Nepal Floods: महाराष्ट्र के 299 नागरिक सुरक्षित, 60 लोगों से संपर्क की कोशिश जारी

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नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बीच फंसे महाराष्ट्र के 404 नागरिकों में से 105 लोग सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने पुष्टि की है कि वहां मौजूद 299 अन्य लोग सुरक्षित हैं, जबकि 60 पर्यटकों से अब तक संपर्क नहीं हो सका है। इसके अलावा तिब्बत सीमा पर फंसे 37 श्रद्धालुओं को भी सुरक्षित काठमांडू रवाना कर दिया गया है।

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद वहां फंसे महाराष्ट्र के 404 लोगों में से 105 भारत लौट चुके हैं, जबकि शेष 299 लोग सुरक्षित हैं लेकिन वे अब भी नेपाल के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए हैं। इसके अलावा 60 पर्यटकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि त्रासदी के समय नेपाल में मौजूद महाराष्ट्र के 105 लोग भारत लौट चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ये सभी नागपुर के रहने वाले हैं और अपने तय कार्यक्रम के अनुसार घर लौटेंगे।’’ उन्होंने कहा कि मुंबई के ‘रिचा टूर्स प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा आयोजित नेपाल यात्रा पर गए राज्य के 60 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा, ‘‘अब तक महाराष्ट्र के 404 लोगों के नेपाल में फंसे होने की पुष्टि हुई है।

इनमें से 105 लोग देश लौट चुके हैं, जबकि हमारे नियंत्रण कक्ष ने शेष 299 लोगों से संपर्क स्थापित कर लिया है। ये सभी सुरक्षित हैं लेकिन नेपाल के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए हैं।’’ बुधवार को तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने के बाद नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण तिब्बत में फंसे महाराष्ट्र के 37 श्रद्धालु मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हस्तक्षेप के बाद शुक्रवार सुबह काठमांडू के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार ठाणे, पुणे, रायगढ़, अलीबाग और डोंबिवली के श्रद्धालुओं का यह समूह सुबह लगभग छह बजे सागा, तिब्बत से नायलम जांच चौकी के रास्ते रवाना हुआ और नेपाल की राजधानी की ओर बढ़ रहा है। सीएमओ के बयान में बताया गया कि उनकी काठमांडू से वापसी की उड़ान 29 अगस्त यानी शनिवार को दोपहर दो बजे निर्धारित है।

शिवसेना नेता डॉ. दीपक सावंत ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पर्वतारोही डॉ. मिलिंद चितले और उनकी पत्नी डॉ. जान्हवी के नेतृत्व में मुंबई से गए समूह से अब तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा, ‘‘अब तक उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इस समूह में मेरी पत्नी की दंत चिकित्सक मित्र डॉ. मीनाक्षी रमानी और उनके दो रिश्तेदार भी शामिल हैं।’’ सावंत ने कहा कि तय यात्रा कार्यक्रम के अनुसार इस समूह को उस समय नेपाल-चीन सीमा पर स्थित जांच चौकी पार करनी थी, जब अचानक बाढ़ आई।

तब से समूह के किसी भी सदस्य से संपर्क नहीं हो पाया है।

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