Indian Economy की ऊंची उड़ान पर ब्रेक! Bernstein ने Jobs, Innovation पर उठाए गंभीर सवाल

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Prabhasakshi
Ankit Jaiswal । Apr 24 2026 10:48PM

बर्नस्टीन ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे खुले पत्र में चेताया है कि राज्यों की बढ़ती नकद सब्सिडी योजनाएं देश के विकास के लिए आवश्यक निवेश को प्रभावित कर रही हैं। रिपोर्ट में रोजगार, नवाचार और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई है, ताकि भारत वैश्विक आर्थिक बदलावों का सामना कर सके।

देश की विकास यात्रा को लेकर एक नई बहस सामने आई हैं। जहां एक तरफ भारत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी जगह मजबूत कर रहा है, वहीं कुछ चुनौतियां भी लगातार ध्यान खींच रही हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, वैश्विक ब्रोकरेज संस्था बर्नस्टीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अगर रोजगार, निवेश और सब्सिडी से जुड़े ढांचागत मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भारत अपनी पूरी आर्थिक क्षमता हासिल करने से चूक सकता हैं।

गौरतलब है कि यह पत्र ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में ऊपर पहुंचा है, लेकिन रोजगार, नवाचार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, इस रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव को लेकर जताई गई है। पिछले दो दशकों में भारत की अर्थव्यवस्था सेवा क्षेत्र पर आधारित रही है, जहां बड़ी संख्या में लोग सूचना प्रौद्योगिकी, कॉल सेंटर और अन्य सेवाओं में काम करते रहे हैं। इस वर्ग ने देश के मध्यम वर्ग को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई हैं।

हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग से इन नौकरियों पर खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि इनमें से कई काम स्वचालन के दायरे में आ सकते हैं। बता दें कि इस क्षेत्र में असली मूल्य सृजन अभी भी अमेरिका और चीन जैसे देशों के पास केंद्रित है, जिससे भारत को भविष्य में सीमित लाभ मिलने की आशंका जताई गई है।

इसके अलावा रिपोर्ट में राज्यों द्वारा बढ़ती नकद सहायता योजनाओं पर भी चिंता जताई गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार, इन योजनाओं पर हर साल भारी खर्च हो रहा है, जिससे विकास के लिए जरूरी निवेश पर असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना, महाराष्ट्र और बिहार की अन्य योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि ये योजनाएं लोगों को राहत जरूर देती हैं, लेकिन लंबे समय में यह आर्थिक संसाधनों पर दबाव डाल सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यही धन अगर बुनियादी ढांचे, शिक्षा या अनुसंधान में लगाया जाए तो बेहतर नतीजे मिल सकते है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, रिपोर्ट ने नवाचार के क्षेत्र में भी भारत की कमजोर स्थिति की ओर इशारा किया है। देश का अनुसंधान और विकास पर खर्च अभी भी वैश्विक मानकों से काफी कम है, जिससे नई तकनीकों में आगे बढ़ने की गति धीमी पड़ सकती है।

गौरतलब है कि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नीतियों में संतुलन बनाना होगा। सिर्फ मौजूदा सफलता पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक सुधारों पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि देश वैश्विक बदलावों के साथ कदम मिला सके हैं।

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