Delhi High Court ने गैर-BS-6 वाहनों के प्रवेश पर रोक के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई से किया इनकार

राजधानी में बाहरी गैर-बीएस-6 वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के दिल्ली सरकार के फैसले पर उच्च न्यायालय ने तुरंत सुनवाई से मना कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने टिप्पणी की कि इस आदेश में कुछ भी गलत नहीं है और कई वैकल्पिक वाहन उपलब्ध हैं। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही इस मामले को सामान्य तौर पर सूचीबद्ध किया जाएगा।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिसके तहत एक नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी के बाहर पंजीकृत और बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के समक्ष शुक्रवार को इस मामले का तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया था। पीठ ने कहा कि इस फैसले में कुछ भी गलत नहीं है और मामले में तत्काल सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है।
पीठ ने कहा, “नहीं, क्षमा करें। इसमें कुछ भी गलत नहीं है और न ही यह मामला तत्काल सुनवाई योग्य है।” याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से दिल्ली आने-जाने वाले कई लोग इस फैसले से प्रभावित होंगे, क्योंकि उनकी गाड़ियों के एक नवंबर से शहर में प्रवेश पर रोक लग जाएगी, जिनमें बीएस-6 मानकों का पालन नहीं करने वाली कार भी शामिल हैं। बहरहाल, अदालत ने कहा कि यात्रा के लिए कई वैकल्पिक वाहन उपलब्ध हैं।
सभी आपत्तियां दूर होने के बाद याचिका को सामान्य प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। परिवहन विभाग के अनुमानों के अनुसार, दिल्ली सरकार के एक नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक बीएस-6 उत्सर्जन मानकों से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले से गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे पड़ोसी एनसीआर क्षेत्रों में पंजीकृत 10 लाख से अधिक वाहन प्रभावित हो सकते हैं। इस निर्देश के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-4 यात्री कारों और माल ढोने वाले व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
दोपहिया वाहनों को इससे छूट दी गई है। परामर्श के अनुसार, निर्धारित नियमों और छूट के प्रावधानों के तहत बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति होगी। ये पाबंदियां ऐसे समय में लगाई जा रही हैं, जब दिल्ली और उसके पड़ोसी एनसीआर क्षेत्र लगातार वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं।
वाहनों से निकलने वाला धुआं राजधानी में प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
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