अमेरिका का इतिहास बदल देंगे 'अब्दुल', ट्रंप के लिए क्यों बना ये नाक का सवाल, कैसे हो गया बड़ा खेल!

Abduls
@realDonaldTrump/@AbdulElSayed
अभिनय आकाश । Nov 4 2026 12:48PM

अमेरिका के मिशिगन में सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन माइक रोजर्स और डेमोक्रेट अब्दुल अल सैयद के बीच कड़ा मुकाबला है। अब्दुल की जीत उन्हें पहला मुस्लिम अमेरिकी सीनेटर बना सकती है। इस सीट का परिणाम सीनेट का राजनीतिक संतुलन बदल सकता है, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए कानून पास कराना और अहम नियुक्तियां करना कठिन हो जाएगा।

अमेरिका में एक ऐसा चुनाव हो रहा है जिस पर सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। इस चुनाव में एक तरफ हैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार माइक रोजर्स और दूसरी तरफ है डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद। अब इस मुकाबले में ऐसा क्या खास है कि इसकी चर्चा अमेरिका से लेकर यूरोप और एशिया तक हो रही है? तो समझिए दरअसल अगर अब्दुल अल सैयद चुनाव जीत जाते हैं तो वो अमेरिकी इतिहास में पहले मुस्लिम अमेरिकी सीनेट बन सकते हैं। लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है। इस एक सीट का फैसला अमेरिकी संसद के सबसे ताकतवर सदनों में से एक यानी सीनेट का राजनीतिक संतुलन भी बदल सकता है। अगर सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी अपना बहुमत खो देती है तो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए आने वाले 2 साल में कानून पास कराना, अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना और कई अहम नियुक्तियां करवाना मुश्किल हो सकता है। यानी मिशिगन की एक सीट पर मुकाबला है। लेकिन इसके राजनीतिक मायने पूरे अमेरिका के लिए हैं।

अमेरिका में इस समय राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो रहा है। डोनाल्ड ट्रंप जनवरी 2025 में दूसरी बार राष्ट्रपति बने थे। अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है और अगला राष्ट्रपति चुनाव 2028 में होना है। लेकिन इस बीच अमेरिकी संसद के चुनाव होते हैं जिन्हें मिड टर्म इलेक्शन कहा जाता है। मिड टर्म यानी राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल के बीच होने वाले चुनाव। अमेरिका की संसद को कांग्रेस कहते हैं और इसके दो सदन हैं। पहला है हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स जिसे आसान भाषा में अमेरिका की लोकसभा समझ सकते हैं। दूसरा है सेनेट जिसे मोटे तौर पर भारत की राज्यसभा से समझा जा सकता है। हालांकि दोनों देशों की संसदीय व्यवस्था में कई बड़े अंतर हैं। सबसे पहले हाउस की बात करते हैं। इसमें कुल 435 वोटिंग सदस्य होते हैं और हर राज्य को उसकी आबादी के हिसाब से सीटें मिलती हैं। वहीं ज्यादा आबादी वाले राज्यों को ज्यादा सीटें और कम आबादी वाले राज्यों को कम सीटें मिलती हैं। हाउस के सदस्यों का कार्यकाल सिर्फ 2 साल होता है। इसलिए हर दो साल में हाउस की सभी 435 सीटों पर चुनाव होते हैं। यानी राष्ट्रपति चुनाव हो या मिड टर्म चुनाव हाउस की हर सीट पर जनता वोट करती है।  
सीनेट का चुनाव क्या होता है? 
अमेरिका में कुल 50 राज्य हैं और हर राज्य से दो सीनेटर चुने जाते हैं। इस तरह सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं। यहां दिलचस्प बात यह है कि चाहे कैलिफोर्निया जैसा बड़ा राज्य हो या आबादी के लिहाज से छोटा राज्य दोनों को सीनेट में बराबर प्रतिनिधित्व मिलता है। यानी हर राज्य के दो सेनेटर और इनका कार्यकाल छ साल का होता है। लेकिन सभी 100 सेटर एक साथ चुने जाते हैं। एक साथ नहीं चुने जाते हैं। ये बड़ी महत्वपूर्ण बात। सभी सभी जो 100 सीनिटर हैं वो एक साथ नहीं चुने जाते। हर दो साल में लगभग 1/3 सीटों पर चुनाव होता है। इसी वजह से मिड टर्म चुनाव में सीनेट की पूरी 100 सीटों पर नहीं बल्कि कुछ सीटों पर ही मुकाबला होता है। 
सीनेट इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? 
राष्ट्रपति अमेरिकी सरकार चलाते हैं। राष्ट्रपति जी हां, अमेरिका की सरकार चलाते हैं। लेकिन उन्हें हर काम के लिए संसद के साथ तालमेल भी रखना पड़ता है। कानून बनाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती है। बजट और सरकारी खर्च से जुड़े विधेयकों में हाउस की अहम भूमिका होती है। वहीं राष्ट्रपति के कई बड़े अधिकारियों और संघीय जजों की नियुक्तियों को मंजूरी देने का अधिकार सीनेट के पास होता है। तो अंतरराष्ट्रीय संधियों की पुष्टि में भी सीनेट की अहम भूमिका है। यानी अगर राष्ट्रपति की पार्टी के पास सीनेट का बहुमत नहीं है तो सरकार के कई अहम फैसलों पर राजनीतिक और संसदीय अड़चनें बढ़ सकती हैं। 

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