किस देवता के नाम पर बना है हॉर्मुज? हवा के 'जिन्न' से बचने के लिए महिलाएं मूंछों जैसा पहनती नकाब

होर्मुज में रहने वाले लोगों की जिंदगी और उनके जीने का अनूठा अंदाज कौतूहल पैदा करता है। खनिजों से भरपूर यहां की रेत लाल, गुलाबी, नारंगी जैसे चमकते हैं। जमीन जितनी विविधरंगी और मनमोहक है, उतने ही आकर्षक लोग, संस्कृति और पारंपरिक विश्वास-आस्था है। ईरानी फोटोग्राफर होदा अफशार ने यहां की संस्कृति और आस्था-मान्यताओं को बखूबी बताया है।
स्टेट ऑफ होर्मुज वो समुद्री इलाका जिसकी वजह से दुनिया आज तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। सबसे पहले बात करते हैं स्टेट ऑफ हॉर्मोस की चौहद्दी की। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यह स्टेट ईरान और ओमान के बीच मौजूद है। आज के समय में इसकी अहमियत इतनी ज्यादा है कि इसे दुनिया की ऑयल लाइफ लाइन कहा जाता है। अब बात करते हैं प्राचीन काल की। प्राचीन काल में होर्मुज फारस की खाड़ी तक पहुंच को कंट्रोल करने वाला एक अहम समुद्री व्यापार केंद्र था। यह भारत, चीन और मिडिल ईस्ट के बीच माल के आदानप्रदान के बीच एक संपर्क सूत्र का काम करता था। मूल रूप से यह 10वीं शताब्दी में मीनाब के पास मौजूद एक मुख्य भूमि बंदरगाह था। लेकिन आक्रमणकारियों से बचने के लिए लगभग 1300 में इसे रणनीतिक जारून द्वीप यानी होर्मुज द्वीप में बदल दिया गया और यह एक मशहूर व्यापारिक केंद्र बन गया।
इसे भी पढ़ें: Trump ने काट दी मोजतबा खामनेई की एक टांग? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
होर्मुज नाम की उत्पत्ति कैसे हुई
माना जाता है कि होर्मुज नाम की उत्पत्ति फारसी देवता अहूरा माजदा और स्थानीय बोली के व्याख्यांश खुरमोग यानी खजूर वाली जमीन से लिया गया है जो इसकी फारसी जड़ों को दर्शाता है। अहूरा मजदा पारसी धर्म के सर्वोच्च देवता, सृष्टिकर्ता और ज्ञान के प्रतीक हैं। जिन्हें बुद्धिमान देवता कहा जाता है। ऐतिहासिक रूप से अहूरा मजदा को वैदिक देवता वरुण से जोड़ा जाता है। जो ब्रह्मांडीय नियम का पालन करता है। अवस्था भाषा में अहूरा का अर्थ होता है स्वामी। जो संस्कृत के शब्द असुर के समान है। अब आते हैं मध्यकाल में। फारस की खाड़ी किंगडम ऑफ होर्मुज नाम का एक शक्तिशाली व्यापारिक राज्य हुआ करता था। यह राज्य 13वीं से 17वीं सदी के बीच बेहद समृद्ध था और एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापार का एक बड़ा केंद्र बन चुका था। यहीं से शुरू होता है भारत और होर्मुज का कनेक्शन। उस समय भारत के पश्चिमी तट खासकर गुजरात, कोंकण और मालाबार क्षेत्र दुनिया के बड़े व्यापारिक केंद्र थे। भारतीय व्यापारी मसाले, रेशम, कपड़े और कीमती पत्थर लेकर हॉर्मू जाते थे। बदले में वहां से घोड़े, मोती और दूसरे कीमती सामान भारत लाया करते थे।
इसे भी पढ़ें: भारत समेत 6 देशों के तेल रिफाइनरी में कौन लगा रहा है आग...साजिश किसकी?
शैतानी हवाएं और महिलाओँ का नकाब
होर्मुज में रहने वाले लोगों की जिंदगी और उनके जीने का अनूठा अंदाज कौतूहल पैदा करता है। खनिजों से भरपूर यहां की रेत लाल, गुलाबी, नारंगी जैसे चमकते हैं। जमीन जितनी विविधरंगी और मनमोहक है, उतने ही आकर्षक लोग, संस्कृति और पारंपरिक विश्वास-आस्था है। ईरानी फोटोग्राफर होदा अफशार ने यहां की संस्कृति और आस्था-मान्यताओं को बखूबी बताया है। कुछ को अंधविश्वास मान सकते हैं, लेकिन यही उनका जीवन है। यह हवा की बुरी आत्माओं से बचने का जतन है। दरअसल, मान्यता है कि कुछ हवाएं शैतानी या जिन्न वाली होती हैं, जबकि कुछ भली। 'जार' नाम की हवा के बारे में कहा जाता है कि वह शरीर में घुस सकती है। बेचैनी या बीमारी दे सकती है। ये नकाब 'जार' को धोखा देने के लिए पहना जाता है। मकसद यह कि महिला, पुरुष जैसी दिखे। मान्यता के मुताबिक महिलाएं 'जार' के प्रति ज्यादा असुरक्षित होती हैं।
कुछ लोग पेड़ों पर ही रहते हैं
केश्म और होर्मुज के कुछ लोग पेड़ों पर ही रहते हैं, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि कुछ तरह के पेड़ों के नीचे सोने से शैतानी आत्मा पकड़ लेगी। यानी हवा की शक्ति व्यक्ति पर हावी हो सकती है। अफशार ने अपनी किताब 'स्पीक द विंड' में केश्म और होमुंज की अनूठी मान्यताओं और आस्थाओं के बारे में बताया है। अफशार बताती हैं कि कई निवासी अफ्रीकी मूल के हैं। पर यह पहचान अक्सर छिपाई जाती है या नकारी जाती है। वजह-लंबे समय की सामाजिक श्रेणियां हैं। जर्मनी के बर्लिन में रह रहीं अफशार बताती हैं कि अब टुकड़ों में वहां की खबरें मिलती हैं। भारी सैन्य मौजूदगी। बमबारी। वह बताती हैं कि एक रिश्तेदार ने बमों के असर को ऐसे बयान किया, 'यह भूकंप की तरह शरीर के आर-पार गुजरने जैसा लगता है। बमों-बारूदों से बचने की दुआएं करते हैं।
इसे भी पढ़ें: भारत आने वाले जहाज पर कब्जा, ईरान पर एक्शन तेज!
पुर्तगाल ने होर्मुज पर किया कब्जा
भारत और होर्मुज के बीच गहरा व्यापारिक रिश्ता था। लेकिन यह रिश्ता केवल व्यापार तक ही सीमित था। शासन या राजनीतिक नियंत्रण तक नहीं। फिर आया 16वीं सदी का कालखंड जब पुर्तगाल ने होर्मुज पर कब्जा कर लिया। तब भारत में उसका मुख्य केंद्र गोवा हुआ करता था। क्योंकि गोवा भी पुर्तगाल के नियंत्रण में था और हॉर्मूस भी। उस समय हॉर्मूस पर गोवा में मौजूद पोर्तुगीज़ इंडिया रूल कर रहा था। इतिहास के इसी चैप्टर की वजह से हॉर्मूस को भारत का हिस्सा होने का दावा किया गया। लेकिन हकीकत तो यह है कि दोनों ही क्षेत्र एक विदेशी शक्ति पुर्तगाल के अधीन थे। डायरेक्ट भारत के नहीं। बाद में ईरानी सल्तनत सफविद अंपायर ने पुर्तगालियों को हराकर होर्मुज पर कंट्रोल कर लिया। शाह अब्बास प्रथम की अगुवाई में और अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी की सहायता से सफाविद साम्राज्य ने पुर्तगालियों से हॉर्मोस पर अपनी फतेह हासिल कर ली। अप्रैल 1622 को फारस की खाड़ी में एक सदी से ज्यादा समय तक चले पुर्तगाली नियंत्रण को समाप्त कर दिया गया और अंतिम समर्पण भी पूरी कर दी गई। इसके बाद यह क्षेत्र फारस यानी आज के ईरान के प्रभाव में आ गया। तो साथियों साफ है कि इतिहास में होर्मुज पर कई ताकतों का प्रभाव रहा लेकिन भारत का सीधा शासन कभी नहीं रहा। हां यह जरूर है कि इस धरती से होर्मुज पर रूल जरूर किया गया।
पिछले 100 सालों से ज्यादा समय से यह एक स्वतंत्र व्यापारिक जलमार्ग के तौर पर मौजूद है। इस समय जब अमेरिका और इजराइल की ईरान के साथ सीधी जंग चल रही है तो ऐसे में स्टेट ऑफ हॉर्मोस की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ जाती है। ईरान इस पर अपना एकाधिकार करना चाहता है। वहीं अमेरिका की ओर से भी नाकेबंदी की बात कही जा रही है। यह सिर्फ एक जलमार्ग नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र बन चुका है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रास्ते पर काफी ज्यादा निर्भर है। इसलिए इसकी अस्थिरता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। साथियों यह था स्टेट ऑफ हार्मोस का इतिहास। बाकी इसका भविष्य इसका मुस्तकबिल ही तय करेगा।
अन्य न्यूज़















