China को लगे 40 साल, Modi ने 12 साल में कर दिखाया! बचपन में गरीबी को झेलने वाले PM ने 49.6 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया

India Poverty Reduction
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विश्व बैंक की Poverty and Equity Brief, October 2026 के मुताबिक, भारत ने 2011 से 2023 के बीच अनुमानित 49.6 करोड़ लोगों को 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली निम्न-मध्यम आय वर्ग की गरीबी रेखा से ऊपर उठाया। इस अवधि में इस श्रेणी में आने वाली आबादी का अनुपात 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया।

बचपन में घोर गरीबी को बेहद करीब से देखने वाले और जीवनयापन के लिए रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी ने जब देश के प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी संभाली, तो उनके सामने भारत की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी गरीबी। करोड़ों लोगों के पास न पक्का मकान था, न बैंक खाता, न शौचालय, न रसोई गैस और न ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने गरीबों को सरकारी योजनाओं के केंद्र में रखते हुए गरीबी के अभिशाप से देश को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। अब इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं जिसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी मान रही हैं। उल्लेखनीय है कि विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की ताजा रिपोर्ट भारत की इसी परिवर्तनकारी यात्रा पर वैश्विक मुहर लगा रही है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट: 49.6 करोड़ लोगों की जिंदगी में बदलाव

विश्व बैंक की Poverty and Equity Brief, October 2026 के मुताबिक, भारत ने 2011 से 2023 के बीच अनुमानित 49.6 करोड़ लोगों को 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली निम्न-मध्यम आय वर्ग की गरीबी रेखा से ऊपर उठाया। इस अवधि में इस श्रेणी में आने वाली आबादी का अनुपात 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया। इससे भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अत्यंत गरीबी में रहने वाली आबादी का अनुपात 2011 के 27.1 प्रतिशत से घटकर 2023 में महज 2.6 प्रतिशत रह गया। विश्व बैंक ने भारत की इस प्रगति को दुनिया में गरीबी घटने की सबसे तेज प्रक्रियाओं में से एक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत घरेलू उपभोग, रोजगार में वृद्धि, विशेषकर महिलाओं की बढ़ती रोजगार भागीदारी और खाद्य सब्सिडी सहित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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गरीबी के खिलाफ मोदी सरकार की रणनीति

देखा जाये तो प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों का एक महत्वपूर्ण आधार रहा है कि गरीबों को केवल आर्थिक सहायता देने के बजाय उन्हें बुनियादी सुविधाओं और वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा जाए। जनधन योजना के जरिए करोड़ों बैंक खाते खुले। आधार और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ने सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने का रास्ता मजबूत किया। उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने गरीब परिवारों के जीवन स्तर को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से करोड़ों परिवारों को खाद्य सुरक्षा मिली। इसके साथ ही मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए रोजगार, उद्यमिता और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने का प्रयास हुआ।

वैश्विक संकट में भी भारत की आर्थिक मजबूती

साथ ही कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट, महंगाई और वैश्विक व्यापारिक तनाव के बीच भारत ने अपनी आर्थिक विकास गति बनाए रखने की कोशिश की है। बुनियादी ढांचे पर सरकारी निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, घरेलू उपभोग और मजबूत बैंकिंग व्यवस्था ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया। भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की क्षमता ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन को भी अधिक प्रभावी बनाया है।

क्या दुनिया में किसी नेता ने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है?

यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या दुनिया के किसी दूसरे नेता ने नरेंद्र मोदी जैसी आर्थिक उपलब्धि इतने कम समय में हासिल की है? तुलनात्मक रूप से देखें तो चीन ने 1978 के बाद लगभग चार दशकों में करीब 77 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का ऐतिहासिक दावा किया था। वहीं भारत ने विश्व बैंक के अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच महज 12 वर्षों में 49.6 करोड़ लोगों को 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली निम्न-मध्यम आय वर्ग की गरीबी रेखा से ऊपर पहुंचाया। अत्यंत गरीबी का अनुपात भी इसी अवधि में 27.1 प्रतिशत से घटकर 2.6 प्रतिशत रह गया। चीन की चार दशक लंबी यात्रा के मुकाबले भारत की 12 वर्षों की यह उपलब्धि अपने आप में असाधारण है।

इस उपलब्धि का राजनीतिक और नीतिगत महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस अवधि के अधिकांश वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते हैं। 2014 में सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार ने गरीबों के बैंक खाते खोलने, सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाने, मुफ्त राशन, आवास, रसोई गैस, स्वास्थ्य बीमा, स्वच्छता और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया। जनधन-आधार-डीबीटी की व्यवस्था से लेकर गरीब कल्याण योजनाओं तक, इन नीतिगत पहलों ने गरीबी के खिलाफ अभियान को व्यापक आधार दिया। इसलिए 2014 के बाद लागू और विस्तारित इन नीतियों को इस ऐतिहासिक बदलाव का एक महत्वपूर्ण नीतिगत श्रेय निश्चित रूप से दिया जाना चाहिए।

अभी बाकी है आर्थिक लड़ाई

साथ ही विश्व बैंक ने रोजगार की गुणवत्ता, युवाओं की बेरोजगारी और क्षेत्रीय असमानता को लेकर भी चिंता जताई है। देश की लगभग 57 प्रतिशत गरीब आबादी उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले राज्यों के एक क्षेत्र में केंद्रित है। 2017 से 2023 के बीच रोजगार में लगभग 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। लेकिन युवाओं के लिए बेहतर और उत्पादक रोजगार उपलब्ध कराना अभी बड़ी चुनौती है। विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक, 4.20 डॉलर वाली गरीबी रेखा पर गरीबी की दर 2026 के 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकती है।

बहरहाल, भारत की यह यात्रा केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों के जीवन में आए बदलाव की कहानी है। रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबी के खिलाफ चलाए गए अभियान ने महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं। अब चुनौती इस उपलब्धि को स्थायी आर्थिक समृद्धि में बदलने की है, ताकि गरीबी से बाहर आए परिवार दोबारा अभाव के अंधेरे में न लौटें और भारत विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ सके।

-नीरज कुमार दुबे

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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