Nepal Floods: Mansarovar Yatra पर गए तमिलनाडु के 106 तीर्थयात्री फंसे, बचाव कार्य जारी

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के चलते मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु और पुडुचेरी के कई तीर्थयात्री वहां फंस गए हैं। विधानसभा में मंत्री ए. राजमोहन ने जानकारी दी कि 20 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है और उन्हें काठमांडू के रास्ते वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार नई दिल्ली में स्थापित नियंत्रण कक्ष के जरिए राहत कार्यों पर लगातार नजर रख रही है।
(फाइल फोटो के साथ) चेन्नई, 27 अगस्त तमिलनाडु के मंत्री ए. राजमोहन ने बृहस्पतिवार को विधानसभा को बताया कि राज्य सरकार नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण फंसे राज्य के तीर्थयात्रियों के बचाव कार्य की करीब से निगरानी कर रही है और चेन्नई से गए 49 अन्य लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के 10 जिलों से 54 लोग और पुडुचेरी से तीन लोग तीर्थयात्रा पर गए थे। इसके अलावा सरकार को पता चला है कि चेन्नई के एक ‘टूर ऑपरेटर’ ने 49 तीर्थयात्रियों को मानसरोवर की यात्रा पर भेजा था जिससे तीर्थयात्रा पर जाने वाले लोगों की संख्या 106 हो गई है।
विपक्ष की ओर से लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार तीर्थयात्रियों के बचाव कार्य और उनकी जानकारी की हर घंटे समीक्षा कर रही है और बचाए गए 20 लोगों को वर्तमान में काठमांडू के रास्ते वापस लाने की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने बताया कि इन 57 लोगों के अलावा चेन्नई की एक ट्रैवल एजेंसी 49 तीर्थयात्रियों को मानसरोवर यात्रा पर ले गई थी और अभी उनकी यात्रा योजना तथा वे कहां हैं, इस बारे में पता लगाने की कोशिशें की जा रही हैं। नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, देश के मध्य जिलों में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही मची और प्रभावित इलाकों का संपर्क कट गया जिससे मानसरोवर यात्रा पर गए कई तीर्थयात्रियों समेत 130 से अधिक भारतीय लापता हो गए और कई अन्य लोग वहां फंस गए।
कैलाश यात्रा पर गए तमिल तीर्थयात्रियों से जुड़ी नेपाल की इस दुखद घटना की जानकारी देते हुए राजमोहन ने बताया कि चीन में एक नदी के ऊपरी हिस्से में ग्लेशियर के टूटने से नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी में जबरदस्त बाढ़ आ गई, जिससे रसुवा, तिमुरे और स्याब्रुबेसी जैसे इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए। इस तीर्थयात्रा पर कुल 384 यात्री गए थे जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल थे। इनमें से 75 लोग घायल हुए जबकि 209 लोगों को बचाया गया।
बचाए गए लोगों में से 93 को जमीन के रास्ते और 116 को ‘एयर एंबुलेंस’ के जरिए निकाला गया। इस दौरान वाहनों की आवाजाही के लिए बने 35 पुल, 45 झूला पुल और लगभग 40 किलोमीटर सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। मंत्री ने बताया, ‘‘तीर्थयात्रा पर एक नहीं बल्कि कई समूह गए थे।
पहले समूह में 57 तीर्थयात्री थे जिनमें 54 तमिलनाडु से और तीन लोग पुडुचेरी से थे।’’ राजमोहन ने बताया कि इनमें से 20 तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक गाड़ी बाढ़ में फंस गई थी लेकिन उन्हें सुरक्षित निकालकर ‘तिमुरे’ इलाके में सशस्त्र पुलिस बल के एक शिविर में पहुंचा दिया गया है और वे सुरक्षित हैं। बाकी सदस्यों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें जारी हैं। बाद में पता चला कि ‘महादेव कैलाश यात्रा, चेन्नई’ द्वारा भेजा गया 49 तीर्थयात्रियों का एक और समूह भी उसी इलाके में है और अधिकारी उनका पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल की सेना, पुलिस और निजी एजेंसियां हेलीकॉप्टर एवं जमीन पर राहत कार्य करने वाली टीम की मदद से बचाव, खोज और राहत कार्य कर रही हैं। मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने मदद के लिए नयी दिल्ली में 24 घंटे उपलब्ध रहने वाले नियंत्रण कक्ष और टोल-फ्री नंबर शुरू किए हैं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह आपदा जलवायु परिवर्तन और सतत विकास लक्ष्यों के कड़ाई से पालन की जरूरत को लेकर एक “चेतावनी” है।
तीर्थयात्रियों की जानकारी देते हुए राजमोहन ने बताया कि इन 10 जिलों में कुड्डालोर से 11, कृष्णगिरि से पांच, तंजावुर से 16, धर्मपुरी, तिरुवन्नामलाई और नमक्कल से एक-एक, तिरुचिरापल्ली से चार, तिरुवरूर से दो, मयिलादुथुराई से सात और चेन्नई से छह लोग तथा पुडुचेरी से तीन लोग, यानी कुल 57 लोग तीन वाहनों में कैलाश यात्रा पर गए थे। राजमोहन ने कहा, ‘‘अचानक आई बाढ़ की वजह से दूसरी गाड़ी फंस गई थी। लगभग 20 तमिल लोगों को तुरंत बचाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया।’’ इससे पहले, सदन में उस समय हंगामा हो गया जब विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने मंत्री से इस विषय पर बोलने को कहा।
इस पर विपक्षी दलों के सदस्यों ने तीखी बहस करते हुए मांग की कि उन्हें पहले इस मुद्दे पर बोलने का मौका दिया जाए। अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि पहले मंत्री इस मुद्दे पर बोलेंगे, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है। प्रभाकर ने कहा, ‘‘पहले मंत्री को बोलने दीजिए।
उसके बाद आप इस विषय पर बोल सकते हैं। इससे क्या फर्क पड़ता है?’’ जल्द सदन में हंगामा शुरू हो गया क्योंकि विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के सदस्य अपनी अपनी जगह पर खड़े होकर इस मुद्दे पर पहले चर्चा की मांग करने लगे। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सभी दलों ने इस मुद्दे पर बोलने के लिए पहले ही सूचना दे दी थी।
इसलिए सदस्यों द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद ही मंत्री जवाब दे सकते हैं। बाद में, अनुमति मिलने पर उदयनिधि ने यह पूछा कि कितने तमिल लोग फंसे हुए हैं और कितनों को बचाया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि क्या राज्य सरकार ने बचाव कार्य शुरू करने के लिए कोई विशेष अधिकारी नियुक्त किया है।
एआईएडीएमके प्रमुख ई. के. पलानीस्वामी ने यह पूछा कि सरकार ‘‘लापता’’ 37 लोगों का पता लगाने के लिए क्या कदम उठा रही है।
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