Ayodhya Ram Mandir चढ़ावा कांड में बड़ा एक्शन, SIT रिपोर्ट के आधार पर सभी 8 आरोपी गिरफ्तार

Shri Ram Janmbhoomi Mandir
ANI

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा हेरफेर मामले में, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद हुई है, जिसमें चोरी और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद सभी नामजद आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी आरोपियों की न्यायिक रिमांड लेने के लिए उन्हें फैज़ाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में बृहस्पतिवार को रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों और कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पुलिस ने बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से 23 जून को सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है। सूत्रों के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान और चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने विशेष जांच का अनुरोध किया था जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि एसआईटी की निष्पक्ष जांच से दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को सात जून को एक खबर का हवाला देते हुए उठाया और उन्होंने इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। बाद में इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।

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