Vitamin B1 Deficiency से जा सकती है याददाश्त, समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति जानलेवा

शरीर में विटामिन बी1 यानी थायमिन की कमी से वर्निक-कोर्साकॉफ सिंड्रोम और वेट ब्रेन जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। यह स्थिति दिमाग में ऊर्जा उत्पादन रोककर ब्रेन सेल्स को स्थायी नुकसान पहुंचाती है। इससे बचाव के लिए शराब से दूरी बनाएं और नट्स, दाल व साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार लें।
शरीर में विटामिन बी1 की कमी होने पर व्यक्ति को न्यूरोलॉजिकल समस्या हो सकती है। इस विटामिन की कमी से व्यक्ति को वेट ब्रेन की समस्या हो सकती है। हालांकि वेट ब्रेन ऑफिशियल नाम है। इस समस्या को Wernicke-Korsakoff Syndrome भी कहा जाता है। खासतौर पर यह समस्या लंबे समय तक अधिक शराब के सेवन करने वाले लोगों में देखी जाती है। लेकिन सिर्फ शराब पीने वालों में इसका खतरा हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
शरीर में पोषक तत्वों का ठीक से अवशोषण न होना, गंभीर कुपोषण और लंबे समय तक उल्टी जैसी स्थितियां भी इसका कारण बन सकती है। इसमें Wernicke encephalopathy और Korsakoff syndrome को भी शामिल किया जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक Wernicke encephalopathy अचानक से होने वाली और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती हैं। वहीं Korsakoff syndrome होने पर सोचने-समझने और याददाश्त की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
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शरीर के लिए क्यों जरूरी है विटामिन बी1
विटामिन बी1 शरीर में भोजन से एनर्जी बनाने के प्रोसेस में अहम भूमिका निभाता है। खासतौर पर दिमाग को लगातार काम करने के लिए ग्लूकोज से ऊर्जा की जरूरत होती है। साथ ही थायमिन इस एनर्जी मेटाबॉलिज्म से जुड़ी कई एंजाइम प्रोसेस के लिए जरूरी है। इसलिए इस विमामिन की कमी होने पर दिमाग और तंत्रिका तंत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। थायमिन की कमी होने पर दिमाग में ऊर्जा का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
इससे लैक्टेट और पाइरुवेट जैसे पदार्थों का कोशिकाओं में सूजन, असामान्य संचय और न्यूरोनल डैमेज जैसे प्रोसेस शुरू हो सकती हैं। गंभीर और लंबे समय तक इस विटामिन की कमी होने से ब्रेन सेल्स को स्थायी नुकसान भी हो सकता है। यही कारण है कि विटामिन बी1 की कमी को सिर्फ भूख कम लगना या कमजोरी जैसी सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विटामिन बी1 की कमी दिमाग और शरीर को करती है प्रभावित
थायमिन की कमी का असर सिर्फ दिमाग नहीं सीमित रहता, बल्कि इसकी कमी होने पर भूख कम लगना, वेट कम होना, कमजोरी और पेरिफेरियल नर्वस से जुड़े लक्षण दिख सकते हैं। गंभीर स्थिति में व्यक्ति को न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम और हृदय से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
वहीं विटामिन बी1 दिमाग से जुड़े प्रभावों में भ्रम, ध्यान लगाने में समस्या, मानसिक स्थिति में बदलाव और याददाश्त में परेशानी जैसे बदलाव शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा आंखों की गतिविधियों में असामान्यता और चलने में लड़खड़ाहट Wernicke encephalopathy के जरूरी संकेत माने जाते हैं।
एक जरूरी बात यह है कि Wernicke encephalopathy की क्लासिक तीनों समस्याएं- चलने में असंतुलन, भ्रम और आंखों की समस्या हर एक मरीज में एक साथ नहीं दिखती है। यह कुछ मरीजों में ही मौजूद होती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति में इन तीनों लक्षणों के न होने का यह संकेत नहीं होता है कि बीमारी नहीं है।
विटामिन बी1 की कमी से कैसे बचें
विटामिन बी1 की कमी से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका संतुलित और हेल्दी डाइट लेना है। दालें, बीज, नट्स, साबुत अनाज, मांस, मछली आदि खाद्य पदार्थ थायमिन के स्रोत हो सकते हैं। जिन लोगों को लंबे समय से उल्टी, भोजन के अवशोषण और कुपोषण के शिकार हैं, उनको डॉक्टर की सलाह पर भोजन करना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता है, तो सिर्फ विटामिन बी1 लेने से जोखिम कम नहीं होगा। इसके लिए पर्याप्त पोषण वाली डाइट और शराब का सेवन बंद करना भी जरूरी है।
शरीर में किसी भी तरह के कुपोषण से बचने के लिए व्यक्ति को अपनी डाइट में पौष्टिक चीजों को शामिल करना चाहिए। अगर किसी तरह की समस्या के लक्षण महसूस होते हैं, तो आपको फौरन डॉक्टर से मिलकर इलाज कराएं और सलाह पर सप्लीमेंट ले सकते हैं।
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