Delhi Riots 2020: 'केस साबित करने में नाकाम अभियोजन', Court ने सभी 12 आरोपियों को किया बरी

Delhi Riots Murder
Unsplash

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मुशर्रफ हत्याकांड में अदालत ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष चश्मदीदों के विरोधाभासी बयानों और कमजोर सबूतों के कारण आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

 यहां की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान एक व्यक्ति का अपहरण और हत्या करने के आरोपी 12 लोगों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि चश्मदीदों के बयानों में बड़े विरोधाभास और कमजोर सहायक साक्ष्यों के कारण अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह मुशर्रफ की हत्या के आरोपी लोकेश सोलंकी, पंकज शर्मा, सुमित चौधरी उर्फ ​​बादशाह, अंकित चौधरी उर्फ ​​फौजी, प्रिंस उर्फ ​​डीजे वाला, ऋषभ चौधरी उर्फ ​​तपस, जतिन शर्मा उर्फ ​​रोहित, विवेक पांचाल उर्फ ​​नंदू, हिमांशु ठाकुर, साहिल उर्फ ​​बाबू, संदीप उर्फ ​​मोगली और टिंकू अरोड़ा के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे। न्यायालय ने 21 अप्रैल के एक आदेश में कहा, “अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपने मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है और आरोपी संदेह का लाभ पाने के हकदार हैं।

तदनुसार, सभी आरोपियों को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी किया जाता है।” मुशर्रफ की मौत से जुड़े मामले में सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। मुशर्रफ का शव 27 फरवरी, 2020 को इलाके में व्यापक सांप्रदायिक हिंसा के बीच भागीरथी विहार के एक नाले से बरामद किया गया था।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि 25 फरवरी की रात को 150-200 लोगों की भीड़ जबरन मुशर्रफ के आवास में घुस गई, उसे बाहर घसीटकर ले गई, हमला किया और बाद में उसके शव को एक नाले में फेंक दिया। आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा, गैरकानूनी सभा, अपहरण, साक्ष्य नष्ट करने और शत्रुता को बढ़ावा देने सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


All the updates here:

अन्य न्यूज़