विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए BJP ने डिजिटल और जमीनी अभियान जोड़ा

भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों के हमलों का मुकाबला करने के लिए सोशल मीडिया अभियानों को पदयात्राओं और रैलियों के साथ जोड़ दिया है। पार्टी अपने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के तहत वरिष्ठ मंत्रियों और कार्यकर्ताओं को सीधे सड़कों पर उतार रही है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के विमर्श का जवाब देकर जमीनी स्तर पर जनसमर्थन जुटाना है।
(कोमल शर्मा) नयी दिल्ली, पांच नवंबर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने वाले तीखे सोशल मीडिया संदेशो और राजनीतिक गीतों से लेकर विभिन्न राज्यों में पदयात्राओं, रैलियों और जनसभाओं तक-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने राजनीतिक संदेश को मजबूत करने और विपक्ष के विमर्श का मुकाबला करने के लिए डिजिटल माध्यमों की पहुंच को जमीनी स्तर पर जनसमर्थन जुटाने के प्रयासों से तेजी से जोड़ रही है। पार्टी का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान इस बदलती रणनीति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इसके तहत पार्टी के नेता और कार्यकर्ता राजनीतिक मुकाबले को केवल ऑनलाइन मंचों तक सीमित रखने के बजाय अपना संदेश सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और विश्वविद्यालय परिसरों तक पहुंचा रहे हैं।
यह नया अभियान एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) की रैली के जवाब में शुरू किया गया है। इस रैली में विपक्षी नेताओं ने भाजपा पर चुनावी गड़बड़ियों का आरोप लगाया था और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। इसके जवाब में भाजपा ने पलटवार तेज करते हुए विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया।
पार्टी इस अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में समन्वित कार्यक्रम आयोजित कर रही है जिनमें वरिष्ठ नेता, केंद्रीय मंत्री और राज्य स्तर के पदाधिकारी पदयात्राओं, जनसभाओं और संवाददाता सम्मेलनों में हिस्सा ले रहे हैं। भाजपा के एक सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पदयात्राओं से लेकर ऑनलाइन और डिजिटल कार्यक्रमों तक, यह पूरा अभियान राज्य इकाइयों के समन्वय से चलाया जा रहा है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सहित विभिन्न मुद्दों पर जनता के सामने तथ्य रखकर राहुल गांधी के झूठ को बेनकाब करना है।’’ सूत्र ने कहा, ‘‘हमारी टीमें सभी जिलों में काम कर रही हैं और युवाओं को राहुल गांधी द्वारा फैलाए जा रहे झूठ की जानकारी दे रही हैं।
यह अभियान केवल भाजपा शासित राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों में भी चलाया जा रहा है।’’ भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन देश के विभिन्न हिस्सों में पदयात्राओं की योजना के साथ पार्टी के संगठनात्मक अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री अमित शाह, जे. पी. नड्डा और शिवराज सिंह चौहान समेत अन्य वरिष्ठ नेता भी इन कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। वहीं, राज्य स्तर के नेताओं को पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भाजपा सोशल मीडिया के जरिए भी विपक्षी नेताओं, विशेषकर राहुल गांधी पर हमले तेज कर रही है। इसके लिए वीडियो, गीत, चित्रात्मक संदेशों और तीखे राजनीतिक बयानों का सहारा लिया जा रहा है। राजनीतिक बहस को अपनी दिशा देने और विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देने के प्रयासों में ये डिजिटल अभियान प्रमुख माध्यम बन गए हैं।
इस नए अभियान की खास बात यह है कि भाजपा अपने ऑनलाइन संदेशों को जमीनी स्तर पर जनसमर्थन जुटाने के प्रयासों से जोड़ने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया के जरिए पार्टी अपने राजनीतिक विमर्श को तेजी से फैलाने और व्यापक जनसमूह तक पहुंचाने में सफल होती है, वहीं पदयात्राओं और जनसभाओं के माध्यम से उस संदेश को प्रत्यक्ष राजनीतिक गतिविधियों में बदलने का अवसर मिलता है। छात्र संगठनों की भागीदारी ने इस अभियान को एक नया आयाम दिया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) दिल्ली विश्वविद्यालय में एक बड़ी छात्र रैली सहित कई रैलियों और विरोध प्रदर्शनों का आयोजन कर रहा है। एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान और छात्र रैलियों के माध्यम से संगठन राहुल गांधी और विपक्ष की ओर से लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ पुरजोर आवाज उठा रहा है। उन्होंने दावा किया कि लखनऊ, पटना, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश सहित प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में एबीवीपी की रैलियों को मिली सफलता लोकतांत्रिक मूल्यों और रचनात्मक नेतृत्व के प्रति छात्रों के बढ़ते समर्थन को दर्शाती है।
राजनीतिक संचार के सलाहकार अनूप शर्मा ने कहा कि राजनीतिक पहुंच के मामले में भाजपा हमेशा समय से आगे रही है। उसने सोशल मीडिया की ताकत को शुरुआत में ही पहचान लिया था, व्हॉट्सऐप का व्यापक नेटवर्क तैयार किया और चुनावी विमर्श को दिशा देने के लिए डिजिटल मंचों का इस्तेमाल किया। शर्मा ने कहा, ‘‘हालांकि, ‘जेन-जी’ के विरोध प्रदर्शनों ने पार्टी को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा अपनी स्थापित ताकतों को छोड़ नहीं रही है, बल्कि अपनी रणनीति को और बेहतर बना रही है।’’ शर्मा ने कहा कि पार्टी यह भी जानती है कि केवल डिजिटल माध्यमों पर लोगों की भागीदारी से चुनाव नहीं जीते जा सकते। इसलिए वह सोशल मीडिया अभियानों को रैलियों, पदयात्राओं, स्थानीय संपर्क और अपने व्यापक जमीनी संगठन के साथ जोड़ रही है।
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