CREDAI ने UP RERA की शर्तों का किया विरोध, 4 महीने की राहत पर विवाद

रियल एस्टेट कंपनियों के संगठन क्रेडाई ने परियोजनाओं की समयसीमा चार महीने बढ़ाने के लिए यूपी रेरा द्वारा तय की गई कड़ी शर्तों को वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इन नियामकीय बंदिशों के कारण ज्यादातर कंपनियां केंद्र सरकार द्वारा अनुशंसित इस राहत का फायदा नहीं उठा पाएंगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 400 से अधिक कंपनियों ने आदेश में संशोधन न होने पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
रियल एस्टेट कंपनियों के शीर्ष निकाय क्रेडाई ने उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (उत्तर प्रदेश रेरा) की पात्र रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए शर्तों के साथ चार महीने की समयसीमा बढ़ाने के आदेश का विरोध किया है। संगठन का आरोप है कि नियामक की शर्तों के कारण ज्यादातर कंपनियां इस राहत का लाभ नहीं उठा पाएंगी। क्रेडाई (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) के बैनर तले 400 से अधिक कंपनियों ने 21 अगस्त के आदेश का विरोध करने का फैसला किया है।
संगठन ने यूपी रेरा के सचिव को पत्र लिखकर आदेश वापस लेने या उस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उत्तर प्रदेश रेरा ने मंगलवार को केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की 31 जुलाई की सलाह के बाद निर्देश जारी किए थे। मंत्रालय ने पश्चिम एशिया की स्थिति से उत्पन्न ‘फोर्स मेज्योर’ यानी असाधारण परिस्थितियों से प्रभावित परियोजनाओं को राहत देने का सुझाव दिया था।
ये ऐसी परिस्थितियां होती हैं जिन पर किसी का नियंत्रण नहीं होता। उत्तर प्रदेश रेरा के आदेश के तहत जिन परियोजनाओं की मूल, संशोधित या पहले से बढ़ाई गई पूरी होने की समयसीमा 28 फरवरी से 31 अक्टूबर, 2026 के बीच है, उन्हें चार महीने की अतिरिक्त समयसीमा का लाभ मिलेगा। हालांकि, जिन परियोजनाओं को पहले ही पूर्ण होने का प्रमाणपत्र या उपयोग प्रमाणपत्र मिल चुका है, उन्हें इस दायरे से बाहर रखा गया है।
इसके अलावा, राहत के लिए कई नियामकीय शर्तें भी रखी गई हैं। इनमें 28 फरवरी, 2026 तक स्वीकृत नक्शे, लेआउट या भवन योजना की वैधता, सभी लंबित तिमाही प्रगति रिपोर्ट दाखिल करना और वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट जमा करना शामिल है। क्रेडाई ने अपने बयान में कहा कि केंद्र सरकार की सलाह में ऐसी कोई अंतिम तिथि निर्धारित नहीं की गई थी और अतिरिक्त शर्तों ने राहत का दायरा काफी सीमित कर दिया है।
क्रेडाई के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया की स्थिति को ‘फोर्स मेज्योर’ माना है। इसलिए सभी परियोजनाएं स्वत: चार महीने की समयसीमा बढ़ाने के लिए पात्र होनी चाहिए थीं। शर्तें लगाकर उत्तर प्रदेश रेरा ने मामले को जटिल बना दिया है और इसका नतीजा यह है कि ज्यादातर कंपनियां इसका लाभ नहीं उठा पाएंगी।’’ संगठन ने कहा कि सामग्री की आपूर्ति में समस्या के कारण निर्माण में हुई देरी पश्चिम एशिया की स्थिति का पूरे क्षेत्र पर पड़ा असर है और इसका आकलन परियोजना-दर-परियोजना के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
क्रेडाई ने महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और हरियाणा के रियल एस्टेट नियामकों के आदेशों का भी हवाला दिया। संगठन के अनुसार, इन राज्यों में नियामकों ने ऐसी अतिरिक्त शर्तों के बिना चार महीने की समयसीमा बढ़ाई है। रियल एस्टेट कंपनियों के संगठन ने चेतावनी दी कि यदि आदेश में संशोधन नहीं किया गया तो ‘बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन’ किए जाएंगे।
उसने यह भी मांग की कि नया फैसला होने तक कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए। प्रवक्ता के अनुसार, क्रेडाई ने प्राधिकरण के समक्ष व्यक्तिगत सुनवाई और पात्र कंपनियों के लिए समान तथा आसानी से उपलब्ध राहत सुनिश्चित करने वाला संशोधित आदेश जारी करने का अनुरोध किया है।
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