US विदेश मंत्री Marco Rubio का ऐलान, Israel-Lebanon ने ऐतिहासिक शांति समझौते पर किए साइन

Marco Rubio
ANI
Neha Mehta । Jun 27 2026 11:47AM

अमेरिकी मध्यस्थता में इज़राइल और लेबनान ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे हिज़्बुल्ला के साथ महीनों से जारी संघर्ष के बाद शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा घोषित इस समझौते के विवरण को अभी गोपनीय रखा गया है।

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका की पहल पर इजराइल और लेबनान के बीच शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को इजराइल और लेबनान के राजदूतों की मौजूदगी में एक अहम समझौते की घोषणा की। इसे इजराइली सेना और लेबनान के चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्ला के बीच कई महीनों से जारी संघर्ष के बाद तनाव कम करने की दिशा में पहली बड़ी पहल माना जा रहा है।

हालांकि, इस समझौते की शर्तों और इसके प्रमुख बिंदुओं का अभी तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से भी समझौते के विवरण को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस समझौते पर अमेरिका में इजराइल के राजदूत येचिएल लीटर और अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमदेह ने हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुए इस समझौते को क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

 

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने समझौते की घोषणा करते हुए उम्मीद जताई कि यह पहल भविष्य में स्थायी शांति स्थापित करने और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखेगा।गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से इजराइली सेना और हिज़्बुल्ला के बीच सीमा क्षेत्रों में लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रही है। इस संघर्ष के कारण दोनों देशों की सीमा पर सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित होना पड़ा है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो इससे सीमा पर हिंसा में कमी आ सकती है और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, समझौते के वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके क्रियान्वयन और दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। माना जा रहा है कि यदि यह पहल सफल रहती है तो मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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