ट्रंप के मुखर आलोचक Lula Da Silva ब्राजील में फिर जीते; 44 लाख वोटों से Flavio Bolsonaro हारे, चुनाव नतीजे रद्द करने की मांग की

Lula Da Silva
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ब्राजील के निर्वाचन न्यायालय ने 100 प्रतिशत मतों की गणना के बाद लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को राष्ट्रपति पद के चुनाव में दोबारा विजयी घोषित किया है। लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो पर करीब 44 लाख वोटों की निर्णायक बढ़त हासिल की। हालांकि, बोल्सोनारो ने हार स्वीकार करने से इनकार करते हुए नतीजों को रद्द करने की मांग उठाई है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा रविवार को फिर राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। इस चुनाव परिणाम से लातिन अमेरिका में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव की आलोचना करने वालों को राहत मिली है। मतगणना में 100 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने के बाद ब्राजील के निर्वाचन न्यायालय ने घोषणा की कि जल्द ही 81 वर्ष के होने जा रहे लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो पर करीब 44 लाख वोटों की निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है।

यह घोषणा ब्राजील के मतदान केंद्रों पर शाम को मची अफरा-तफरी के बाद हुई। मतदान का निर्धारित समय समाप्त होने से ठीक पहले मतदान दो घंटे बढ़ाने का फैसला किया गया था। रविवार देर रात बोल्सोनारो ने हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

उन्होंने मतदान का समय बढ़ाने के फैसले को अभूतपूर्व बताया, हालांकि इसकी मांग उन्होंने और लूला दोनों ने की थी। उन्होंने चुनाव नतीजों को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि इन्हें स्वीकार करना असंभव है। लूला की जीत लातिन अमेरिका में चल रहे उस रुझान के उलट है, जिसमें ट्रंप के साथ गठबंधन करने वाले दक्षिणपंथी झुकाव के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों की जीत की संख्या बढ़ रही है।

लूला की जीत के बाद लातिन अमेरिका के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों मेक्सिको और ब्राजील में वामपंथी झुकाव वाले नेता सत्ता में बने रहेंगे। इससे लातिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में ब्राजील ट्रंप की ओर से लगाए गए बढ़े हुए शुल्कों के दबाव के बावजूद अमेरिका से स्वतंत्र बने रहने की स्थिति में होगा। लूला के चुनाव प्रचार अभियान की ओर से जारी एक वीडियो में ब्राजील के निर्वाचन न्यायालय द्वारा दूसरे दौर के चुनाव में उनकी जीत की पुष्टि किए जाने के बाद उन्हें अपनी पत्नी एवं प्रथम महिला रोसांगेला दा सिल्वा और सहयोगियों के साथ जश्न मनाते हुए दिखाया गया।

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इस बीच, जीत का जश्न मनाने के लिए उनके सैकड़ों समर्थक साओ पाउलो की मुख्य सड़क पर जुटने लगे। निर्वाचन न्यायालय की घोषणा के साथ ही मतदान केंद्रों पर शाम से बना असमंजस खत्म हो गया। इससे पहले, ब्राजील के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश क्रिस्टियानो जानिन ने मतदान समाप्त होने के निर्धारित समय से तीन मिनट पहले फैसला सुनाया कि मतदान केंद्र दो घंटे और खुले रहेंगे।

यह फैसला दोनों उम्मीदवारों की मांग के बाद लिया गया। लूला ने साओ पाउलो और साल्वाडोर में मतदान केंद्रों तक मतदाताओं को ले जाने वाली बसों से जुड़ी समस्याओं के कारण मतदान का समय बढ़ाने की मांग की थी। इन दोनों शहरों में आम तौर पर मौजूदा राष्ट्रपति के पक्ष में रुझान रहता है।

वहीं, बोल्सोनारो ने ब्राजील के दक्षिणी हिस्से में भारी बारिश के कारण मतदान का समय बढ़ाने का अनुरोध किया था। इस क्षेत्र में उन्हें अधिक समर्थन मिलने की संभावना थी। बोल्सोनारो के सहयोगी निकोलस फरेरा ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि मतदान का समय बढ़ाने का फैसला करने वाले न्यायाधीश जानिन पहले लूला के वकील रह चुके हैं।

ब्राजील में 1985 में सैन्य तानाशाही समाप्त होने के बाद यह पहली बार है कि पहले दौर के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार ने राष्ट्रपति पद हासिल किया है। पहले दौर में बोल्सोनारो को 47 प्रतिशत और लूला को 45 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों के बीच 22 लाख वोटों का अंतर था।

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महंगाई और सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंताओं के कारण लूला के लिए दोबारा चुनाव जीतना कठिन था। बोल्सोनारो ने अपराध के खिलाफ सख्त रुख को अपने चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बनाया और खाद्य पदार्थों की कीमतें घटाने का वादा किया। वहीं, अनिर्णय की स्थिति में मौजूद मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए लूला ने महंगी प्रोत्साहन योजनाओं पर जोर दिया।

दोनों नेताओं को परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ा है। लूला ने 1970 के दशक में ट्रेड यूनियन नेता के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने वर्कर्स पार्टी की स्थापना में मदद की।

इस पार्टी की ओर से उन्होंने तीन बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा और आखिरकार 2002 में जीत हासिल की। चार साल बाद वह फिर निर्वाचित हुए। 2010 में उनके मंत्रिमंडल की सदस्य दिल्मा रूसेफ ने उनकी जगह ली।

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रूसेफ 2014 में दोबारा निर्वाचित हुईं। रूसेफ को 2016 में सरकारी लेखा-जोखा संबंधी हेरफेर के आरोपों के बीच महाभियोग के जरिए पद से हटा दिया गया था। इस दौरान भ्रष्टाचार की व्यापक जांच में लूला का नाम भी सामने आया।

लूला ने 2018 में फिर राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन दोषी ठहराए जाने के बाद मार्च में उन्हें जेल भेज दिया गया। 580 दिन जेल में रहने के बाद लूला रिहा हुए। इसके बाद ब्राजील के उच्चतम न्यायालय ने उनकी सजा रद्द कर दी।

इसके बाद लूला पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के सबसे मुखर आलोचकों में शामिल हो गए और 2022 में उन्हें मामूली अंतर से हराया। लूला ने 2024 में, अपने कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर स्वीकार किया था कि उनका प्रशासन अब तक मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए बहुत कम काम कर पाया है। इस बार के राष्ट्रपति चुनाव में पहले दौर में पिछड़ने के बाद लूला ने अपने चुनाव प्रचार की रणनीति बदली, युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की और लोकतांत्रिक मूल्यों तथा अपनी राजनीतिक विरासत के समर्थन में लाखों ब्राजीलियाई लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया।

लूला अब ट्रंप और निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओर्टेगा के साथ अमेरिका महाद्वीप के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपतियों में शामिल हो गए हैं। तीनों की उम्र 80 वर्ष है।

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