कोल्ड ड्रिंक से केला तक No Entry, भारत से सामान लाने से अब नेपाल की बालेन शाह सरकार को क्या परेशानी?

नेपाल और भारत के बीच रोटी और बेटी का संबंध है। दोनों मुल्क के नेताओं को अगर भारत-नेपाल संबंध पर दो शब्द बोलना पड़े तो, भाषण ही इसी मुहावरे से शुरु होता है। लेकिन रोटी-बेटी के इस मुहावरे पर धीरे-धीरे ग्रहण लगता जा रहा है और भारत-नेपाल दोस्ती में दरार पड़ती नजर आ रही है।
एक मां अपने बच्चों के लिए चिप्स का एक पैकेट लेकर बॉर्डर क्रॉस कर रही है। भारत से नेपाल जा रही है और बॉर्डर पर खड़े आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान उसे रोक लेते हैं। कहते हैं यह पैकेट ₹100 से ऊपर का है। कस्टम ड्यूटी लगेगी। वो महिला पूछती है बच्चों के लिए चिप्स का पैकेट भी अब स्मगलिंग है। यह सीन किसी फिल्म का नहीं है। यह एक रियल वीडियो है जो नेपाल के नेपालगंज बॉर्डर से आया है और पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इस एक वीडियो ने एक ऐसे रूल पर स्पॉट लाइट डाल दी है जिसने नेपाल के बॉर्डर एरियाज में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। तो आज इस पूरे मामले का एमआरआई स्कैन करते हैं। नेपाल और भारत के बीच रोटी और बेटी का संबंध है। दोनों मुल्क के नेताओं को अगर भारत-नेपाल संबंध पर दो शब्द बोलना पड़े तो, भाषण ही इसी मुहावरे से शुरु होता है। लेकिन रोटी-बेटी के इस मुहावरे पर धीरे-धीरे ग्रहण लगता जा रहा है और भारत-नेपाल दोस्ती में दरार पड़ती नजर आ रही है।
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भारत से 100 रुपए से ज्यादा के सामान पर कस्टम ड्यूटी
नेपाल गवर्नमेंट ने एक डायरेक्टिव जारी किया है जिसके तहत अगर कोई नेपाली नागरिक भारत से 100 नेपाली रुपए से ज्यादा का सामान लेकर नेपाल में एंटर करता है तो उसे कस्टम ड्यूटी देनी होगी। अब 100 नेपाली रुपए का मतलब समझिए। इंडियन करेंसी में यह करीब 62 से ₹63 बनते हैं। मतलब आप इंडिया से ₹63 का सामान भी लेकर गए तो आपको बॉर्डर पर रुक कर ड्यूटी भरनी पड़ेगी। अब यह रूल नया नहीं है। नेपाल के कस्टम एक्ट में यह प्रोविजन पहले से था। लेकिन सालों से इसे कोई सीरियसली इंप्लीमेंट नहीं करता था। बॉर्डर एरियाज में लोग इंडिया से छोटा-मोटा सामान लाते थे। दवाइयां, कपड़े, राशन, सब्जी और कोई उन्हें नहीं रोकता था। लेकिन अब नेपाल की नई गवर्नमेंट ने इसे स्ट्रिक्टली इनफोर्स करने का फैसला किया है और इनफोर्समेंट भी ऐसा कि बॉर्डर पर माहौल ही बदल गया है। नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स यानी कि एपीएफ के जवान अब बॉर्डर पॉइंट्स पर लाउडस्कर लगाकर अनाउंसमेंट कर रहे हैं। यह ₹100 से ऊपर का कोई भी सामान डिक्लेअ करना होगा। झापा से लेकर कंचनपुर तक, पूर्व से पश्चिम तक हर कस्टम पॉइंट पर क्रैकडाउन चल रहा है। लोगों के बैग खोले जा रहे हैं। साइकिल पर आने वाले लोगों का सामान चेक हो रहा है। लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। कस्टम डिपार्टमेंट, रेवेन्यू इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट, डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन, नेपाल पुलिस और एपीएफ की जॉइंट मॉनिटरी टीमें बनाई गई हैं।
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झोले और थैलियां चेक कर रहे कस्टम अधिकारी
नेपाल के कस्टम अधिकारी और बॉर्डर पर तैनात पुलिसकर्मी इस पार से उस पार जाने वाले लोगों के झोले और थैलियां चेक कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों के साथ अब यह चर्चा हो रही है और कहा जा रहा है कि केला से कोल्ड ड्रिंक तक अपना भारत से नेपाल ले जाने की इजाजत नहीं है। तस्वीरों में ऐसा ही कुछ दिखाई दे रहा है। भारत नेपाल बॉर्डर पर तैनात नेपाली पुलिस के जवान सख्ती से चेकिंग में जुटे हैं और उन्हें जो चीज भी रोकनी होती है उसे निकाल दे रहे हैं। दरअसल ये सब कुछ हो रहा है नेपाल सरकार की नई बालन शाह सरकार के आदेश पर जिसके तहत नई नीति सीमा शुल्क के मुताबिक अब 100 नेपाली रुपए से अधिक मूल्य के सामान पर 5% से लेकर 80% तक शुल्क सख्ती से वसूला जाएगा।
थोड़ा बैकग्राउंड समझना जरूरी है
भारत और नेपाल के बीच करीब 10715 किमी लंबी ओपन बॉर्डर है। 1950 की शांति और मैत्री संधि के तहत दोनों देशों के नागरिक बिना पासपोर्ट और वीजा के एक दूसरे के देश में आ जा सकते हैं। इस रिश्ते को रोटी बेटी का रिश्ता कहा जाता है। मतलब खाने और शादियों के जरिए दोनों देशों के लोग इतने गहराई से जुड़े हुए हैं कि बॉर्डर सिर्फ नक्शे पर है। जमीन पर नहीं है। नेपाल पांच भारतीय राज्यों से बॉर्डर शेयर करता है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम। अब इस ओपन बॉर्डर की वजह से नेपाल के बॉर्डर एरियाज के लोग दशकों से इंडिया के बाजारों पर डिपेंडेंट रहे हैं। खासकर मधेश प्रदेश के आठ जिलों में जो सीधे इंडिया की सीमा से लगते हैं। वहां के लोग इंडिया से दवाइयां, कपड़े, साड़ी, धोती, बिस्किट, सीमेंट, मसाले, सब्जी, दूध सब कुछ खरीद रहे हैं।
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भारत-नेपाल सीमा व्यापार पर असर!
इसका सीधा असर सीमावर्ती भारतीय बाजारों और नेपाली उपभोक्ताओं पर पड़ा है। जिससे दोनों ओर छोटे व्यापारियों और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के नेपाल सीमा से सटे जिलों में अब इस नई नीति का असर साफ दिखाई दे रहा है। नेपाल द्वारा सख्ती बढ़ाए जाने के बाद भारत से नेपाल जाने वाले रोजमर्रा के सम्मान जैसे दाल, चीनी, रिफाइंड, तेल, कपड़े आदि की कीमत से 15 से 20% तक की बढ़ोतरी हो गई है। जबकि बिक्री 15 से 25% तक घट गई है। यूपी का सिद्धार्थ नगर, महाराजगंज, कुशीनगर, सनौली जैसे इलाकों में दुकानों की बिक्री 15 से 25% तक घट गई है। वहीं बिहार के बघार, रक्कसोल और जयनगर जैसे बाजारों में यह गिरावट 50% तक पहुंच गई है। इन बाजारों का बड़ा हिस्सा नेपाली ग्राहकों पर निर्भर है। ऐसे में छोटे दुकानदारों के लिए स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बन गई है। नेपाल के कई इलाके खासकर वीरगंज और आसपास के क्षेत्रों में इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। स्थानीय लोगों और संगठनों का कहना है कि नेपाल भारत के बीच सदियों पुराना रोटी बेटी का रिश्ता रहा है। जिसमें सीमाओं के बावजूद लोगों का आना-जाना और व्यापार सहज रहा है। लोगों का आरोप है कि अब कोल्ड ड्रिंक, चिप्स और बिस्किट जैसे छोटे सामानों को ले जाने पर भी नेपाली सशस्त्र पुलिस द्वारा वसूली या जब्ती की जा रही है। जिससे आम नागरिकों को परेशानी हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नेपाल सरकार ने इस नीति में कोई नरमी नहीं दिखाई तो इसका असर लंबे समय तक बना रहता है। इससे ना केवल सीमावृत्ति व्यापार प्रभावित होगा बल्कि दोनों देशों के पारंपरिक, सामाजिक और आर्थिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। नेपाल इंडिया ओपन बॉर्डर इंटरेक्शन ग्रुप ने भी गवर्नमेंट से मांग की है कि घरेलू इस्तेमाल के सामान पर जीरो कस्टम ड्यूटी हो।
इस रूल में कोई लॉजिक है?
स्मगलिंग रोकना जरूरी है। रेवेन्यू बचाना भी जरूरी है। लेकिन ₹100 की लिमिट जो इंडियन करेंसी में मात्र ₹63 भी नहीं बनते। नेपाल के प्रो कॉमर्स सेक्रेटरी पुरुषोत्तम ओझा कहते हैं कि लीगली तो गवर्नमेंट के पास ये अधिकार है। लेकिन सवाल यह है कि इतनी कम लिमिट कारगर होगी या नहीं? अगर लोगों को बॉर्डर पार जाकर काफी पैसा बचता है तो वह रास्ता निकालते रहेंगे। सिर्फ इनफोर्समेंट से समस्या हल नहीं होगी। उनका सुझाव है कि गवर्नमेंट को अपने डोमेस्टिक मार्केट्स को कंपेटिव बनाना चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारना चाहिए और जरूरी सामान पर टारगेटेड सब्सिडी देनी चाहिए। अब वापस उस मां के पास चलते हैं जिसके हाथ से चिप्स का पैकेट छीना गया। वो अब भी पूछ रही है कि बच्चों के लिए चिप्स लाना भी अब गुनाह है और यह सवाल सिर्फ उस एक मां का नहीं है। यह सवाल नेपाल के बॉर्डर एरियाज में रहने वाले लाखों लोगों का है। दशकों से, पीढ़ियों से और अब एक रूल ने यह सब कुछ बदल दिया। देखना है कि बालन शाह की गवर्नमेंट बढ़ते दबाव में इस पॉलिसी पर दोबारा विचार करती है या नहीं।
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