COP31 से पहले Simon Stiell की अपील, जलवायु संकट पर ठोस कदम उठाएं देश

यूएन जलवायु परिवर्तन प्रमुख साइमन स्टिल ने वैश्विक चुनौतियों के बीच सभी देशों से एकजुट होकर जमीनी स्तर पर ठोस काम करने का आह्वान किया है। तुर्किये के अंताल्या में 9 नवंबर से शुरू हो रहे सीओपी31 में पुरानी घोषणाओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने पर जोर रहेगा। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा और बिजली आधारित प्रणालियों को बढ़ावा देकर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की वकालत की।
नयी दिल्ली, पांच नवंबर जलवायु परिवर्तन संबंधी संयुक्त राष्ट्र निकाय के कार्यकारी सचिव साइमन स्टिल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भू-राजनीतिक स्तर पर बढ़ती चुनौतियों के बीच, देशों को एक बार फिर एकजुट होकर ठोस और व्यावहारिक प्रगति की दिशा में काम करना होगा ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और वे जलवायु संबंधी उपायों से भी लाभान्वित हो सकें। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी31) नौ नवंबर से शुरू होगा। साइमन स्टिल ने कहा कि आगामी सीओपी सम्मेलन में वैश्विक जलवायु कार्रवाई एजेंडे के तहत की गई प्रतिबद्धताओं और निर्धारित लक्ष्यों को ठोस परिणामों में बदला जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के जरिये उद्योग जगत, शहरों, राज्यों, समुदायों और नागरिक समाज को एक मंच पर लाया जायेगा, ताकि कागजों पर की गई घोषणाओं को धरातल पर वास्तविक परियोजनाओं के रूप में साकार किया जा सके। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन(यूएनएफसीसीसी) के कार्यकारी सचिव ने एक बयान में कहा, ‘‘कोई भी एक सीओपी सम्मेलन रातोंरात जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों का अचूक समाधान नहीं हो सकता। हालांकि, हाल के प्रत्येक सीओपी सम्मेलन ने इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
तुर्किये के अंताल्या में आयोजित होने वाला सीओपी31 भी इस दिशा में योगदान देगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक स्तर पर गंभीर चुनौतियों के बावजूद, देशों को एक बार फिर एकजुट होकर धरातल पर ठोस प्रगति सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करने होंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।’’ जीवाश्म ईंधन के मुद्दे को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह अंताल्या में होने वाला सम्मेलन तब आयोजित किया जा रहा है, जब जीवाश्म ईंधन की कीमतों से जुड़ा संकट लगातार बना हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘सीओपी31 व्यावहारिक समाधानों को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो सकता है। बिजली आधारित प्रणालियों और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने से घरेलू खर्चों में कमी लाई जा सकती है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।’’
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