Reliance Industries का दूसरी तिमाही में नेट प्रॉफिट बढ़कर 29,550 करोड़ रुपये पहुंचा

चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की एकीकृत आय 27.8 प्रतिशत बढ़कर 3,62,268 करोड़ रुपये दर्ज की गई। तेल से रसायन कारोबार के शानदार प्रदर्शन और जियो की आमदनी में सुधार ने खुदरा क्षेत्र की मंदी की भरपाई कर दी। कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 33.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
देश की अग्रणी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 33.8 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 29,550 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के तेल से रसायन (ओ2सी) कारोबार में मजबूत प्रदर्शन और दूरसंचार कारोबार में वृद्धि ने खुदरा कारोबार की अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति की भरपाई कर दी। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में सहयोगी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों की हिस्सेदारी सहित कंपनी का शुद्ध लाभ 22,092 करोड़ रुपये था।
वहीं, कंपनी के मालिकों के हिस्से का शुद्ध लाभ 40 प्रतिशत बढ़कर 25,548 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि सितंबर तिमाही में उसकी एकीकृत आय 27.8 प्रतिशत बढ़कर 3,62,268 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की आय (ईबीआईटीडीए) 23.9 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 62,409 करोड़ रुपये रही।
नवीनतम लाभ अप्रैल-जून तिमाही के 23,196 करोड़ रुपये से अधिक है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के तेल से रसायन कारोबार का ईबीआईटीडीए 67.9 प्रतिशत बढ़कर 25,203 करोड़ रुपये रहा, जबकि इस कारोबार का राजस्व 44.2 प्रतिशत बढ़कर 2,31,601 करोड़ रुपये हो गया। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आपूर्ति बाधित होने और तेल शोधन मार्जिन बढ़ने से इस कारोबार को लाभ मिला।
कंपनी के मुताबिक, पश्चिम एशिया और रूस में तेल शोधन ढांचे पर हमलों तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति संबंधी बाधाओं से परिवहन ईंधन के मार्जिन एक साल पहले की तुलना में तीन से 3.7 गुना तक बढ़ गए। इस दौरान ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 40.6 प्रतिशत बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल रहा। कंपनी ने कहा कि कच्चे तेल पर अधिक प्रीमियम, माल ढुलाई और बीमा की ऊंची लागत तथा घरेलू ईंधन खुदरा कारोबार में नुकसान के बावजूद उसने अमेरिका और भूमध्य सागर क्षेत्र से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर रिकॉर्ड प्रसंस्करण किया।
निर्यात को बेहतर मूल्य मिलने वाले बाजारों की ओर मोड़ने से भी मार्जिन बेहतर रखने में मदद मिली। रिलायंस की डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का ईबीआईटीडीए 16.6 प्रतिशत बढ़कर 21,879 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 13.7 प्रतिशत बढ़कर 8,387 करोड़ रुपये रहा। इसका राजस्व 11.3 प्रतिशत बढ़कर 47,485 करोड़ रुपये हो गया।
सितंबर के अंत में जियो के कुल ग्राहकों की संख्या 54.24 करोड़ थी, जिनमें 30 करोड़ 5जी ग्राहक शामिल थे। प्रति ग्राहक औसत मासिक आय (एआरपीयू) बढ़कर 218.8 रुपये हो गई, जो एक साल पहले 211.4 रुपये थी। हालांकि, कंपनी के खुदरा कारोबार रिलायंस रिटेल वेंचर्स का शुद्ध लाभ 24.3 प्रतिशत घटकर 2,611 करोड़ रुपये रह गया।
इस कारोबार का राजस्व 6.4 प्रतिशत बढ़कर 91,716 करोड़ रुपये रहा, जबकि एकमुश्त क्षति प्रावधान से पहले ईबीआईटीडीए 8.6 प्रतिशत घटकर 6,228 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने इसकी वजह डिजिटल कॉमर्स में निवेश, ग्राहकों के लिए लागत वृद्धि का बोझ खुद उठाने और त्योहारों का मौसम तीसरी तिमाही में आने को बताया। रिलायंस के उपभोक्ता उत्पाद कारोबार का सकल राजस्व 1.6 गुना बढ़कर 8,266 करोड़ रुपये रहा।
मीडिया एवं मनोरंजन कारोबार जियोस्टार का राजस्व करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 6,806 करोड़ रुपये रहा, लेकिन कमजोर विज्ञापन माहौल के कारण उसका ईबीआईटीडीए 14 प्रतिशत घटकर 1,502 करोड़ रुपये रह गया। तेल एवं गैस कारोबार का ईबीआईटीडीए भी दो प्रतिशत घटकर 4,901 करोड़ रुपये रहा। आलोच्य तिमाही में कंपनी का पूंजीगत व्यय 38,153 करोड़ रुपये रहा।
सितंबर के अंत में उसका शुद्ध कर्ज 1,17,140 करोड़ रुपये था, जो जून के अंत में 1,22,914 करोड़ रुपये था। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इन नतीजों पर कहा कि जिंस बाजारों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कंपनी के कारोबार ने मजबूत प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, “इस तिमाही में हमारे तेल-से-रसायन कारोबार ने विशेष रूप से अच्छा प्रदर्शन किया।
इसकी वजह ईंधन बाजार में सीमित आपूर्ति, पेट्रोकेमिकल उत्पादों के बेहतर मार्जिन और घरेलू मांग का मजबूत बने रहना रहा।” अंबानी ने जियो की डिजिटल सेवाओं के कारोबार में वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रिलायंस रिटेल के भौतिक और डिजिटल दोनों मंचों पर उपभोक्ता मांग अच्छी बनी हुई है।
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