Sri Lanka में भिक्षु Gnanasara के क्षमादान की मांग पर आंदोलन वरिष्ठ धर्मगुरुओं की अपील के बाद रुका

Sri Lanka में भिक्षु Gnanasara के क्षमादान की मांग पर आंदोलन वरिष्ठ धर्मगुरुओं की अपील के बाद रुका
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श्रीलंका में अदालत की अवमानना मामले में जेल में बंद कट्टरपंथी नेता गलागोदत्ते ज्ञानसारा को राष्ट्रपति से माफी दिलाने की मांग कर रहे बौद्ध भिक्षुओं ने अपना प्रदर्शन अस्थायी रूप से रोक दिया है। मुख्य धर्मगुरुओं के आदेश के बाद यह फैसला लिया गया, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठाने का भरोसा दिया है। ज्ञानसारा की रिहाई को लेकर कैंडी से कोलंबो तक मार्च निकाला गया था।

श्रीलंका में जेल में बंद कट्टरपंथी धार्मिक नेता गलागोदत्ते ज्ञानसारा को राष्ट्रपति की ओर से क्षमादान देने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे बौद्ध भिक्षुओं के एक समूह ने वरिष्ठ धर्मगुरुओं के हस्तक्षेप के बाद अपना आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। ज्ञानसारा (51) अदालत की अवमानना के मामले में जेल की सजा काट रहे हैं। आंदोलन में शामिल प्रमुख भिक्षु उलपने सुमंगला ने रविवार को यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने मुख्य धर्मगुरुओं के आदेश के सम्मान में प्रदर्शन को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है।’’ सुमंगला ने कहा कि वरिष्ठ भिक्षुओं ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि वे ज्ञानसारा को संभावित क्षमादान देने का मुद्दा सरकार के समक्ष उठाएंगे।

ज्ञानसारा 2012 से ‘बोदु बाला सेना’ (बौद्ध शक्ति बल) का नेतृत्व कर रहे हैं। वह कट्टरपंथी बौद्ध राष्ट्रवादी अभियान में सबसे आगे रहे हैं। इस अभियान में श्रीलंका के मुस्लिम अल्पसंख्यकों के प्रति इस्तेमाल की गई बयानबाजी को लेकर आलोचना हुई थी।

अदालत की अवमानना का दोषी ठहराए जाने के बाद ज्ञानसारा को छह साल की सजा का शेष हिस्सा काटने के लिए इसी महीने की शुरुआत में फिर जेल भेज दिया गया था। श्रीलंका के तीन प्रमुख बौद्ध मठवासी संप्रदायों के चार मुख्य धर्मगुरुओं ने रविवार को जारी संयुक्त बयान में कहा कि प्रदर्शन जारी रखना बौद्ध भिक्षुओं से अपेक्षित अनुशासन के मानकों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इससे देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध मठवासी समुदाय की छवि खराब होने का खतरा है।

इस महीने की शुरुआत में प्रदर्शनकारी भिक्षुओं ने ज्ञानसारा को क्षमादान देने की मांग करते हुए मध्य श्रीलंका के कैंडी शहर से राजधानी कोलंबो तक मार्च निकाला था। उन्होंने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को ज्ञापन सौंपकर ज्ञानसारा को माफ करने का आग्रह किया था। इस मामले में जेल में ज्ञानसारा के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर भी विवाद हुआ है।

जेल अधिकारियों ने भिक्षु के पारंपरिक वस्त्र उतरवाए जाने के बाद ज्ञानसारा को अदालत में सामान्य कपड़े पहनकर पेश होने का निर्देश दिया। इस पर कुछ बौद्ध भिक्षुओं ने विरोध जताते हुए कहा कि उन्हें भिक्षु के वस्त्र पहनने से वंचित करने का अधिकार केवल उनके संप्रदाय की मठ परिषद को है। दिसानायके के हस्तक्षेप के बाद जेल नियमों को लेकर राजपत्र में अधिसूचना जारी की गई, जिसके तहत ज्ञानसारा को भिक्षु के वस्त्र पहनकर अदालत में पेश होने की अनुमति दी गई।

ज्ञानसारा ने 2016 में एक पत्रकार के अपहरण से जुड़े मामले की सुनवाई में बाधा डाली थी। इस मामले में सैन्य खुफिया अधिकारियों पर आरोप लगाए गए थे। वर्ष 2010 में लापता हुए पत्रकार की पत्नी को धमकाने और अदालत की अवमानना के मामले में उन्हें 2018 में सजा सुनाई गई थी।

हालांकि, ज्ञानसारा ने इस सजा का एक साल से भी कम समय जेल में बिताया, क्योंकि उन्हें 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने क्षमादान दे दिया था। श्रीलंका के उच्चतम न्यायालय ने पिछले महीने प्रक्रियागत त्रुटियों का हवाला देते हुए उस क्षमादान को रद्द कर दिया। इसके बाद ज्ञानसारा को अपनी सजा का शेष हिस्सा काटने के लिए फिर जेल जाना पड़ा।

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