Hockey India के चुनाव और ओडिशा इकाई के नोटिस पर High Court ने लगाई रोक

ओडिशा उच्च न्यायालय ने हॉकी इंडिया के पांच दिसंबर को होने वाले चुनाव पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने हॉकी ओडिशा की स्थायी सदस्यता घटाने से जुड़े कारण बताओ नोटिस पर भी रोक लगाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति आरके पटनायक की एकल पीठ ने राज्य संघ की याचिका पर यह निर्देश देते हुए अगली सुनवाई नौ दिसंबर को तय की है।
... मोना पार्थसारथी ... नयी दिल्ली, छह नवंबर ओडिशा उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को हॉकी इंडिया के पांच दिसंबर को प्रस्तावित चुनाव पर रोक लगाने के साथ हॉकी इंडिया की ओर से हॉकी ओडिशा को जारी उस कारण बताओ नोटिस पर भी अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें राज्य इकाई की स्थायी सदस्यता समाप्त कर उसे एसोसिएट मेंबर (सहयोगी सदस्य) बनाने का प्रस्ताव था। न्यायमूर्ति आरके पटनायक की एकल पीठ ने हॉकी ओडिशा की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया। याचिका में हॉकी इंडिया की छह अक्टूबर को हुई 120वीं कार्यकारिणी बैठक की कार्यवाही और सात अक्टूबर को जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी गई थी।
अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई नौ दिसंबर को होगी। हॉकी ओडिशा ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि कारण बताओ नोटिस कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, क्योंकि हॉकी इंडिया की मौजूदा कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल 30 सितंबर को ही समाप्त हो चुका था। ऐसे में समिति द्वारा सात अक्टूबर को जारी नोटिस की वैधता पर सवाल उठाया गया है।
हॉकी इंडिया ने नोटिस में आठ बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी। इनमें हॉकी ओडिशा की 30 जिला इकाइयों के कामकाज में गंभीर खामियां भी शामिल थीं। महासंघ के अनुसार, सभी 30 जिला संघों में अध्यक्ष और सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद चुनाव के बजाय पदेन आधार पर प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए हैं।
इनमें जिलाधिकारी (डीएम) और उपजिलाधिकारी (सब-कलेक्टर) जैसे अधिकारी शामिल हैं। हॉकी इंडिया ने यह भी कहा था कि किसी भी जिला इकाई ने चुनाव की सूचना, बैठक की कार्यवाही या चुनाव परिणाम से संबंधित दस्तावेज जमा नहीं किए हैं। ऐसे में यह साबित नहीं होता कि इन इकाइयों की संचालन समितियों का गठन वैध चुनाव प्रक्रिया के तहत हुआ है।
राज्य संघ ने दूसरी ओर कारण बताओ नोटिस की वैधता पर सवाल उठाते हुए दलील दी थी कि हॉकी इंडिया की मौजूदा कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल 30 सितंबर को ही समाप्त हो चुका था। ऐसे में सात अक्टूबर को जारी नोटिस को कानूनी रूप से उचित नहीं ठहराया जा सकता। हॉकी इंडिया में जारी आंतरिक मतभेदों के बीच 2026-2030 कार्यकाल के लिए पदाधिकारियों के चुनाव पांच दिसंबर को प्रस्तावित थे।
सुनवाई के दौरान ओडिशा के महाधिवक्ता पी. आचार्य ने अदालत का ध्यान हॉकी इंडिया के प्रायोजन समझौते और भारतीय हॉकी में राज्य सरकार के योगदान की ओर भी दिलाया। ओडिशा सरकार 2018 से भारतीय सीनियर और जूनियर पुरुष एवं महिला राष्ट्रीय टीमों की आधिकारिक प्रायोजक है। राज्य सरकार ने वर्ष 2036 तक अपना सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
अदालत ने हॉकी इंडिया को नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश दिया है। हॉकी इंडिया में अध्यक्ष दिलीप टिर्की और महासचिव भोला नाथ सिंह के बीच प्रशासनिक फैसलों, महासंघ के संचालन और कार्यकारिणी बैठकों के आयोजन को लेकर मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं। दोनों पदाधिकारियों के बीच सत्ता संघर्ष का असर महासंघ के कामकाज पर भी पड़ रहा है।
दोनों के बीच मतभेद पहली बार उस समय खुलकर सामने आए थे, जब अगस्त में एफआईएच विश्व कप से पहले भारतीय टीमों की पारंपरिक नीली जर्सी का रंग बदलकर केसरिया कर दिया गया था। टिर्की ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इसे उनकी जानकारी या कार्यकारिणी बोर्ड की मंजूरी के बिना लिया गया। भोला नाथ सिंह ने उनके दावे का खंडन करते हुए कहा था कि अध्यक्ष को इस फैसले और इसकी मंजूरी की प्रक्रिया की जानकारी थी।
विवाद इसके बाद और बढ़ गया, जब तिर्की ने हॉकी इंडिया के महानिदेशक कमांडर आरके श्रीवास्तव को आठ बिंदुओं पर कारण बताओ नोटिस जारी किया और उनसे सभी जिम्मेदारियां वापस ले लीं। भोला नाथ सिंह ने इस कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए थे। टिर्की ने भोला नाथ सिंह की ओर से बुलाई गई हॉकी इंडिया की 120वीं कार्यकारिणी बैठक पर भी आपत्ति जताई थी।
उनका आरोप था कि यह बैठक अध्यक्ष की पूर्व अनुमति या उनसे परामर्श किए बिना बुलाई गई थी।
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