Amit Shah की Parliament बहस की चुनौती पर Jairam Ramesh बोले, पहले रोकें परिसीमन

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने की चुनौती पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यदि सरकार गंभीर है, तो पहले मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा ले और परिसीमन प्रक्रिया रोके। साथ ही उन्होंने परिसीमन प्रस्तावों को विपक्ष से साझा करने और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की।
कांग्रेस ने मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह के उस प्रस्ताव पर पलटवार किया, जिसमें उन्होंने SIR (परिसीमन) मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की बात कही थी। पार्टी ने कहा कि अगर अमित शाह अपने इस प्रस्ताव को लेकर वाकई गंभीर हैं, तो उन्हें सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेना चाहिए और SIR की प्रक्रिया को रोक देना चाहिए। कांग्रेस के संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश ने अमित शाह से यह भी कहा कि वे सरकार के परिसीमन प्रस्तावों को पहले ही विपक्ष के साथ साझा करें और इन पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाएं। रमेश ने कहा कि संसद का मानसून सत्र समाप्त हुए 82 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इसे अभी तक औपचारिक रूप से बंद नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि गृह मंत्री लोकसभा में एक 'बेहद संदिग्ध दो-तिहाई बहुमत' के साथ परिसीमन विधेयकों को पारित कराने के लिए एक विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रहे हैं।
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एक्स पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि इन विधेयकों में क्या है, यह अभी पता नहीं है, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि इनका मकसद 2029 में बीजेपी को चुनावी हार से बचाना है। रमेश ने कहा इस बीच, खुद को चाणक्य बताने वाले - जो झांसा देने, बड़ी-बड़ी बातें करने और डींगें हांकने में माहिर हैं - कह रहे हैं कि वे 'वोट चोरी' पर चर्चा करने के लिए एक विशेष सत्र बुलाने को तैयार हैं। पिछले साल, जब पूरा विपक्ष SIR (परिसीमन) पर बहस करना चाहता था, तब उन्होंने यह कहकर मना कर दिया था कि यह चुनाव आयोग का अधिकार क्षेत्र है। उन्होंने कहा अगर गृह मंत्री 'वोट चोरी' के मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपने करीबी सहयोगी और CEC ज्ञान कुमार का इस्तीफा लेना चाहिए। उन्हें उन्हें निलंबित भी करना चाहिए। रमेश ने आगे कहा कि शाह को परिसीमन (डिलिमिटेशन) के अपने नए प्रस्ताव विपक्ष के साथ काफी पहले साझा करने चाहिए थे। उन्होंने सवाल किया कि इन प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए उन्होंने सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाई।
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उनकी यह टिप्पणी शाह के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें शाह ने कहा था कि सरकार इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार है। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद में इस पर बहस करने की चुनौती भी दी। शाह ने रविवार को दिल्ली में INDIA गठबंधन की रैली को घुसपैठियों को बचाने वाली रैली करार दिया। उन्होंने सवाल किया कि अगर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) खराब थीं, तो कांग्रेस ने तेलंगाना समेत कई राज्यों में सरकारें कैसे बनाईं? उन्होंने यह भी कहा कि गांधी केवल एक 'नकली संसद' में ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बीजेपी के लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ मार्च का नेतृत्व करते हुए शाह ने कहा वे (राहुल) हाथ में संविधान तो रखते हैं, लेकिन उसका सम्मान नहीं करते। राहुल जी, आप संसद को चलने ही नहीं देते। चाहे EVM का मुद्दा हो या घुसपैठियों का, मैं आपको हैदराबाद से चुनौती देता हूँ। हम संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार हैं। आइए, बहस कीजिए।
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