पीलीभीत में वोटर लिस्ट गड़बड़ी पर दो पूर्व SDM और ऑपरेटर पर BNS धारा 198 दर्ज

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पीलीभीत सदर विधानसभा सीट पर मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर पुलिस ने दो पूर्व उप-जिलाधिकारियों और एक ऑपरेटर पर कानूनी शिकंजा कस दिया है। चुनाव आयोग के निर्देश पर दर्ज मामले में अब बीएनएस की धारा 198 जोड़ी जा रही है। जांच में बिना रिकॉर्ड 10,470 ऑफलाइन फॉर्म स्वीकृत पाए गए थे।

पीलीभीत (उप्र), तीन नवंबर पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र (127) की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में नामजद दो पूर्व उप-जिलाधिकारियों (एसडीएम) और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 198 जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह जानकारी अधिकारियों ने मंगलवार को दी। पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने कहा कि जांच अधिकारी को सोमवार देर रात आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए थे।

उन्होंने कहा कि धारा जोड़ने की प्रक्रिया जारी है और पुलिस जल्द ही आरोपियों से पूछताछ करेगी। पुलिस के अनुसार, बीएनएस की धारा 198 एक लोक सेवक द्वारा जानबूझकर कानूनी निर्देशों की अवहेलना करने और आधिकारिक कर्तव्यों की उपेक्षा करने से संबंधित है, जिसके परिणामस्वरूप किसी नागरिक के अधिकारों को क्षति पहुंचे। पुलिस के अनुसार अनियमितताएं विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के तहत प्राप्त ऑफलाइन प्रपत्रों के निस्तारण की जांच के दौरान सामने आईं।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मई से 28 अगस्त के बीच 13,779 ऑफलाइन फॉर्म प्राप्त हुए थे। इसके अनुसार इनमें से 10,470 को मंजूरी दी गई, जबकि 3,309 को खारिज कर दिया गया। हालांकि, कार्यालय में इन प्रविष्टियों से जुड़ा कोई भी आवेदन फॉर्म या सहायक दस्तावेज नहीं मिला।

विवाद तब शुरू हुआ जब ऐसी शिकायतें आईं कि अलग-अलग मतदाताओं के मतदाता पहचान पत्र (एपिक नंबर) नंबर एक जैसे पाए गए। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुमार कश्यप की शिकायत पर 22 अक्टूबर को पीलीभीत कोतवाली थाने में एक मामला दर्ज किया गया था। इसमें तत्कालीन उप-जिलाधिकारियों मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी तथा मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार को नामजद किया गया था।

निर्वाचन आयोग के निर्देश पर इन सभी को निलंबित कर दिया गया था। जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद, निर्वाचन आयोग ने 31 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि प्राथमिकी में बीएनएस की धारा 198 जोड़ी जाए और मामले को अदालत में आगे बढ़ाया जाए। इससे पहले, इस मामले में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 लागू की गई थी।

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