Thane Court ने गर्भवती पत्नी की दहेज हत्या में पति को सुनाई 10 साल की सजा

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महाराष्ट्र के ठाणे की सत्र अदालत ने अपनी गर्भवती पत्नी की दहेज के लिए हत्या करने के मामले में 38 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पाया कि आरोपी ने कार और साढ़े सात लाख रुपये के लिए महिला के साथ लगातार शारीरिक व मानसिक क्रूरता की थी। साथ ही मृतका का स्त्रीधन उसकी मां को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

ठाणे, पांच नवंबर ठाणे की एक अदालत ने 2021 में अपनी गर्भवती पत्नी की दहेज हत्या के मामले में उसके पति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि महिला को पैसे और कार की मांग को लेकर हिंसा तथा उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी.टी. पवार ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि महिला के शरीर पर मौजूद चोट के निशान और आरोपी द्वारा इन चोटों के बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण न दे पाना, मारपीट के संबंध में गवाहों के बयानों की पुष्टि करता है।

अदालत ने मैकेनिकल इंजीनियर इंद्रजीत जयराजराव दवाले (38) को भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (क्रूरता) और 304बी (दहेज हत्या) के तहत दोषी ठहराया और उस पर 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियुक्त परिवीक्षा अपराधी अधिनियम के लाभ का हकदार नहीं है। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि पीड़िता का ‘स्त्रीधन’ (सोने के आभूषण और अन्य सामान) उचित सत्यापन के बाद उसकी मां को लौटा दिया जाए।

अतिरिक्त लोक अभियोजक मनीषा एन पावसे ने अदालत को बताया कि पीड़िता मेघा भी मैकेनिकल इंजीनियर थीं और एक निजी कंपनी में काम करती थीं। आरोपी से उसकी शादी 23 जुलाई, 2017 को हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार 27 जून 2021 को महाराष्ट्र के ठाणे शहर में अपने फ्लैट में मेघा कथित तौर पर फंदे से लटकी हुई पाई गई थी।

एक जुलाई 2021 को मेघा की मौत हो गयी थी। मेघा 14 से 16 सप्ताह की गर्भवती थीं। न्यायाधीश ने गौर किया कि महिला के दोनों हाथों पर कई जगह चोट के निशान थे और पीठ तथा बाएं गाल पर भी खरोंच के निशान थे।

इससे पता चलता है कि फंदे से लटकने से कुछ समय पहले ही उसके साथ मारपीट की गई थी। अदालत ने कहा कि यह चिकित्सकीय साक्ष्य उन गवाहों के बयानों की पुष्टि करते हैं, जिन्होंने आरोपी द्वारा मेघा के साथ मारपीट किए जाने की बात कही थी। अदालत ने टिप्पणी की, ‘‘कार खरीदने और संपत्ति से जुड़ी देनदारियों को चुकाने के लिए पत्नी और उसके माता-पिता से 7,50,000 रुपये की मांग करना ‘कीमती संपत्ति’ की गैर-कानूनी मांग के दायरे में आता है, साथ ही गर्भवती महिला के साथ मारपीट तथा उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना...।’’ अदालत ने यह भी पाया कि घटना के बाद आरोपी के आचरण से सच्चाई छिपाने की उसकी मंशा जाहिर होती है।

अदालत के अनुसार, उसने पहले मेघा के पिता और एक अन्य गवाह को बताया कि वह बाथरूम में गिर गई थी। जब उसके माता-पिता अस्पताल पहुंचे, तो आरोपी ने उन्हें मेघा से मिलने से रोक दिया और झूठा दावा किया कि वह कोविड-19 से संक्रमित हो गई है। न्यायाधीश ने कहा कि पीड़िता एक शिक्षित महिला थी, जिसे गर्भावस्था के दौरान धन और कार की मांग को लेकर लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई।

मृत्यु से पहले उसके शरीर पर मिले चोट के निशान उसके साथ हुई शारीरिक हिंसा को दर्शाते हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी जांच और सुनवाई के दौरान पहले ही हिरासत में था और हिरासत के दौरान बिताई गई अवधि का लाभ उसे सजा में दिया जाएगा।

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