देने की मांग की। उन्होंने कहा, जिला प्रशासन और विस्थापितों की संपत्ति का ट्रस्ट बोर्ड (ईटीपीबी) मंदिर स्थल की सुरक्षा करने या कथित कब्जाधारियों को हटाने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में विफल रहे, जिसके कारण अंतत: मंदिर को गिरा दिया गया। ईटीपीबी के वरिष्ठ अधिकारी राणा इफ्तिखार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि मंदिर करीब 100 से 125 साल पुराना था और भारी बारिश के कारण ढह गया।
उन्होंने कहा, हमारे रिकॉर्ड में मंदिर का कोई नाम दर्ज नहीं है। हालांकि, यह बहुत पुराना मंदिर है... यह 100 से 125 साल से अधिक पुराना था। सहोत्रा ने मंदिर को उसके मूल स्वरूप में दोबारा बनाने और पंजाब में हिंदू मंदिरों, सिख गुरुद्वारों तथा ईसाई चर्च एवं उनसे जुड़ी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
ईटीपीबी अधिकारी इफ्तिखार ने कहा कि मंदिर से लगी जमीन मदरसा स्थापित करने के लिए पट्टे पर दी गई थी, लेकिन मंदिर की जमीन किसी को पट्टे पर नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि मंदिर के पुनर्निर्माण पर ईटीपीबी के वरिष्ठ अधिकारी फैसला करेंगे। नारोवाल जिला शांति कमेटी और पाक धर्मस्थान हिंदू समिति के सदस्य रतन लाल ने कहा, हम उस स्थान पर जाने से भी डर रहे हैं क्योंकि वहां अब भी मदरसा संचालित है।
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