Dabur India का Net Profit सितंबर तिमाही में 12 फीसदी बढ़कर 498.57 करोड़ हुआ

डाबर इंडिया का शुद्ध मुनाफा चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में 12 प्रतिशत बढ़कर 498.57 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान कंपनी की कुल आय 11.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 3,563 करोड़ रुपये दर्ज की गई। वहीं कंपनी के वैश्विक मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहित मल्होत्रा 13 नवंबर को पद छोड़ेंगे और डाबर ने 3.50 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम लाभांश भी घोषित किया है।
देश की जानी-मानी उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनी डाबर इंडिया के लिए सितंबर तिमाही अच्छी खबर लेकर आई है। कंपनी के मुनाफे में सालाना आधार पर 12% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, बिक्री की मात्रा में भी मामूली सुधार हुआ है। हालांकि, इस तिमाही के नतीजों के साथ कंपनी के वैश्विक मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहित मल्होत्रा ने अपने पद से हटने का ऐलान भी किया है। वह 16 नवंबर से विदेश में एक नई नेतृत्वकारी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।
डाबर इंडिया ने सितंबर तिमाही में 3,563 करोड़ रुपये की कुल आय दर्ज की, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 11.6% अधिक है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा बढ़कर 498.57 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले के मुकाबले इसमें 12% की वृद्धि हुई है। कंपनी की बिक्री की मात्रा में भी सुधार देखने को मिला। यह बढ़कर 5.5% हो गई, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 5% थी।
कंपनी का परिचालन मुनाफा 7.5% बढ़कर 632.5 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, परिचालन लाभ का अंतर घटकर 17.8% रह गया, जो पिछले साल के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक कम है। इस दौरान डाबर ने विज्ञापन और प्रचार पर होने वाले खर्च में भी कटौती की। कंपनी ने इस मद में 3% कम खर्च किया और कुल राशि 226.6 करोड़ रुपये रही।
डाबर के मुताबिक, उसके प्रीमियम उत्पादों की बिक्री सामान्य उत्पादों के मुकाबले 4 गुना तेजी से बढ़ी है। घरेलू कारोबार में अब इनकी हिस्सेदारी करीब 20% हो गई है। कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। रुपये के हिसाब से इसमें 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बांग्लादेश, मिस्र, उप-सहारा अफ्रीका और तुर्किये जैसे बाजारों में मजबूत बिक्री ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई।
हालांकि, डाबर के शहद की बिक्री में मध्यम स्तर की मामूली गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने इसकी एक वजह पिछले साल का ऊंचा आधार बताया है। इसके अलावा, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के लेबल से जुड़े आदेश के बाद बाजार में कुछ समय के लिए व्यापारिक माहौल प्रभावित हुआ। बता दें कि 3 अगस्त को प्राधिकरण ने डाबर के शहद समेत कुछ उत्पादों पर '100%' लिखे जाने को लेकर रोक लगाने का आदेश दिया था। कंपनी को संबंधित उत्पादों की बिक्री रोकने और 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा गया था। हालांकि, 7 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी। अदालत ने शुरुआती तौर पर कहा कि डाबर को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना ऐसा आदेश जारी नहीं किया जाना चाहिए था।
कंपनी के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3.50 रुपये प्रति शेयर अंतरिम लाभांश देने का फैसला किया है। इससे कंपनी पर कुल 620.88 करोड़ रुपये का भुगतान होगा। बुधवार को डाबर के शेयर राष्ट्रीय शेयर बाजार में 3.5% की बढ़त के साथ 395 रुपये पर बंद हुए।
इस बीच, कंपनी के वैश्विक सीईओ मोहित मल्होत्रा ने पूर्णकालिक निदेशक और वैश्विक प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया है। वह 13 नवंबर को डाबर से विदा होंगे और 16 नवंबर से विदेश में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। मल्होत्रा ने कहा कि वह 3 दशक से अधिक समय पहले प्रबंधन प्रशिक्षु के रूप में कंपनी से जुड़े थे। उस समय डाबर का कारोबार 250 करोड़ रुपये का था, जो अब 100 से अधिक देशों में पहुंच रखने वाली और 13,000 करोड़ रुपये से अधिक आय वाली कंपनी बन चुकी है।
डाबर ने अभी तक मल्होत्रा के उत्तराधिकारी का नाम घोषित नहीं किया है। हालांकि, भारत के कारोबार की जिम्मेदारी पहले ही हेरजीत एस. भल्ला को दी जा चुकी है। उन्होंने 23 अप्रैल से भारत कारोबार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद संभाला था। वहीं, फूलटाईम निदेशक पी.डी. नारंग समूह के कामकाज और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को लेकर रणनीतिक मार्गदर्शन देते रहेंगे।
भल्ला ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे माल की बढ़ती लागत के बावजूद कंपनी ने मुनाफे के साथ कारोबार में वृद्धि दर्ज की है। उनके मुताबिक, इस बार बिक्री में बढ़ोतरी कई उत्पादों और बाजारों में देखने को मिली है और इसके पीछे मांग में सुधार भी एक अहम वजह रहा है।
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