West Bengal में उद्योग खुद जमीन खरीदें तो 500 एकड़ पर ही मिलेगा मेगा प्रोजेक्ट का दर्जा

West Bengal में उद्योग खुद जमीन खरीदें तो 500 एकड़ पर ही मिलेगा मेगा प्रोजेक्ट का दर्जा
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पश्चिम बंगाल सरकार ने नई निवेश नीति जारी कर सीधे जमीन खरीदने वाले उद्योगों के लिए नियमों में ढील दी है। अब निजी तौर पर 500 एकड़ जमीन जुटाने वाले निवेशकों को रणनीतिक और मेगा परियोजना का दर्जा मिल सकेगा, जबकि सरकारी जमीन पर यह सीमा 1000 एकड़ है। इकाइयों को जमीन मिलने के तीन साल के भीतर उत्पादन शुरू करना अनिवार्य होगा।

कोलकाता, छह नवंबर पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार उद्योगों को जमीन मालिकों से सीधे जमीन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है। इसके लिए राज्य की नई निवेश प्रोत्साहन नीति में ‘रणनीतिक और मेगा परियोजना’ का दर्जा पाने के मानदंडों में छूट दी गई है। बृहस्पतिवार को जारी नीति दस्तावेज के अनुसार, जो उद्योग अपनी जमीन खुद खरीदेंगे, उन्हें इस श्रेणी का दर्जा पाने के लिए कम जमीन की आवश्यकता होगी।

स्वतंत्र रूप से 500 एकड़ जमीन खरीदने वाले निवेशक रणनीतिक और मेगा परियोजना का दर्जा पाने के पात्र होंगे। वहीं, सरकारी एजेंसियों से आवंटित जमीन पर निर्भर परियोजनाओं के लिए यह सीमा 1,000 एकड़ रखी गई है। यह कदम पश्चिम बंगाल में लंबे समय से चली आ रही औद्योगिक जमीन की कमी और जमीन अधिग्रहण से जुड़े राजनीतिक संवेदनशीलता के बीच उठाया गया है।

वाम मोर्चा शासन के दौरान सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अनिवार्य भूमि अधिग्रहण के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार किसानों से जबरन जमीन का अधिग्रहण नहीं करेगी, लेकिन उद्योगपतियों को जमीन की व्यवस्था करने के लिए पूरी तरह अकेला भी नहीं छोड़ेगी। इससे पिछली सरकार की नीति से अलग रुख का संकेत मिलता है।

सरकार औद्योगिक जमीन की कमी दूर करने के लिए कई उपायों पर विचार कर रही है। इनमें जमीन मालिकों से सीधे जमीन खरीदना, भूमि पूलिंग और इस्तेमाल नहीं हो रहे औद्योगिक भूखंडों को वापस लेना शामिल है। भूमि पूलिंग के तहत जमीन मालिक स्वेच्छा से नियोजित विकास के लिए अपनी जमीन दे सकते हैं।

इसमें जमा की गई जमीन के एक हिस्से का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जा सकता है, जबकि विकसित भूखंड जमीन मालिकों को उनके योगदान के अनुपात में वापस दिए जाएंगे। सरकार जमीन मालिकों से सीधे जमीन खरीदने के लिए धन जुटाने के वास्ते हुडको, नाबार्ड, एशियाई विकास बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ वित्तीय व्यवस्था करने पर भी विचार कर रही है। एक अन्य प्रस्ताव के तहत कंपनियों को आवंटित ऐसी औद्योगिक जमीन वापस लेने की योजना है, जिसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

इसके बाद इन भूखंडों का उपयोग उत्पादक गतिविधियों के लिए किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत औद्योगिक इकाइयों को जमीन हासिल करने के तीन साल के भीतर उत्पादन शुरू करना होगा। तय समय में परियोजना शुरू नहीं होने पर सरकार जमीन का आवंटन रद्द करने पर विचार कर रही है।

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