Telangana में बड़ा 'ठेका Scam'? CM Revanth Reddy पर KTR का हमला, Amit Shah को लिखी चिट्ठी

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अंकित सिंह । Mar 13 2026 5:23PM

बीआरएस नेता केटीआर ने अमित शाह को पत्र लिखकर तेलंगाना की बिगड़ती कानून व्यवस्था और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर अपनी बेनामी कंपनी 'केएलएसआर इंफ्राटेक' को अवैध रूप से सरकारी ठेके देने का आरोप लगाया है। केटीआर ने दावा किया कि सीएम के दबाव में मामले से जुड़े सबूत नष्ट किए जा रहे हैं, जिससे जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (केटीआर) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर तेलंगाना में बिगड़ती कानून व्यवस्था और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से जुड़ी बेनामी कंपनी केएलएसआर इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को सरकारी ठेकों के कथित अनियमित आवंटन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एक विज्ञप्ति के अनुसार, गुरुवार को लिखे अपने पत्र में केटीआर ने आरोप लगाया कि केएलएसआर इंफ्राटेक से संबंधित मामलों की जांच के दौरान राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर सबूतों से छेड़छाड़ की। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि सरकारी अधिकारियों ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि मामले में जुटाए गए महत्वपूर्ण सबूत गायब हो गए हैं।

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केटीआर ने कहा कि यह घटना राज्य में कानून व्यवस्था की भयावह गिरावट और जांच एजेंसियों पर डाले जा रहे दबाव को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपने अधिकार का दुरुपयोग किया और अपनी बेनामी कंपनी को बचाने के लिए अधिकारियों पर सबूत नष्ट करने का दबाव डाला। उन्होंने आगे कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि पुलिस और जांच एजेंसियों पर जनता का भरोसा बुरी तरह से कम हो गया है। केटीआर ने कहा कि कंपनी के दिवालियापन की कार्यवाही चल रही होने के बावजूद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केएलएसआर इंफ्राटेक को बड़े सरकारी ठेके दिए हैं।

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रिपोर्टों के अनुसार, दिवालियापन की कार्यवाही चल रही होने के बावजूद कंपनी को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के ठेके आवंटित किए गए हैं। इनमें सिंचाई परियोजनाएं, पेयजल आपूर्ति परियोजनाएं, यंग इंडिया इंटीग्रेटेड स्कूल परियोजनाएं और प्रमुख सड़क निर्माण कार्य शामिल हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, केटीआर ने कहा कि ऐसे फैसले सरकारी खरीद मानदंडों के अनुपालन, वित्तीय पात्रता और निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हैं।

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