''White House ऐसा लगता है जैसे Saddam Hussein ने Cheesecake Factory खोल ली हो'', Obama के तंज पर बुरी तरह भड़के Trump

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24 अक्टूबर को ओहायो के क्लीवलैंड में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित रैली में ओबामा ने ट्रंप की साज-सज्जा और निर्माण योजनाओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जनता की समस्याओं के बजाय व्हाइट हाउस के नवीनीकरण में ज्यादा दिलचस्पी लेते दिखाई दे रहे हैं।

वैसे तो डोनाल्ड ट्रंप की जंग और उनकी सियासत के दांव-पेच पूरी दुनिया देख रही है, लेकिन अब अमेरिका के भीतर भी एक ऐसी जुबानी राजनीतिक जंग छिड़ गई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। दरअसल, मध्यावधि चुनाव की तपिश के बीच अमेरिका के दो सियासी दिग्गज बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप आमने-सामने आ गये हैं। हम आपको बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने डोनाल्ड ट्रंप पर ऐसा तीखा हमला बोला है कि व्हाइट हाउस की सुनहरी सजावट से लेकर ईरान युद्ध तक, हर मुद्दा सियासी अखाड़ा बन गया है। ट्रंप ने भी पलटवार करते हुए ओबामा को ‘बेहद अक्षम राष्ट्रपति’ करार दिया है।

‘सद्दाम हुसैन की चीज़केक फैक्ट्री’ वाला तंज

हम आपको बता दें कि 24 अक्टूबर को ओहायो के क्लीवलैंड में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित रैली में ओबामा ने ट्रंप की साज-सज्जा और निर्माण योजनाओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जनता की समस्याओं के बजाय व्हाइट हाउस के नवीनीकरण में ज्यादा दिलचस्पी लेते दिखाई दे रहे हैं। कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रंप को राष्ट्रपति भवन के बजाय HGTV जैसे होम-इम्प्रूवमेंट चैनल पर होना चाहिए। इसके बाद ओबामा ने वह टिप्पणी की, जिसने अमेरिकी राजनीतिक बहस में सुर्खियां बटोर लीं। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने व्हाइट हाउस को ऐसा बना दिया है, मानो पूर्व इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने वहां चीज़केक फैक्ट्री खोल ली हो। उन्होंने इमारत में सोने की सजावट की अधिकता पर भी तंज कसा।

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ओबामा ने ट्रंप के प्रस्तावित बॉलरूम, रोज गार्डन में किए गए बदलाव और साउथ लॉन पर हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड का भी जिक्र किया। उनका तर्क था कि जब अमेरिकी परिवार महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों से जूझ रहे हैं, तब राष्ट्रपति की प्राथमिकताएं भी राजनीतिक बहस का विषय बननी चाहिए। हालांकि, प्रशासन की ओर से इन निर्माण कार्यों के पीछे आधिकारिक आयोजनों और सुविधाओं की जरूरत का तर्क दिया गया है।

ट्रंप का जवाब: ‘ओबामा बेहद अक्षम राष्ट्रपति थे’

उधर, ओबामा के हमले का जवाब देने में ट्रंप ने देर नहीं लगाई। 25 अक्टूबर को अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति को “grossly incompetent President” यानी बेहद अक्षम राष्ट्रपति बताया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ओबामा ने ईरान को अरबों डॉलर दिए और उसे परमाणु हथियार हासिल करने की राह दी। उन्होंने ओबामा के हिलेरी क्लिंटन और कमला हैरिस के लिए चुनाव प्रचार का भी जिक्र किया और कहा कि दोनों ही राष्ट्रपति चुनाव हार गई थीं। इस तरह ट्रंप ने व्हाइट हाउस की सजावट पर उठाए गए सवालों का जवाब देने के बजाय ओबामा के पुराने कार्यकाल और चुनावी रिकॉर्ड को बहस के केंद्र में ला दिया।

देखा जाये तो यह टकराव दोनों नेताओं के बीच पुराने राजनीतिक मतभेदों को भी सामने लाता है। ओबामा 2015 के ईरान परमाणु समझौते के पक्षधर रहे थे, जबकि ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को उस समझौते से बाहर निकाल लिया था। अब ईरान को लेकर दोनों के दावे चुनावी बहस में फिर आमने-सामने हैं।

ईरान युद्ध और रक्षा मंत्री हेगसेथ पर भी हमला

साथ ही ओबामा का हमला केवल व्हाइट हाउस की सजावट तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने ईरान के साथ जारी संघर्ष और अमेरिकी सैन्य तैयारियों को लेकर भी ट्रंप प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सैकड़ों अमेरिकी घायल हुए हैं, मिसाइलों का भंडार घटा है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का प्रभाव बढ़ गया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर कटाक्ष करते हुए ओबामा ने कहा कि जब देश की सैन्य तैयारियों से जुड़े गंभीर सवाल मौजूद हैं, तब रक्षा मंत्री सैनिकों की जबड़े की बनावट और टेस्टोस्टेरोन के स्तर जैसे मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं। देखा जाये तो यह टिप्पणी अमेरिकी रक्षा नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर सीधा राजनीतिक हमला थी।

अपने संबोधन में ओबामा ने ईरान परमाणु समझौते का बचाव करते हुए दावा किया कि उनके कार्यकाल में हुआ समझौता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए बनाया गया था। दूसरी ओर, ट्रंप का कहना रहा है कि समझौते की सीमाएं पर्याप्त नहीं थीं और वह ईरान के मिसाइल कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय गतिविधियों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित नहीं करता था। इस तरह ईरान का मुद्दा विदेश नीति से आगे बढ़कर घरेलू चुनावी बहस का हिस्सा बन गया है।

ओहायो बना सियासी शक्ति-परीक्षण का मैदान

हम आपको बता दें कि ओबामा की रैली का मकसद डेमोक्रेटिक पार्टी के दो उम्मीदवारों को मजबूती देना था। उन्होंने गवर्नर पद की उम्मीदवार एमी एक्टन और अमेरिकी सीनेट के लिए चुनाव लड़ रहे शेरॉड ब्राउन के समर्थन में मतदाताओं से एकजुट होने की अपील की। सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी ओबामा ने मतदाताओं से दोनों उम्मीदवारों को जिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने और बड़ी संख्या में मतदान करने से देश की दिशा बदलने का अवसर मिल सकता है। उनका संदेश था कि चुनाव को केवल ट्रंप के खिलाफ नाराजगी तक सीमित न रखा जाए, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, आवास और घरेलू खर्चों जैसे मुद्दों पर वैकल्पिक योजनाएं भी सामने लाई जाएं।

चुनावी अनुमान क्या संकेत दे रहे हैं?

हम आपको यह भी बता दें कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधि सभा की लड़ाई महत्वपूर्ण बनी हुई है। 21 अक्टूबर के पोलिंग फोरकास्ट के अनुमान में डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में 225 सीटें और रिपब्लिकन को 210 सीटें मिलने का अनुमान था। सीनेट के लिए इसी पूर्वानुमान में डेमोक्रेट्स के पक्ष में 51 और रिपब्लिकन के पक्ष में 49 सीटों का अनुमान लगाया गया था।

हम आपको बता दें कि अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच होते हैं। इनमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। नतीजे राष्ट्रपति की विधायी प्राथमिकताओं और नीतियों को आगे बढ़ाने की क्षमता प्रभावित कर सकते हैं।

बहरहाल, व्हाइट हाउस की सुनहरी सजावट पर शुरू हुआ विवाद अब महंगाई, ईरान युद्ध, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रपति के कामकाज पर बहस से जुड़ गया है। ओबामा डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटा रहे हैं, जबकि ट्रंप अपने कार्यकाल और रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में लामबंदी कर रहे हैं। 3 नवंबर का मतदान बताएगा कि मतदाता इन मुद्दों को किस तरह देखते हैं और कांग्रेस में सत्ता का संतुलन किस दिशा में जाता है।

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