नेपाल से जुड़े हैं तार...कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास पर मद्रास HC का बड़ा एक्शन, जानें सरकार को क्या नोटिस जारी किया

मद्रास उच्च न्यायालय ने सीजेपी नेता सौरव दास की नागरिकता जांच को लेकर केंद्र सरकार और दास को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दास ने पहचान छिपाकर धोखाधड़ी से भारतीय दस्तावेज हासिल किए। इसके अलावा, न्यायपालिका पर आपत्तिजनक बयानों के कारण उनके सोशल मीडिया खाते ब्लॉक करने और पासपोर्ट रद्द करने की मांग भी की गई है।
मद्रास उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। इस याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) से 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास की नागरिकता की जांच करने और यदि वह भारतीय नहीं पाए जाते हैं, तो उनका पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। ख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की प्रथम खंडपीठ ने चेन्नई के व्यवसायी आर. गणेश कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर श्री दास को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने दास के एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल को ब्लॉक करने और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक बयान देने से रोकने की भी मांग की है। अपने वकील बी जगन्नाथ के ज़रिए दायर एक हलफनामे में, जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने वाले व्यक्ति ने आरोप लगाया कि दास का असली नाम योगेश शर्मा था और उनका संबंध नेपाल से है। याचिकाकर्ता ने सीजेपी नेता पर आरोप लगाया कि उन्होंने भारत में आधार कार्ड, पासपोर्ट और वोटर ID धोखाधड़ी से हासिल करने के लिए इन जानकारियों को छिपाया। उन्होंने दावा किया कि महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया था।
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शपथ-पत्र में कहा गया है, प्रतिवादी संख्या 06 के पास कोई वास्तविक काम नहीं है। वह एक बेरोजगार व्यक्ति है, जो खुद को सीजेपी का प्रतिनिधि बताता है। उसने अपने सोशल मीडिया हैंडल का इस्तेमाल युवाओं के बीच नफरत फैलाने के लिए किया है, जिसमें उसने झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। यह पता नहीं है कि सौरव दास के पास कितने पासपोर्ट हैं। राष्ट्रहित में इस मामले की गहराई से जांच... की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया की कई ऐसी पोस्ट का हवाला दिया जिनमें मिस्टर दास ने न्यायपालिका की आलोचना की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्हें निश्चित रूप से विदेश से फंडिंग मिल रही होगी और केवल जांच से ही उनके फंडिंग के स्रोतों का पता चल सकता है। याचिकाकर्ता ने सीजेपी नेता पर यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल का इस्तेमाल “केवल अराजकता, अव्यवस्था, असंतोष और सत्ताधारी व्यवस्था के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए” किया है। याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि उक्त व्यक्ति के एक्स हैंडल और इंस्टाग्राम फीड पर केवल न्यायपालिका के खिलाफ अपशब्द कहे गए हैं। साथ ही, इनमें कट्टर कम्युनिस्ट विचारधारा झलकती है और कट्टर वामपंथियों का महिमामंडन किया गया है, जिससे यह साफ होता है कि योगेश शर्मा [मिस्टर दास] एक कम्युनिस्ट हैं। इसके अलावा, जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान—जिसे शिक्षा में सुधार की मांग के नाम पर आयोजित किया गया था। उन्होंने ‘संसद पर धावा बोलने’ का आह्वान किया था।
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