भारत के Renewable Energy क्षेत्र में 2030 तक 220 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद, प्रल्हाद जोशी ने दी जानकारी

भारत के Renewable Energy क्षेत्र में 2030 तक 220 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद, प्रल्हाद जोशी ने दी जानकारी
प्रतिरूप फोटो
AI-Generated

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में कहा कि देश 2030 तक 500 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता हासिल करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि अतिरिक्त 190 गीगावाट क्षमता जोड़ने के लिए 22,000 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश आएगा। भारत में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता अब 310 गीगावाट पार कर चुकी है।

नयी दिल्ली, पांच नवंबर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2030 तक 190 गीगावाट की अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए जरूरी 220 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आएगा। उन्होंने यहां भारत नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (बीआरईएस) 2026 के समापन पर संवाददाताओं से कहा कि 2030 तक 500 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए देश आगे बढ़ रहा है। फिलहाल गैर-जीवाश्म (स्वच्छ) ईंधन आधारित बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता 310 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है।

जोशी ने कहा, ‘‘भारत की वैश्विक पहचान कोई ऐसा बुलबुला नहीं है जो फूट जाएगा। हमें भरोसा है कि 2030 तक 190 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता हासिल करने के लिए जरूरी 22,000 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश आएगा।’’ उन्होंने कहा कि भारत में यह क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। पिछले दो वर्षों में घरेलू निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सहित सात लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है।

जोशी ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की पहली 100 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) क्षमता स्थापित करने में 10 साल लगे, जबकि अगली 100 गीगावाट क्षमता सात साल में स्थापित हुई। हालांकि, नवीनतम 100 गीगावाट क्षमता महज दो साल में जोड़ी गई। मंत्री ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की गति आगे भी बढ़ती रहेगी और भारत समय पर 500 गीगावाट का लक्ष्य हासिल कर लेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2030 के बाद 300 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का लक्ष्य दिया है, जिसके लिए हम रणनीति बनाएंगे और आगे बढ़ेंगे। जोशी ने कहा कि भारत ने आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं से सबक लिया है और ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत मंडपम में दुनिया भर के नीति-निर्माता, निवेशक, उद्योग प्रमुख और नवोन्मेषक एक साथ जुटे।

दो नवंबर से पांच नवंबर तक आयोजित इस सम्मेलन में 135 से अधिक देशों की भागीदारी रही और यह नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े वैश्विक मंचों में से एक बनकर उभरा। उन्होंने कहा कि पहली बार नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के तीन महत्वपूर्ण आयोजन एक साथ हुए। इनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की बड़ी भागीदारी भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की विकास यात्रा में वैश्विक भरोसे को बताती है।

इस सम्मेलन के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की नौवीं सभा और हरित हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया गया।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


All the updates here:

अन्य न्यूज़