NCERT ने Class 9 की किताब में जोड़े 2 नए पाठ, Mutual Fund और निवेश सीखेंगे छात्र

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Ankit Jaiswal । Nov 4 2026 8:15PM

एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में व्यक्तिगत वित्त और उद्यमिता पर 2 नए अध्याय शामिल किए हैं। छात्र अब बचत, निवेश, म्यूचुअल फंड, आयकर, ईएमआई और नया कारोबार शुरू करने से जुड़ी बुनियादी बातें सीखेंगे। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली शिक्षा को व्यावहारिक बनाने के लिए किया गया है।

अब स्कूली बच्चे सिर्फ किताबों में अर्थव्यवस्था और बाजार के बारे में सामान्य बातें ही नहीं पढ़ेंगे, बल्कि उन्हें अपनी जेब के पैसों का सही इस्तेमाल करने और कारोबार शुरू करने की जानकारी भी मिलेगी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में व्यक्तिगत वित्त और उद्यमिता से जुड़े 2 नए अध्याय शामिल किए हैं। इनके जरिए छात्रों को बचत, निवेश, आयकर, कर्ज की किस्तों और अपना कारोबार शुरू करने जैसी जरूरी बातों से परिचित कराया जाएगा।

अर्थशास्त्र विषय के तहत जोड़े गए इन अध्यायों के नाम 'अपने व्यक्तिगत वित्त का प्रबंधन' और 'विचारों से स्टार्टअप तक' रखे गए हैं। इनका मकसद छात्रों को कम उम्र से ही पैसे के सही इस्तेमाल और कारोबार की बुनियादी समझ देना है। इससे वे आगे चलकर अपनी आमदनी, खर्च और बचत से जुड़े फैसले बेहतर तरीके से ले सकेंगे।

व्यक्तिगत वित्त से जुड़े अध्याय में 5 प्रमुख विषयों पर जानकारी दी गई है। इनमें आमदनी, बजट बनाना, बचत, निवेश और सुरक्षा के साथ जोखिम का प्रबंधन शामिल है। छात्रों को सावधि जमा, सरकारी बचत योजनाओं, बॉन्ड, शेयर और म्यूचुअल फंड जैसे निवेश विकल्पों के बारे में बताया जाएगा। इसके साथ ही महंगाई, चक्रवृद्धि ब्याज और जोखिम के मुकाबले मिलने वाले लाभ के संबंध को भी आसान उदाहरणों के जरिए समझाया जाएगा।

इस अध्याय में बीमा, कर्ज लेने और क्रेडिट से जुड़ी जरूरी बातें भी शामिल हैं। इसके अलावा समान मासिक किस्त यानी ईएमआई के बारे में जानकारी दी गई है, ताकि छात्र समझ सकें कि कर्ज लेने पर हर महीने कितना भुगतान करना पड़ता है और इसका बजट पर क्या असर हो सकता है।

आयकर को लेकर भी अलग से जानकारी दी गई है। इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के बीच अंतर समझाने के साथ नई कर व्यवस्था के तहत आयकर की अलग-अलग श्रेणियों के बारे में बताया गया है। छात्रों को उदाहरण देकर यह भी सिखाया जाएगा कि किसी व्यक्ति की आय के आधार पर उस पर कितना कर बन सकता है।

दूसरे अध्याय में छात्रों को कारोबार की दुनिया से परिचित कराया जाएगा। इसमें भारतीय कंपनियों के उदाहरणों के जरिए बताया गया है कि एक छोटा विचार किस तरह व्यवसाय का रूप ले सकता है। कारोबार शुरू करने से पहले योजना बनाना, अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियां समझना और लाभ-हानि का हिसाब रखना इसके प्रमुख हिस्से हैं। साथ ही भारत में स्टार्टअप से जुड़े माहौल और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भूमिका पर भी चर्चा की गई है। इन उद्यमों को रोजगार पैदा करने और देश की आर्थिक तरक्की में अहम माना जाता है।

गौरतलब है कि इन विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब देश में आम लोगों की निवेश में दिलचस्पी बढ़ रही है। म्यूचुअल फंड में व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) के जरिए पैसा लगाने का चलन भी बढ़ा है। सितंबर 2026 में एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड में 32,490 करोड़ रुपये का निवेश आया। खास बात यह है कि सितंबर 2024 के बाद से निफ्टी और सेंसेक्स जैसे प्रमुख शेयर बाजार सूचकांकों के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद एसआईपी में निवेश का सिलसिला जारी रहा है।

आज मोबाइल ऐप और दूसरे डिजिटल माध्यमों ने निवेश करना आसान बना दिया है। वहीं, सोशल मीडिया और वित्तीय सलाह देने वाले लोगों के वीडियो के कारण भी पैसे और निवेश से जुड़े विषय आम चर्चा का हिस्सा बन गए हैं। ऐसे में स्कूल स्तर पर सही जानकारी देना जरूरी माना जा रहा है, ताकि बच्चे बिना पूरी समझ के निवेश करने के बजाय उसके जोखिम और फायदे को पहचान सकें।

एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम रूपरेखा 2023 के तहत किए जा रहे बड़े बदलावों का हिस्सा है। नई किताबों में एआई और कंप्यूटर आधारित सोच जैसे नए विषयों के साथ रोजगार और रोजमर्रा के काम आने वाले कौशल पर भी जोर दिया जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 3 से 8 तक के लिए कंप्यूटर आधारित सोच और एआई का पाठ्यक्रम शुरू किया गया है, जबकि कक्षा 9 में इन विषयों को लागू करने की योजना सीबीएसई ने फिलहाल आगे बढ़ा दी है।

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